होर्मुज स्‍ट्रेट में 72 घंटे में 5 जहाजों पर अटैक, अमेरिका के छूट रहे पसीने – hormuz strait become deathbed iran attack 5th ship in 72 hours

होर्मुज स्‍ट्रेट में 72 घंटे में 5 जहाजों पर अटैक, अमेरिका के छूट रहे पसीने – hormuz strait become deathbed iran attack 5th ship in 72 hours


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Hormuz Strait Attack: होर्मुज स्‍ट्रेट का ग्‍लोबल एनर्जी सप्‍लाई चेन में अहम भूमिका है. अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर अटैक करने के बाद यह आपूर्ति शृंखला छिन्‍न-भिन्‍न हो गई है. लगातार हमले होने से इस रूट से जहाजों की आवाजाही पहले की अपेक्षा काफी कम हो चुकी है.

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स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक और जहाज पर अटैक किया गया है, जिससे शिप में आग लग गई. (फाइल फोटो/Reuters)

Hormuz Strait Attack: लाल सागर की तरफ से हूती और फारस की खाड़ी से से लेकर ओमान की खाड़ी तक ईरान गदर मचाए हुए हैं. ताबड़तोड़ हमले से अमेरिका और उसके सहयोगियों के माथे से पसीना निकल रहा है. ईरान ने खासकर होर्मुज स्‍ट्रेट को श्‍मशान बना रखा है. दुनिया का एनर्जी कॉरिडोर कहे जाने वाला होर्मुज अमेरिका और ईरान की पंजे में फंसकर फड़फड़ा है. अब ईरान की तरफ से होर्मुज स्‍ट्रेट में एक बार फिर से हमला करने की खबर है. बताया जा रहा है कि ईरानी हमले का शिकार बने जहाज में आग लग गई है. पिछले 72 घंटे में 5 जहाजों पर अटैक किया गया है. पहले से ही वीरान हो चुके होर्मुज से अब हर कोई गुजरने से डर रहा है. अमेरिका ने इस समुद्री गलियारे में पूर्ण सुरक्षा देने का भरोसा दिलाया था, लेकिन तेल, गैस और अन्‍य जरूरी सामानों से लदे टैंकर्स को लगातार निशाना बनाया जा रहा है. ईरान जंग शुरू होने के बाद से होर्मुज स्‍ट्रेट से तेल और गैस लदे जहाजों की आवाजाही न के बराबर रह गई है.

ओमान के पास रणनीतिक रूप से महत्‍वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में एक और टैंकर पर हमला किए जाने की खबर है, जिसके बाद जहाज में आग लग गई. ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि चालक दल सुरक्षित है, जबकि जहाज को हुए नुकसान का तत्काल पता नहीं चल सका है. ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने स्थानीय सूत्रों के हवाले से बताया कि करीब 25 लाख बैरल क्षमता वाला सुपरटैंकर ओमान के तट से लगभग 8 किलोमीटर दूर प्रभावित हुआ है. हालांकि, हमले के लिए जिम्मेदारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. यह घटना ऐसे समय हुई है जब 29 सितंबर को तीन टैंकरों को निशाना बनाए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी. इससे क्षेत्र में कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.





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