पीवी रमना कुमार, हैदराबाद
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू ने सूखाग्रस्त रयालसीमा की तस्वीर बदलने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब की नींव रख दी है. इस बड़े प्रोजेक्ट के जरिए रयालसीमा को दुनिया के नक्शे पर एक ग्लोबल फ्रूट बाउल के रूप में विकसित किया जाएगा. मुख्यमंत्री के साथ केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अन्नामैया जिले के मदनपल्ले में इस हब और इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर का शिलान्यास किया. इस खास कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री पवन कल्याण, मंत्री नारा लोकेश और रिलायंस इंडस्ट्रीज के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत अंबानी मौजूद रहे. मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि इस प्रोजेक्ट से पूरे इलाके की आर्थिक तकदीर पूरी तरह बदल जाएगी. यह पहल हॉर्टिकल्चर, सिंचाई, फूड प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स और एक्सपोर्ट को एक साथ जोड़कर किसानों की आमदनी को कई गुना बढ़ाने का काम करेगी.
1 लाख करोड़ के इस मेगा प्रोजेक्ट का खाका क्या है?
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने बताया कि यह प्रोजेक्ट एक इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम तैयार करेगा. इसमें बागवानी से लेकर मार्केटिंग और एक्सपोर्ट तक सभी चीजें शामिल होंगी. यह पहल रयालसीमा के 10 जिलों में लागू की जाएगी. इसके तहत 5,860 गांवों को 201 क्लस्टर्स में बांटा गया है.
सरकार इस पूरे मिशन में करीब 40,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी. इसके साथ ही करीब 60,000 करोड़ रुपये का प्राइवेट इन्वेस्टमेंट जुटाने की योजना बनाई गई है. इस कार्यक्रम का मुख्य मकसद 6 लाख एकड़ अतिरिक्त जमीन पर बागवानी की खेती का विस्तार करना है. बेहतर टेक्नोलॉजी, आधुनिक प्रोसेसिंग यूनिट्स और बड़े बाजारों तक सीधी पहुंच देकर किसानों की कमाई को सुरक्षित बनाया जाएगा.
सूखे रयालसीमा में किसान कैसे उगाएंगे सेब, कीवी और सोना?
जनसभा को संबोधित करते हुए चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि सिंचाई और बाजार का सपोर्ट मिलने पर इस इलाके में अपार संभावनाएं हैं. उन्होंने कहा, ‘हम रयालसीमा के विकास की दिशा बदलने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सहयोग से हम इस सूखे इलाके को ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब बना रहे हैं.’
नायडू ने आगे कहा, ‘रयालसीमा में ग्लोबल फ्रूट बाउल बनने की पूरी क्षमता मौजूद है. प्राइमरी सेक्टर के विकास में बागवानी की भूमिका बहुत अहम है. यहां के किसान सेब, स्ट्रॉबेरी, केले, एवोकैडो, कीवी और खजूर जैसी तमाम फसलें उगा सकते हैं. अगर सही सिंचाई मिल जाए तो रयालसीमा के लोग जमीन से सोना उगा देंगे. सही मार्केटिंग मिले तो वे भारी संपत्ति खड़ी कर सकते हैं.’
सीड टू शिपमेंट मॉडल से किसानों को कैसे मिलेगा फायदा?
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह पूरी परियोजना ‘सीड टू शिपमेंट’ मॉडल पर काम करेगी. इस मॉडल के तहत बीज बोने से लेकर विदेशी बाजारों में माल भेजने तक की पूरी चेन आपस में जुड़ी होगी. किसानों को सीधे प्रोसेसिंग यूनिट्स, कोल्ड स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट और एक्सपोर्ट मार्केट से लिंक किया जाएगा.
खेती में पानी की बचत और पैदावार बढ़ाने के लिए ड्रिप इरिगेशन को बढ़ावा दिया जाएगा. मौसम और जलवायु के खतरों से निपटने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित आधुनिक कृषि तकनीक का इस्तेमाल होगा. इससे न सिर्फ फसलों की पैदावार स्थिर रहेगी, बल्कि किसानों को उनकी उपज के सही दाम भी लगातार मिलते रहेंगे.
सिंचाई के लिए सरकार की 35 हजार करोड़ की क्या तैयारी है?
चंद्रबाबू नायडू ने रयालसीमा में पानी के संकट को दूर करने के लिए चल रहे प्रयासों का ब्योरा दिया. उन्होंने कहा कि एनटी रामा राव के दौर में शुरू की गई पुरानी सिंचाई योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है. इसमें हंद्री-नीवा और गालेरू-नगरी जैसी प्रमुख नहर परियोजनाएं शामिल हैं.
सरकार 35,000 करोड़ रुपये की लागत वाली 36 प्राथमिक सिंचाई परियोजनाओं को तीन साल के भीतर पूरा करेगी. मुख्यमंत्री ने नदियों को आपस में जोड़ने और बेसिन ट्रांसफर पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि दक्षिण के राज्यों के आपसी तालमेल से पानी के विवाद सुलझ सकते हैं. सरकार पोलावरम प्रोजेक्ट को पूरा करने और पीने व खेती के पानी की सप्लाई मजबूत करने के लिए पूरी ताकत लगा रही है.
अनंत अंबानी ने खुद को आंध्र का बेटा बताया
कार्यक्रम के मंच से रिलायंस इंडस्ट्रीज के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत अंबानी ने राज्य सरकार का आभार जताया. उन्होंने कहा, ‘मैं रिलायंस पर भरोसा जताने और इस ऐतिहासिक पहल का हिस्सा बनाने के लिए मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद करता हूं. हम इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर में आंध्र प्रदेश के साथ साझेदारी करके बहुत गर्व महसूस कर रहे हैं. हम इस संस्थान को अपना पूरा सहयोग देंगे.’
मदनपल्ले का इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर खेती को कैसे बदलेगा?
मदनपल्ले में प्रस्तावित इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर (आईएसए) की स्थापना रिलायंस के सहयोग से की जा रही है. यह संस्थान एडवांस्ड एग्रीकल्चर एजुकेशन, रिसर्च और आधुनिक तकनीक पर पूरी तरह केंद्रित रहेगा. इसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र के नए लीडर्स तैयार करना और डिजिटल तकनीकों को खेतों तक पहुंचाना है.
इस संस्थान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रेसिजन फार्मिंग, एग्री-बिजनेस और जलवायु अनुकूल खेती के तौर-तरीकों पर रिसर्च होगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि आईएसए रिसर्च और किसानों की जरूरतों के बीच एक मजबूत पुल बनेगा. नायडू ने जामनगर में अनंत अंबानी के वनतारा प्रोजेक्ट और तिरुमला के लिए दी गई इलेक्ट्रिक बसों का जिक्र करते हुए उनके पर्यावरण प्रेम की भी जमकर सराहना की.