संसदीय समितियों के पुनर्गठन को तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आपत्ति जताई है. पार्टी के राज्यसभा सांसद और संसदीय दल के नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को पत्र लिखकर समिति व्यवस्था में पार्टी को प्रतिनिधित्व और अध्यक्षता दिए जाने के तरीके पर सवाल उठाए हैं. ओ’ब्रायन ने कहा कि राज्यसभा के अधिकार क्षेत्र में आने वाली आठ विभाग-संबंधित स्थायी समितियों में इस बार टीएमसी को किसी भी समिति की अध्यक्षता नहीं दी गई है. उनका कहना है कि 2024-25 और 2025-26 में टीएमसी के पास जिन समितियों की अध्यक्षता थीं, उन्हें इस बार वापस ले लिया गया.
‘राज्यसभा में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है तृणमूल’
डेरेक ओ’ब्रायन ने अपने पत्र में कहा कि राज्यसभा में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है, कांग्रेस दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है और टीएमसी तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है. ऐसे में समिति व्यवस्था में टीएमसी को अध्यक्षता से पूरी तरह बाहर रखना उचित नहीं है. उन्होंने पत्र में दावा किया कि 2019 में भी TMC के साथ इसी तरह का व्यवहार किया गया था. ओ’ब्रायन ने सभापति से इस मामले पर विचार करने और समिति व्यवस्था में पार्टी के प्रतिनिधित्व को लेकर उचित कदम उठाने की मांग की है.
डेरेक ओ’ब्रायन ने संसद के कामकाज पर भी उठाए सवाल
डेरेक ओ’ब्रायन ने अपने पत्र में केवल समिति अध्यक्षता का मुद्दा नहीं उठाया, बल्कि संसद की कार्यप्रणाली और संसदीय समितियों की भूमिका को लेकर भी कई सवाल किए हैं. उन्होंने दावा किया कि 2019 से 2024 के बीच 10 में से केवल दो विधेयक संसदीय समितियों के पास भेजे गए, जबकि 2004 से 2009 के दौरान यह संख्या छह थी. उन्होंने संसद के बैठने वाले दिनों में कथित कमी का भी जिक्र किया.
उन्होंने लोकसभा के उपाध्यक्ष का पद 2019 से खाली रहने का मुद्दा भी उठाया. पत्र में उन्होंने संसद की मौजूदा स्थिति पर तीखी टिप्पणी करते हुए लिखा, ‘संसद को एक गहरे, अंधेरे कक्ष में बदला जा रहा है.’
TMC के हाथ से गई दो अहम समितियों की अध्यक्षता
संसदीय समितियों के पुनर्गठन में तृणमूल कांग्रेस को दो प्रमुख समितियों की अध्यक्षता गंवानी पड़ी है. टीएमसी की डोला सेन की जगह बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी को वाणिज्य संबंधी संसदीय समिति का अध्यक्ष बनाया गया है. वहीं, रसायन और उर्वरक संबंधी समिति की अध्यक्षता अब काकोली घोष दस्तीदार को मिली है. वह TMC के बागी धड़े से आती हैं. इससे पहले इस समिति की अध्यक्षता तृणमूल सांसद कीर्ति आजाद के पास थी.
दूसरी ओर कई समितियों में मौजूदा अध्यक्षों को ही बरकरार रखा गया है. कांग्रेस नेता शशि थरूर विदेश मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष बने रहेंगे. कृषि समिति की अध्यक्षता चरणजीत सिंह चन्नी, शिक्षा संबंधी समिति की अध्यक्षता मुकुल वासनिक और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण समिति की अध्यक्षता समाजवादी पार्टी के राम गोपाल वर्मा के पास बनी रहेगी.
शशि थरूर फिर बने विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से विदेश मामलों की संसदीय समिति का भी पुनर्गठन किया गया है. इसमें कांग्रेस सांसद डॉ. शशि थरूर को एक बार फिर समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. इस समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य रखे गए हैं. यह नई सूची 26 सितंबर से ही प्रभावी बताई गई है.
इस समिति में लोकसभा के सदस्यों में शशि थरूर के अलावा डीके अरुणा, विजय बघेल, अभिषेक बनर्जी, अरुण गोविल, दीपेंद्र सिंह हुड्डा, नवीन जिंदल, के. सुब्बारायण, के. नवास कानी, सुरेश गोपीनाथ म्हात्रे, बृजेंद्र सिंह ओला, असदुद्दीन ओवैसी, प्रदीप कुमार पाणिग्रही, मितेशभाई रमेशभाई पटेल, रविशंकर प्रसाद, वाई.एस. अविनाश रेड्डी, अपराजिता सारंगी, पुष्पेंद्र सरोज, प्रणिति शिंदे और बांसुरी स्वराज शामिल हैं. वहीं एक सीट अभी रिक्त है.
दूसरी तरफ राज्यसभा से जॉन ब्रिटास, राघव चड्ढा, सागरिका घोष, के. लक्ष्मण, सतनाम सिंह संधू, हर्षवर्धन श्रृंगला, राजीव शुक्ला, राजेश परमानंद शुक्ला, रतनजीत प्रताप नारायण सिंह और अभिषेक मनु सिंघवी समिति के सदस्य हैं.
संसदीय समितियों में BJP और सहयोगी दलों का दबदबा
संसदीय समितियों के पुनर्गठन के बाद कई अहम समितियों की कमान बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के पास बनी हुई है. रक्षा संबंधी समिति की अध्यक्षता राधा मोहन सिंह करेंगे. वहीं वित्त समिति की कमान बीजेपी के भर्तृहरि महताब के पास रहेगी, जबकि गृह मामलों की समिति की अध्यक्षता राधा मोहन दास अग्रवाल करेंगे.
इस अलावा संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे बने रहेंगे. विज्ञान-प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन समिति की अध्यक्षता मेधा विश्राम कुलकर्णी के पास रहेगी. कोयला, खान एवं इस्पात समिति की कमान पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के पास बरकरार रखी गई है.
वहीं जेडीयू सांसद संजय कुमार झा परिवहन, पर्यटन और संस्कृति समिति के अध्यक्ष बने रहेंगे, जबकि शिवसेना के श्रीरंग बारणे ऊर्जा समिति की अध्यक्षता संभालेंगे.
डीएमके और कांग्रेस नेताओं को भी मिली जिम्मेदारी
डीएमके सांसद तिरुचि शिवा को उद्योग और कनिमोझी को खाद्य, उपभोक्ता मामले एवं सार्वजनिक वितरण संबंधी समितियों का अध्यक्ष बरकरार रखा गया है.
कांग्रेस के शशि थरूर और चरणजीत सिंह चन्नी के अलावा पार्टी के मुकुल वासनिक भी अपनी समिति के अध्यक्ष बने रहेंगे. ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज समिति की अध्यक्षता कांग्रेस सांसद सप्तगिरि शंकर उलाका के पास बरकरार है.