‘हमने सेवा की, किशोर दा ने परिवार बना लिया’! 83 साल के तोताराम काका की यादों में आज भी जिंदा हैं किशोर कुमार

‘हमने सेवा की, किशोर दा ने परिवार बना लिया’! 83 साल के तोताराम काका की यादों में आज भी जिंदा हैं किशोर कुमार


Tailor Totaram Kaka Untold Story: खंडवा का नाम सुनते ही सबसे पहले जिस शख्स का नाम लोगों की जुबान पर आता है, वह हैं महान गायक और अभिनेता किशोर कुमार. किशोर दा ने अपनी आवाज, अभिनय और अपने अलग अंदाज से देश-दुनिया में खंडवा का नाम रोशन किया. आज भी उनके प्रशंसक खंडवा पहुंचते हैं और उनके पैतृक घर गांगुली हाउस से जुड़ी यादों को करीब से महसूस करने की कोशिश करते हैं. लेकिन किशोर कुमार की कहानी सिर्फ उनके गीतों और फिल्मों तक सीमित नहीं है. उनके आसपास ऐसे कई लोग भी रहे, जिन्होंने उन्हें करीब से देखा और उनकी सेवा की. उन्हीं में से एक हैं खंडवा के 83 वर्षीय तोताराम काका, जिनके पास किशोर दा से जुड़ी कई ऐसी यादें हैं, जो आज भी उनके दिल में जिंदा हैं. आज किशोर कुमार को याद करने खंडवा आने वाले लोगों के लिए तोताराम काका की कहानी भी उसी विरासत का हिस्सा है. वह न बड़े मंच पर नजर आए, न किसी फिल्म में उनका नाम आया, लेकिन किशोर दा के करीब रहकर उन्होंने जो समय बिताया, उसकी यादें आज भी उनके पास हैं.और यही यादें उन्हें खंडवा की किशोर कुमार से जुड़ी कहानियों में एक खास जगह देती हैं.

दर्जी का काम करते-करते किशोर दा के करीब पहुंचे
तोताराम काका खंडवा में दर्जी का काम किया करते थे. उनके हाथ के सिले कपड़े किशोर कुमार और उनके परिवार के सदस्य भी पहनते थे. काका बताते हैं कि वह किशोर कुमार के कपड़ों का नाप लेते थे और उनकी पसंद के हिसाब से कपड़े तैयार करते थे. धीरे-धीरे कपड़े सिलने का यह रिश्ता इतना गहरा हो गया कि वह सिर्फ दर्जी बनकर नहीं रह गए. किशोर कुमार उन्हें अपने करीब रखने लगे और उनके दूसरे कामों में भी मदद लेने लगे.काका के मुताबिक, किशोर दा जब भी खंडवा आते थे, उनके साथ रहने वाले लोगों में तोताराम भी शामिल रहते थे. वह किशोर कुमार का ध्यान रखते और जरूरत के काम करते थे. यही वजह थी कि दोनों के बीच का रिश्ता सिर्फ कपड़े सिलने वाले और ग्राहक का नहीं रहा, बल्कि अपनापन बढ़ता चला गया.

किशोर कुमार के लिए कपड़े सिलने की याद आज भी ताजा
तोताराम काका आज उम्र के इस पड़ाव पर भी जब किशोर कुमार का नाम लेते हैं तो उनके चेहरे पर अलग ही खुशी दिखाई देती है. उन्हें आज भी याद है कि किशोर दा किस तरह कपड़ों का नाप देते थे, किस तरह के कपड़े पसंद करते थे और कपड़े तैयार होने के बाद उन्हें किस तरह पहनते थे. काका के हाथों से सिले कपड़े किशोर कुमार और उनके परिवार तक पहुंचते थे. किशोर दा के साथ बिताए समय की बातें बताते हुए काका कहते हैं कि उस दौर में उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि जिस व्यक्ति के लिए वह कपड़े सिल रहे हैं और जिसकी सेवा कर रहे हैं, वह आगे चलकर देश-दुनिया के सबसे बड़े कलाकारों में गिने जाएंगे. उनके लिए किशोर दा उस समय भी अपने शहर खंडवा के ही अपने आदमी थे.

