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इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमत इस हफ्ते 2% से ज्यादा गिर गई है. फिलहाल, ऊंची बॉन्ड यील्ड ने सोने पर दबाव बढ़ाया है, जबकि अब अमेरिकी रोजगार आंकड़ों और फेड की ब्याज दरों की दिशा पर सोने की अगली चाल निर्भर करेगी. डॉलर मजबूत होने पर दूसरी करेंसी में सोना खरीदने वाले निवेशकों के लिए इसकी लागत बढ़ जाती है. दूसरी ओर, मिडिल ईस्ट में टेंशन बढ़ने पर सुरक्षित निवेश के रूप में सोने को सहारा मिल सकता है.
सोने और चांदी की कीमतों में इस हफ्ते बड़ी गिरावट दिखी.
सोने की कीमतों में इस हफ्ते कमजोरी देखने को मिली. शुक्रवार को इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमत लगभग स्थिर रही, लेकिन पूरे हफ्ते का परफॉर्मेंस देखें तो इसमें 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई है. मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने सोने पर दबाव बढ़ाया है. अब निवेशकों की नजर अमेरिका के रोजगार आंकड़ों पर है. इन आंकड़ों से यह अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आगे ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपना सकता है.
अगर अमेरिकी रोजगार बाजार मजबूत बना रहता है, तो फेड के लिए ब्याज दरों को हाई रखने या आगे बढ़ाने की गुंजाइश बढ़ सकती है. इसका असर सोने की मांग पर पड़ सकता है, क्योंकि सोना निवेशकों को ब्याज के रूप में कोई नियमित आय नहीं देता. हालांकि, दूसरी ओर मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव सोने के लिए सहारा बन सकता है, क्योंकि ऐसे समय में निवेशक इसे सुरक्षित निवेश के तौर पर देखते हैं.
गोल्ड का रेट कितना?
शुक्रवार को स्पॉट गोल्ड करीब 4,184 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार करता नजर आया. इसमें दिन के दौरान ज्यादा बदलाव नहीं हुआ, लेकिन हफ्ते के आधार पर कीमत 2 फीसदी से अधिक नीचे है. अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में करीब 0.3 फीसदी की तेजी रही. सोने की कीमतों पर अमेरिकी डॉलर की मजबूती का भी असर पड़ा है. डॉलर मजबूत होने पर दूसरी करेंसी में सोना खरीदने वाले निवेशकों के लिए इसकी लागत बढ़ जाती है. इससे इंटरनेशनल मार्केट में सोने की मांग प्रभावित हो सकती है.
बॉन्ड यील्ड बढ़ने से सोने पर दबाव
अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में हालिया तेजी भी सोने के लिए चुनौती बनी हुई है. 10 साल और 30 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड गुरुवार को 2002 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई. जब बॉन्ड जैसे ऑप्शन से निवेशकों को ज्यादा ब्याज मिलने की उम्मीद होती है, तो बिना ब्याज देने वाली एसेट यानी सोने की आकर्षकता कम हो सकती है. यही वजह है कि बाजार में फिलहाल अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा को लेकर सोने पर दबाव बना हुआ है.
US जॉब डेटा से तय होगी आगे की चाल
अब बाजार की सबसे बड़ी नजर अमेरिकी नॉनफार्म पेरोल रिपोर्ट पर है. यह आंकड़ा अमेरिकी रोजगार बाजार की स्थिति का अहम संकेत देता है और फेड के अगले ब्याज दर फैसले की उम्मीदों को प्रभावित कर सकता है. अगर रोजगार के आंकड़े उम्मीद से मजबूत आते हैं, तो बाजार में यह धारणा मजबूत हो सकती है कि फेड ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर विचार कर सकता है. ऐसी स्थिति में सोने की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है. वहीं, कमजोर रोजगार आंकड़े ब्याज दरों को लेकर नरम रुख की उम्मीद बढ़ा सकते हैं.
दिसंबर की बैठक पर भी नजर
हाल के महंगाई आंकड़ों ने भी बाजार की उम्मीदों को बदला है. अगस्त में अमेरिका की महंगाई बाजार की अपेक्षा से कम बढ़ी, जिससे तत्काल ब्याज दर बढ़ने की आशंका कुछ कम हुई है. फिलहाल बाजार इस महीने दर बढ़ने की संभावना को पहले के मुकाबले काफी कम मान रहा है, जबकि दिसंबर में बढ़ोतरी की उम्मीद अभी भी बनी हुई है. फेड के दो अधिकारियों ने भी संकेत दिया है कि अगला फैसला लेने से पहले वे रोजगार और महंगाई समेत नए आंकड़ों का इंतजार करना चाहते हैं.
आगे सोने की चाल दो फैक्टर्स से प्रभावित हो सकती है. पहला अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा और दूसरा जियो पॉलिटिकल तनाव. इससे ऊंची ब्याज दरें और मजबूत डॉलर सोने के लिए दबाव बनाए रख सकते हैं, जबकि मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने पर सुरक्षित निवेश के रूप में इसकी मांग बढ़ सकती है.