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उत्तर प्रदेश के मऊ में एक ऐसा अनोखा मंदिर है जहां कछुए की पूजा की जाती है. मंदिर के पुजारी पंडित शशांक त्रिपाठी के अनुसार यहां कछुए को भगवान विष्णु के कच्छप अवतार के रूप में माना जाता है. धार्मिक मान्यता के मुताबिक समुद्र मंथन के दौरान भगवान विष्णु ने कच्छप रूप धारण कर मंदराचल पर्वत को आधार दिया था. इसी मान्यता के चलते भक्त यहां कछुए की मूर्ति की पूजा करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.
मऊ: अक्सर देखा जाता है मंदिरों में देवी देवताओं की प्रतिमा स्थापित होती है और लोग उन्ही की पूजा पाठ करते हैं. लेकिन मऊ जनपद में एक ऐसा मंदिर जहां कछुआ की पूजा की जाती है. मान्यता है कि यहां पूजा पाठ करने से धन की वर्षा होती है इस वजह से लोग इस कछुए की पूजा करते हैं. आईए जानते हैं क्या है और इस मंदिर की मान्यता.
मऊ के इस मंदिर पर होती है कछुआ की पूजा पाठ
लोकल 18 से बात करते हुए पुजारी पंडित शशांक त्रिपाठी बताते हैं कि मऊ के इस मंदिर के कछुआ की पूजा पाठ की जाती है. वजह यह है कि भगवान श्री अखंड नायक सच्चिदानंद श्री भगवान श्री विष्णु का अवतार माने गए हैं कछुआ जी. जब मंदराचल पर्वत को बासुकीनाथ द्वारा समुद्र मंथन हो रहा था तो उस समय मंदराचल पर्वत धसने लगा तब सभी देवताओं ने भगवान शिव से विनती किया कि समुद्र मंथन फस रहा है अब कैसे होगा. इस समय भगवान विष्णु ने अपना ड्यूटी अवतार कच्छप (कछुआ) के रूप में लेकर पर्वत को धसने से बचाया था. उसे समय मंदराचल पर्वत को बचाया था जिसमें 14 रत्न निकले हुए थे. जिसमें अमृत देकर देवताओं को शक्ति प्रदान किया गया था.
भगवान विष्णु के दूसरा रूप है कछप्प का अवतार
पंडित शशांक त्रिपाठी बताते हैं कि कछुआ का विशेष महत्व माना जाता है यदि कोई व्यक्ति कछुआ यंत्र को अपने घर के अंदर रखता है तो धन, शक्ति और समृद्धि का वातावरण बना रहता है. हालांकि अमनदीप भगवान विष्णु के द्वितीय अवतार कच्छप का मंदिर है. और लोग यहां अपने धन शक्ति और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए आकर पूजा पाठ करते हैं. बहुत लोगों को देखा जाता है कि इन्हें जीवित रखकर अपने घर के अंदर रखते हैं क्योंकि भगवान विष्णु के यह प्रमुख अवतार हैं. वैशाख के पूर्णिमा के दिन उनकी जयंती मनाई जाती है. हालांकि इनके मंदिर के अंदर ही भगवान भोलेनाथ की मंदिर भी स्थापित की गई है, धैर्य स्थिरता संतुलन और सुख समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए इस मंदिर पर पूजा पाठ किया जाता है.
कछुआ की मूर्ति की पूजा के बाद की जाती है अन्य देवी देवताओं की पूजा
इस मंदिर की विशेषता है कि यदि कोई व्यक्ति परेशान रहता है और उसे सुख समृद्धि चाहिए तो इस मंदिर पर आकर पूजा पाठ करता है और उसकी मनोकामना पूर्ण होती हैं. यही वजह है कि इस मंदिर पर देवी देवता नहीं बल्कि कछुआ की पूजा की जाती है और कछुआ की ही मूर्ति स्थापित है जिसकी लोग पूजा पाठ करते हैं और अपने परिवार में सुख समृद्धि लेकर आते हैं. जो व्यक्ति परेशान होता है उसके के सारे कष्ट इस मंदिर पर आने से दूर होते हैं.
आगे की इस मंदिर पर सिर्फ कछुआ ही नहीं बल्कि इसके आगे और भी भोलेनाथ की मंदिर है लोग वहां भी पूजा पाठ करते हैं और अपनी मन्नत को पूरी करते हैं मऊ का यह ऐसा मंदिर है जहां देवी देवता नहीं बल्कि कछुआ की पूजा पाठ की जाती है उसके बाद अन्य देवी देवताओं की पूजा पाठ की जाती है.