किशोर दा खंडवा आते तो पुराने लोगों से मिलना नहीं भूलते
तोताराम काका बताते हैं कि किशोर कुमार का खंडवा से लगाव हमेशा बना रहा. फिल्मों में बड़ी पहचान मिलने और देशभर में मशहूर होने के बावजूद वे अपने शहर और यहां के लोगों को नहीं भूले. जब भी उन्हें मौका मिलता, वे खंडवा आते और पुराने परिचितों, दोस्तों और परिवार के लोगों से मिलते थे. काका के मुताबिक, किशोर कुमार के खंडवा आने पर उनके आसपास के लोगों में अलग उत्साह रहता था. उनके लिए किशोर दा सिर्फ फिल्मी दुनिया के बड़े कलाकार नहीं, बल्कि खंडवा के अपने किशोर थे. यही अपनापन तोताराम काका की यादों में आज भी दिखाई देता है.

किशोर कुमार के घर की देखभाल भी करते रहे
किशोर कुमार से जुड़े रहने के दौरान तोताराम काका ने उनके खंडवा स्थित घर की देखभाल में भी भूमिका निभाई. घर के कोने-कोने से उनकी यादें जुड़ी हैं. काका बताते हैं कि घर की दीवारें और वहां की कई चीजें उन्हें किशोर दा के साथ बिताए समय की याद दिलाती हैं. किशोर कुमार के निधन के बाद भी तोताराम काका ने उनके घर और उनकी यादों से अपना रिश्ता नहीं छोड़ा. आज जब किशोर दा के प्रशंसक उनके खंडवा वाले घर को देखने पहुंचते हैं, तो काका अपनी यादों के आधार पर उन्हें किशोर कुमार से जुड़ी बातें बताते हैं. वह बताते हैं कि किस जगह किशोर दा बैठते थे, कहां समय बिताते थे और खंडवा आने पर उनका व्यवहार कैसा रहता था.

कहते हैं- हमने तो सेवा की थी, किशोर दा ने परिवार बना लिया
तोताराम काका किशोर कुमार के साथ अपने रिश्ते को किसी उपलब्धि की तरह नहीं बताते. उनके लिए यह सेवा और अपनापन था. वह भावुक होकर कहते हैं कि उन्होंने तो अपना काम और सेवा की थी, लेकिन किशोर दा ने उन्हें अपने परिवार की तरह मान दिया. यही बात आज भी उन्हें किशोर कुमार से जोड़े हुए है. काका की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने किशोर कुमार को सिर्फ मंच या पर्दे पर नहीं देखा, बल्कि उनके बेहद करीब रहकर उनके रोजमर्रा के जीवन को देखा. कपड़ों का नाप लेने से लेकर उनके कपड़े तैयार करने और फिर उनकी देखभाल करने तक, उन्होंने किशोर दा के साथ काफी समय बिताया.

आज भी किशोर दा की याद आते ही चेहरे पर आ जाती है मुस्कान
83 साल की उम्र में तोताराम काका की जिंदगी अब काफी बदल चुकी है, लेकिन किशोर कुमार की यादें आज भी वैसी ही हैं. जब कोई उनसे किशोर दा के बारे में पूछता है तो उनके पास सुनाने के लिए कई किस्से हैं. उनकी बातों में एक ऐसे कलाकार की याद दिखाई देती है, जिसे उन्होंने सिर्फ दूर से नहीं देखा बल्कि करीब से जाना था. किशोर कुमार आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके गीत और उनकी यादें आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में जिंदा हैं. खंडवा में उनकी यादों को संभालकर रखने वाले लोगों की भी अपनी एक कहानी है. इन्हीं लोगों में तोताराम काका का नाम भी आता है, जिन्होंने सालों तक किशोर कुमार के कपड़े सिले, उनकी सेवा की और उनके खंडवा वाले घर से जुड़े रहे.



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