Kainchi Dham: कैंची धाम में जालसाजों का गजब खेल, 43 साल पहले मर चुके शख्स को 2026 में बना दिया जमीन का वारिस

Kainchi Dham: कैंची धाम में जालसाजों का गजब खेल, 43 साल पहले मर चुके शख्स को 2026 में बना दिया जमीन का वारिस


नैनीताल: बाबा नीम करौली का कैंची धाम आज देश ही नहीं, विदेशों तक अपनी पहचान बना चुका है. यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ कैंची धाम के आसपास जमीनों की कीमत भी तेजी से बढ़ी है. अब इसी बेशकीमती जमीन को लेकर फर्जीवाड़े के आरोप सामने आ रहे हैं.

मंदिर के ठीक सामने की जमीन से जुड़े एक मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. शिकायत में आरोप है कि जिस व्यक्ति की मौत साल 1983 में हो चुकी थी, उसकी जमीन पर साल 2026 में वारिस का नाम दर्ज करा दिया गया. इसके लिए फर्जी आधार कार्ड और मृत्यु प्रमाण पत्र इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाया गया है. मामला कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत तक पहुंचा, जिसके बाद इसकी जांच के निर्देश दिए गए हैं.

1983 में मौत, 2026 में दर्ज हुआ जमीन का वारिस

कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत को गमल्ला निगलाट, पट्टी पाडली, तहसील श्री कैंचीधाम में जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े की शिकायत मिली. शिकायत के मुताबिक, ओम प्रकाश नाम के एक व्यक्ति ने खुद को केशवदत्त का वारिस बताकर खतौनी में अपना नाम दर्ज करा लिया. शिकायत में यह भी कहा गया है कि ओम प्रकाश नाम का कोई व्यक्ति वहां रहता नहीं है और न ही वह उस जगह का निवासी है. कमिश्नर ने शिकायत का संज्ञान लेकर शुरुआती जांच कराई. इसमें सामने आया कि केशवदत्त की मृत्यु वर्ष 1983 में हो चुकी थी. इसके बावजूद वर्ष 2026 में फर्जी आधार कार्ड और मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर जमीन में वारिस दर्ज कराने का आरोप है.

आधार कार्ड में उम्र कुछ और, रजिस्ट्री में कुछ और

मामले में एक और बात सामने आई है, जिस पर सवाल उठ रहे हैं. पहली नजर में रजिस्ट्री में लगाया गया आधार कार्ड उत्तर प्रदेश के किसी व्यक्ति का बताया जा रहा है. उसकी उम्र करीब 40 से 50 साल के बीच बताई जा रही है. वहीं रजिस्ट्री में इसी व्यक्ति की उम्र 73 साल दर्ज होने की बात सामने आई है. अब इस अंतर को लेकर भी जांच की जरूरत बताई जा रही है.

इन लोगों पर भी लगाए गए आरोप

ग्रामवासियों की ओर से इस मामले में नरेश पांडे, संध्या बोरा, कर्नल विवेक भट्ट निवासी रामगढ़, संजय बोहरा, ग्राम डोब की प्रधान पुष्पा देवी और हिमांशु निवासी गोलापार के शामिल होने का आरोप लगाया गया है. हालांकि, इन लोगों की भूमिका और शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं, यह जांच के बाद ही साफ होगा.

कमिश्नर ने दिए लैण्ड फ्रॉड की जांच के निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए कुमाऊं कमिश्नर ने नैनीताल के जिलाधिकारी को जांच के निर्देश दिए हैं. इसमें लैण्ड फ्रॉड की जांच करने, आधार कार्ड और मृत्यु प्रमाण पत्र फर्जी हैं या नहीं, इसकी जांच करने को कहा गया है. अगर जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराने के निर्देश भी दिए गए हैं.

कैंची धाम के आसपास क्यों बढ़ी जमीन की कीमत?

कैंची धाम में देश-विदेश से श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है. इसके साथ ही आसपास पर्यटन गतिविधियां भी बढ़ी हैं. इसका असर यहां की जमीनों की कीमत पर भी पड़ा है. बेशकीमती होती जमीन के कारण अब जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है कि मंदिर के सामने और आसपास जिन जमीनों की खरीद-फरोख्त हो रही है, उनके मालिकाना हक और राजस्व रिकॉर्ड कितने साफ हैं.

सिर्फ रजिस्ट्री देखकर जमीन खरीदना काफी नहीं

जमीन से जुड़े मामलों में केवल रजिस्ट्री होना ही काफी नहीं माना जाता. जमीन किसके नाम है, पहले उसका मालिक कौन था, दाखिल-खारिज हुआ है या नहीं, जमीन की श्रेणी क्या है और राजस्व रिकॉर्ड में क्या दर्ज है, इन सभी चीजों की जांच जरूरी होती है. कैंची धाम के सामने जिन जमीनों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उनकी खसरा संख्या के आधार पर राजस्व रिकॉर्ड की जांच की जाए तो पूरे मामले की स्थिति साफ हो सकती है.

कैंची धाम की जमीन का मामला इसलिए भी अहम

कैंची धाम बाबा नीम करौली महाराज की तपस्थली और प्रसिद्ध हनुमान मंदिर के लिए जाना जाता है. यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. ऐसे में मंदिर के आसपास जमीन से जुड़ी किसी भी शिकायत को गंभीरता से देखा जा रहा है. फिलहाल इस मामले में लगाए गए आरोपों की पूरी सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी. जांच में राजस्व रिकॉर्ड, आधार कार्ड, मृत्यु प्रमाण पत्र और जमीन से जुड़े दूसरे दस्तावेजों की पड़ताल अहम होगी.



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