चित्रकूट से दिल्ली कार से है जाना, तो पहले सेव कर लें ये पूरा एक्सप्रेसवे रूट

चित्रकूट से दिल्ली कार से है जाना, तो पहले सेव कर लें ये पूरा एक्सप्रेसवे रूट


धर्म नगरी चित्रकूट में देशभर से श्रद्धालु मठ-मंदिरों के दर्शन करने पहुंचते हैं. इनमें बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी होते हैं, जो चित्रकूट आने के बाद या यहां से वापस लौटते समय दिल्ली की यात्रा अपने निजी वाहन से करना पसंद करते हैं. अगर आप भी चित्रकूट से दिल्ली अपने वाहन से जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो सही रूट का चुनाव आपके सफर को काफी आसान बना सकता है और रूट में ट्रैफिक भी कम मिल सकता है.

चित्रकूट से दिल्ली के लिए बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे सबसे आसान रूट

आपको बता दें कि चित्रकूट से दिल्ली जाने के लिए बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे एक प्रमुख मार्ग है. यह चित्रकूट जिले के भरतकूप के पास गोंडा गांव में एनएच-35 पर है. यहां से वाहन बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर चढ़कर सीधे बुंदेलखंड के कई जिलों को पार करते हुए इटावा के पास कुदरैल पहुंचते हैं. इसके बाद दूसरे एक्सप्रेसवे को पकड़कर आसानी से दिल्ली पहुंच सकते हैं.

अगर बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की लंबाई की बात करें तो यह करीब 296 किलोमीटर तक बना हुआ है. यह चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन, औरैया और इटावा जिलों से होकर गुजरता है.

यह है चित्रकूट से दिल्ली का पूरा रूट

चित्रकूट के निवासी सत्यप्रकाश द्विवेदी ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि अगर आप चित्रकूट शहर से दिल्ली की तरफ जा रहे हैं तो सबसे पहले भरतकूप की ओर पहुंचकर बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर चढ़ सकते हैं. यह रूट बांदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन और औरैया होते हुए इटावा के कुदरैल तक जाता है.

कुदरैल से आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जुड़ता है रूट

कुदरैल के पास बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जुड़ जाता है और यह दिल्ली का सफर और आसान बना देता है. चित्रकूट से दिल्ली की दूरी करीब 620 किलोमीटर है. पुराने रास्तों की तुलना में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद दिल्ली की यात्रा का समय काफी कम हुआ है. अब चित्रकूट से दिल्ली पहुंचने के लिए लोगों को लगभग 6 घंटे का समय लगता है.

एक्सप्रेसवे पर कम ट्रैफिक से सफर आसान

उन्होंने आगे की जानकारी में बताया कि सबसे खास बात यह है कि इस रूट में ट्रैफिक भी कम रहता है. इससे लोग आसानी से दिल्ली का सफर कर सकते हैं. अगर ट्रेन की बात करें तो चित्रकूट से दिल्ली जाने के लिए ट्रेन से लोगों को लगभग 10 घंटे का समय देना होता है.धर्म नगरी चित्रकूट में देशभर से श्रद्धालु मठ-मंदिरों के दर्शन करने पहुंचते हैं. इनमें बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी होते हैं, जो चित्रकूट आने के बाद या यहां से वापस लौटते समय दिल्ली की यात्रा अपने निजी वाहन से करना पसंद करते हैं. अगर आप भी चित्रकूट से दिल्ली अपने वाहन से जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो सही रूट का चुनाव आपके सफर को काफी आसान बना सकता है और रूट में ट्रैफिक भी कम मिल सकता है.

चित्रकूट से दिल्ली के लिए बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे सबसे आसान रूट

आपको बता दें कि चित्रकूट से दिल्ली जाने के लिए बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे एक प्रमुख मार्ग है. यह चित्रकूट जिले के भरतकूप के पास गोंडा गांव में एनएच-35 पर है. यहां से वाहन बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर चढ़कर सीधे बुंदेलखंड के कई जिलों को पार करते हुए इटावा के पास कुदरैल पहुंचते हैं. इसके बाद दूसरे एक्सप्रेसवे को पकड़कर आसानी से दिल्ली पहुंच सकते हैं.

अगर बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की लंबाई की बात करें तो यह करीब 296 किलोमीटर तक बना हुआ है. यह चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन, औरैया और इटावा जिलों से होकर गुजरता है.

यह है चित्रकूट से दिल्ली का पूरा रूट

चित्रकूट के निवासी सत्यप्रकाश द्विवेदी ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि अगर आप चित्रकूट शहर से दिल्ली की तरफ जा रहे हैं तो सबसे पहले भरतकूप की ओर पहुंचकर बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर चढ़ सकते हैं. यह रूट बांदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन और औरैया होते हुए इटावा के कुदरैल तक जाता है.

कुदरैल से आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जुड़ता है रूट

कुदरैल के पास बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जुड़ जाता है और यह दिल्ली का सफर और आसान बना देता है. चित्रकूट से दिल्ली की दूरी करीब 620 किलोमीटर है. पुराने रास्तों की तुलना में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद दिल्ली की यात्रा का समय काफी कम हुआ है. अब चित्रकूट से दिल्ली पहुंचने के लिए लोगों को लगभग 6 घंटे का समय लगता है.

एक्सप्रेसवे पर कम ट्रैफिक से सफर आसान

उन्होंने आगे की जानकारी में बताया कि सबसे खास बात यह है कि इस रूट में ट्रैफिक भी कम रहता है. इससे लोग आसानी से दिल्ली का सफर कर सकते हैं. अगर ट्रेन की बात करें तो चित्रकूट से दिल्ली जाने के लिए ट्रेन से लोगों को लगभग 10 घंटे का समय देना होता है.



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