पीछे वाले पन्ने पर बनाते थे चित्र, होम ट्यूशन पढ़ाकर पूरी की पढ़ाई, अब टिकुली कला से मिली राष्ट्रीय पहचान

पीछे वाले पन्ने पर बनाते थे चित्र, होम ट्यूशन पढ़ाकर पूरी की पढ़ाई, अब टिकुली कला से मिली राष्ट्रीय पहचान


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Jehanabad Dipu Kumar Tikuli Art Story: पटना के दीपू कुमार को कला के प्रति लगन और मेहनत के लिए राष्ट्रीय युवा कला रत्न सम्मान मिला है. उन्होंने होम ट्यूशन पढ़ाकर अपनी कला शिक्षा पूरी की और अब जहानाबाद में कला शिक्षक हैं.

जहानाबाद: बचपन से कला में ही रुचि थी. गणित का क्लास भी चलता था तो एक तरफ विषय की पढ़ाई करता और पीछे वाले पन्ने में चित्रकारी करता रहता. कई बार शिक्षक से पिटाई भी लगी, लेकिन कला के क्षेत्र से कभी ध्यान नहीं हटा. हालांकि, यह जरूर जानता था कि हमारे पास संसाधन की कमी है और आर्थिक रूप से मजबूत भी नहीं. हमारे साथ पिता भी नहीं. अकेली मां मेरा और मेरे भाई बहन का खर्च कैसे संभाल पाएगी. हमने हार नहीं मानी. होम ट्यूशन से अपना जेब खर्च निकालने लगा. एक बार ऐसा मौका आया, जब एक सीनियर मिले और उनका कला के प्रति पैशन को देख हमने भी यह ठान लिया कि अब इसी क्षेत्र में आगे बढ़ना है.

5 साल के सफर के दौरान बहुत उपलब्धियां मिलीं
इस तरह से कला के क्षेत्र में सफ़र की शुरुआत हुई पटना के रहने वाले दीपू कुमार की. सीनियर के जरिये यह जानकारी मिली कि पटना में कला एवं शिल्प महाविद्यालय है, जो बिहार झारखंड का इकलौता है. 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उसी कॉलेज के लिए आवेदन किया. परीक्षा भी दी. इस तरह रैंक 20 आया और यहां नामांकन हो गया. अब कारवां बढ़ाना आसन हो गया. आर्थिक रूप से सक्षम नहीं होने के चलते हमने होम ट्यूशन को कमाई का जरिया बनाए रखा. आखिरकार 5 साल के सफ़र के दौरान बहुत ही उपलब्धियां प्राप्त की.

होम ट्यूशन पढ़ाकर सीखी कला
दीपू का सफर कॉलेज तक ही सीमित नहीं रह गया, बल्कि उन्होंने अपनी प्रतिभा को राजकीय स्तर से देश विदेश तक पहुंचाई. इनकी मेहनत और लगन से राजकीय कला सम्मान भी बिहार सरकार से मिला. इसके साथ ही दीपू के चित्रकला को बिहार म्यूजियम में भी जगह दी गई. इन्हीं उपलब्धियों के दौरान दीपू का 2016 में जहानाबाद के मांदिल प्लस 2 स्कूल में कला शिक्षक के रूप में नौकरी हुई. तब से थोड़ा सुकून मिला और आर्थिक रूप से भी सब अच्छा होने लगा. हालांकि, अपनी कला का साथ कभी नहीं छोड़ा. विद्यालय के बच्चों को सिखाने के साथ साथ अपनी कोशिश भी जारी रखी.

लगन और मेहनत ने दिलाई राष्ट्रीय स्तर की पहचान
इसी का परिणाम है, हमें राष्ट्रीय युवा कला रत्न सम्मान से पुरस्कृत किया गया है. इस सम्मान ने हमें एक अलग ऊर्जा दी है और इससे न सिर्फ हमारा, बल्कि राज्य का भी नाम रोशन हुआ है. आयोजन समिति ने उनकी कला प्रतिभा और टिकुली कला सहित लोक कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए उन्हें इस सम्मान के लिए चुना है.

दीपू को मिला राष्ट्रीय युवा कला रत्न सम्मान
दीपू कुमार ने Local 18 से कहा कि शुरू से कला के क्षेत्र में रुचि रही है. हमने इस विषय में बिहार झारखंड के एक मात्र डिग्री कॉलेज से 5 वर्ष का कोर्स किया है. इसके बाद हमारी शिक्षक के रूप में जहानाबाद में 2016 में ज्वाइनिंग हुई, जहां कला के बारे में बच्चों को शिक्षा देते हैं.

बच्चों का प्यार, शिक्षकों का सहयोग के चलते ही एक बार फिर से हमारी यात्रा राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची है. हमारे सफर को इस लेवल तक पहुंचाने में पद्मश्री अशोक कुमार विश्वास से ली है. हम बिहार की खोई कला टिकुली कला का कलाकार हूं और ऐसी कई कलाएं हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जा चुकी है. हमारी बच्चों को यही सलाह रहेगी कि वो जिस भी क्षेत्र में आना चाहते हैं उसका गहनता से पढ़ाई करें. सफलता तभी मिल सकती है.”



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