इजरायली यात्रियों से भरी Flydubai की फ्लाइट में हुई घटना की चर्चा हर किसी की जुबान पर है. दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट FZ1073 को क्रैश कराने की कोशिश नाकाम हुई. यहां आसमान में उड़ते जहाज की कॉकपिट में ओमान के फर्स्ट ऑफिसर को-पायलट ने कथित तौर पर भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला कर दिया और विमान को नीचे की तरफ स्टीप डाइव यानी गोता खिलाने की कोशिश की. हालांकि कैप्टन की बहादुरी और यात्रियों की मदद से हमलावर को काबू में कर लिया गया और विमान की सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर आपातकालीन लैंडिंग कराई गई. ये तो हो गई वो सारी बातें, जो दो दिन से हर कोई जान रहा है. लेकिन इसमें एक ऐसा फैक्टर है जो नजरअंदाज करना मुश्किल है. ये है फ्लाइट की नंबर का गेम. आखिर इसमें ऐसा क्या है कि इजरायल पर अब तक हुए सबसे बड़े हमले से इस हाईजैक अटेम्प्ट को जोड़कर देखा जा रहा है.
फ्लाइट की कॉकपिट में मारपीट की घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया और इंटरनेट पर तरह-तरह की कॉन्सपिरेसी थ्योरी का दौर शुरू हो गया. इंटरनेट और सोशल मीडिया यूजर्स के साथ एक्सपर्ट्स ने इस घटना की टाइमिंग, फ्लाइट नंबर और इजरायल-हमास संघर्ष की तारीखों के बीच एक अजीब संबंध खोजना शुरू कर दिया. इस पूरी थ्योरी के पीछे एक छिपा इशारा है. 10-7-3 का अंक गणित या न्यूमेरोलॉजी है.
सोशल मीडिया यूजर्स का दावा है कि फ्लाइट संख्या FZ1073 में 10/7/3 के पीछे राज छिपा है. इसमें अंक 10 और 7 असल में 10वें महीने यानी अक्टूबर के साथ ही 7 तारीख को डिकोड करते हैं. ये 7 अक्टूबर 2023 की वही तारीख जब हमास ने इजरायल पर अभी तक का सबसे बड़ा हमला किया था. वहीं फ्लाइट संख्या का आखिरी का नंबर 3 इस घटना के तीन साल बाद 2026 में हुई इस कोशिश को दर्शाता है.
सोची समझी साजिश, प्लेन नंबर टार्गेट
ऑनलाइन थ्योरिस्ट्स का मानना है कि यह कॉकपिट में हुआ साधारण सा विवाद या फिर एकाएक हुआ हमला नहीं था, बल्कि पूरी तैयारी के साथ किया गया था. यह 7 अक्टूबर के हमलों की बरसी से ठीक पहले रचा गया सांकेतिक हमला था. उनका दावा है कि इस हमले का मकसद इजरायली यात्रियों से भरी इस फ्लाइट को दुर्घटनाग्रस्त करके बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाना था.
आधिकारिक तौर पर जांच एजेंसियां इस मामले के हर पहलू की जांच कर रही हैं. इसमें यूएई, सऊदी अरब, इजरायल और ओमान भी शामिल हैं. हालांकि, इजरायली और सिक्यॉरिटी एक्सपर्ट्स का ऐसा मानना है कि इस घटना के पीछे किसी आतंकवादी संगठन का हाथ था या फिर यह एक सरफिरे का काम था, इसका खुलासा तो जांच के बाद ही हो पाएगा.
क्या हुआ था 7 अक्टूबर को?
7 अक्टूबर 2023 को फिलस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास ने इजरायल पर इतिहास का सबसे बड़ा और अचानक हमला बोला था, जिसने पूरे मिडिल ईस्ट की राजनीति और सुरक्षा स्थिति को बदल दिया. हमास ने इस सैन्य अभियान को ऑपरेशन अल-अक्सा फ्लड नाम दिया था. इस सुबह जब इजरायली नागरिक यहूदियों के त्योहार ‘सिमचैट तोराह’ के जश्न की तैयारियों में लगे थे, तभी सुबह करीब 6:30 बजे अचानक साइरन की आवाज से पूरा इजरायल दहल उठा.
गाजा पट्टी की तरफ से महज कुछ ही घंटों में 5000 से अधिक रॉकेट दागे गए. लेकिन यह केवल एक रॉकेट हमला नहीं था, बल्कि यह आधुनिक इतिहास के सबसे घातक और अभूतपूर्व घुसपैठ हमलों में से एक था. जमीन, हवा और समुद्र से हमला होने लगा. हमास के बंदूकधारियों ने गाजा पट्टी और इजरायल को अलग करने वाली सुरक्षा बाड़ को विस्फोटकों और बुलडोजरों से तोड़ डाला. इसके साथ ही लड़ाके मोटरबाइक, ट्रकों, पैराग्लाइडरों और नावों के जरिए इजरायली सीमा में दाखिल हो गए.
हमलावरों ने सीमा के पास स्थित इजरायली सैन्य अड्डों, रिहायशी बस्तियों और गाजा सीमा के पास आयोजित ‘सुपरनोवा म्यूजिक फेस्टिवल’ को निशाना बनाया. यहां निहत्थे युवाओं पर अंधाधुंध गोलियां चलाई गईं, जिसमें अकेले एक ही जगह पर 360 से अधिक बेकसूर लोगों की जान चली गई.
7 अक्टूबर के हमले में लगभग 1200 लोग मारे गए, जिनमें इजरायली नागरिकों के अलावा कई विदेशी नागरिक भी शामिल थे. दूसरे विश्व युद्ध के होलोकॉस्ट के बाद यह यहूदियों पर हुआ सबसे बड़ा और जानलेवा हमला करार दिया गया. हमास के लड़ाकों ने बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों समेत करीब 250 लोगों को अगवा कर गाजा पट्टी की खुफिया सुरंगों में बंधक बना लिया.
ऑपरेशन आयरन स्वॉर्ड्स
इस अप्रत्याशित हमले के तुरंत बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने देश में आपातकाल और युद्ध की घोषणा कर दी. इजरायल डिफेंस फोर्सेस ने हमास के खात्मे और बंधकों की रिहाई के मकसद से Operation Iron Swords की शुरुआत की. इजराइल ने गाजा पट्टी पर चौतरफा हवाई बमबारी और ग्राउंड ऐक्शन शुरू कर दिया, जिसके बाद गाजा में भयानक तबाही देखने को मिली और लाखों लोग विस्थापित हो गए.