किसानों की फसल के लिए जानी दुश्मन हैं ये 2 कटीले पौधे, खेत को बना देंगे बंजर
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Amethi News: प्रकृति में कुछ पौधे ऐसे भी हैं, जो फसल और किसान दोनों के दुश्मन हैं और अगर खेत में ये पौधे उग गए, तो किसान की फसल पूरी तरह बर्बाद होने का खतरा बना रहता है. इसको लेकर एक्सपर्ट ने खास सलाह दी है और बताया है कि इस स्थिति में किसान भाई क्या करें.
अमेठी: हमारे खेतों के आसपास हमारी फसल बेहतर हो, इसके लिए तमाम खरपतवार नियंत्रक का हम उपयोग करते हैं. लेकिन कुछ ऐसे पौधे भी हमारे पास होते हैं, जिन्हें हम नजरअंदाज करके उसे पौधे को खेत में एक किनारे पड़ा रहने देते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि वह पौधा हमारे लिए नुकसानदाई होने के साथ-साथ हमारी जमीन को अनउपजाऊ बना देता है. हम बात कर रहे हैं कीकड और बबूल के पौधे की, जो फसल को नुकसान करने के साथ-साथ हमारी जमीन की पैदावार को खत्म कर देता है और हमारी फसल पूरी तरीके से नष्ट हो जाती है और जमीन भी खेती लायक सुरक्षित नहीं रहती.
कीकड और बबूल के पौधे से काफी नुकसान किसानों को होते हैं. पौधे की जड़े हमारी जमीन को बंजर बना देती हैं और इसकी जड़ पूरे खेत के क्षेत्रफल में फैलकर जमीन को नष्ट कर देती है. ऑक्सीजन, प्रोटीन और पोषक तत्व को भी पूरी तरीके से नष्ट कर देती हैं, जिसके कारण किसान को तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ता है और बाद में किसान पछताते हैं.
एक्सपर्ट ने बताया नुकसान कहां दूर करें पौधा
अमेठी में कृषि विभाग में तैनात कृषि रक्षा इकाई अधिकारी देवेंद्र निरंजन बताते हैं कि यह पौधा पूर्ण रूप से नुकसानदायक होता है. दोनों पौधे में ना सिर्फ इनकी जड़ नुकसानदाई है, बल्कि पौधों की छाया भी खेत को अनुपयोगी और जमीन को फसल पैदावार की वृद्धि रोकने में मददगार होती है. इस पौधे की जड़ और छाया दोनों किसानों के लिए नुकसानदायक है और इसके लिए सिर्फ यही उपाय करें कि अपने खेत में यदि ये पौधा है तो उसे तत्काल खेत से बाहर कर दें.
किसानों को किया जाता है जागरूक
उन्होंने कहा कि कोई भी रोग हो कोई भी नुकसानदायक पौधा हो, समय-समय पर किसानों को इसके लिए जागरूक किया जाता है और किसान अपनी किसान आईडी के जरिए किसी भी कृषि कल्याण केंद्र पर 50% छूट पर कोई भी दवा जो महत्वपूर्ण है और फसल को बेहतर पैदावार में मददगार होती है, वह आसानी से प्राप्त कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि इसके लिए विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से समय-समय पर किसानों को कैंप के जरिए खेतों में जाकर और अन्य स्थानों पर उन्हें जागरूक किया जाता है.