कडप्पा से YSR कांग्रेस सांसद वाई.एस. अविनाश रेड्डी एक बार फिर विवेकानंद रेड्डी हत्याकांड को लेकर चर्चा में हैं. प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने उन्हें 14 अक्टूबर को पूछताछ के लिए बुलाया है. मामला उनके चाचा और आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री वाई.एस. विवेकानंद रेड्डी की हत्या से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन का है. ED अब इस केस की मनी ट्रेल खंगाल रही है.
कौन हैं अविनाश रेड्डी?
वाई.एस. अविनाश रेड्डी कडप्पा लोकसभा सीट से YSR कांग्रेस पार्टी के सांसद हैं. वह वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी के चचेरे भाई हैं. वहीं विवेकानंद रेड्डी उनके चाचा थे. विवेकानंद रेड्डी, आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी के छोटे भाई थे. इस तरह यह मामला आंध्र प्रदेश के एक बड़े राजनीतिक परिवार से भी जुड़ा है. अविनाश रेड्डी 2019 के विवेकानंद रेड्डी हत्या मामले में आरोपी हैं. CBI की आगे की जांच में उनके नाम और भूमिका को लेकर आरोप सामने आए थे. सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में भी दर्ज है कि आगे की जांच के दौरान अविनाश रेड्डी और अन्य लोगों की भूमिका सामने आने की बात CBI की ओर से कही गई थी. हालांकि, मामले में जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों को अलग समझना जरूरी है.
2019 में घर में हुई थी हत्या
विवेकानंद रेड्डी की 14 और 15 मार्च 2019 की दरम्यानी रात पुलिवेंदुला स्थित उनके घर में हत्या कर दी गई थी. वह उस समय 68 साल के थे. वह पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी के भाई और बाद में मुख्यमंत्री बने वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी के चाचा थे.
शुरुआत में इस मामले की जांच आंध्र प्रदेश पुलिस की विशेष जांच टीम ने की. इसके बाद विवेकानंद रेड्डी की बेटी सुनीता रेड्डी की याचिका पर आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने CBI जांच का रास्ता साफ किया. CBI ने जुलाई 2020 में केस दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई.
₹40 करोड़ की कथित सुपारी का क्या है मामला?
इस केस में सबसे ज्यादा चर्चा ₹40 करोड़ की कथित सुपारी को लेकर है. CBI की जांच के मुताबिक, विवेकानंद रेड्डी की हत्या के लिए आरोपियों को कथित तौर पर ₹40 करोड़ देने का वादा किया गया था. CBI की चार्जशीट के अनुसार हत्या में शामिल लोगों ने विवेकानंद रेड्डी की गतिविधियों पर नजर रखी थी और 14-15 मार्च की रात उनके घर में पहुंचकर हत्या की.
CBI के आरोपों के मुताबिक, हत्या की साजिश में वाई.एस. भास्कर रेड्डी और उनके बेटे अविनाश रेड्डी की भूमिका की भी जांच हुई. हालांकि, इन आरोपों को अंतिम दोषसिद्धि के रूप में नहीं लिखा जा सकता. मामले की न्यायिक प्रक्रिया अलग स्तर पर जारी रही है.
ED अब पैसों की पूरी मनी ट्रेल देख रही
ED ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की है. एजेंसी का केस CBI की FIR और उसकी चार्जशीट पर आधारित है. ED अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हत्या से जुड़े कथित पैसों का लेन-देन कैसे हुआ और पैसा किन लोगों तक पहुंचा.
मौजूदा जांच में कथित ₹40 करोड़ के सौदे के अलावा ₹4 करोड़ के कथित ट्रांसफर और शेख दस्तगीर को दिए गए ₹1 करोड़ के कथित एडवांस का भी जिक्र है. ED ने सितंबर में सुनील यादव, येरा गांगी रेड्डी और दूसरे आरोपियों से पूछताछ की. इसके बाद अब अविनाश रेड्डी को 14 अक्टूबर को बुलाया गया है.
ED के समन से फिर क्यों चर्चा में केस?
इस मामले में ED की कार्रवाई इसलिए अहम है क्योंकि जांच अब सिर्फ हत्या की साजिश तक सीमित नहीं है. एजेंसी कथित पैसों के स्रोत और उनके लेन-देन की कड़ी जोड़ने की कोशिश कर रही है. पिछले महीने ED ने अविनाश रेड्डी, उनके पिता वाई.एस. भास्कर रेड्डी और केस से जुड़े दूसरे लोगों से संबंधित कई ठिकानों पर तलाशी भी ली थी.
CBI ने इस मामले में 2021 में पहली चार्जशीट दाखिल की थी. इसके बाद 2022 और 2023 में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल हुईं. अब ED की पूछताछ में अविनाश रेड्डी को बुलाए जाने से केस का वित्तीय पहलू फिर सामने आ गया है.