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Success Business Story: आंध्र प्रदेश के रेलवे कोडूर के युवा उद्यमी अव्वारु हरिकृष्ण ने कचरा समझे जाने वाले नारियल के खोल से 100 से ज्यादा इको-फ्रेंडली उत्पाद बनाकर मिसाल पेश की है. उन्होंने किचन के बर्तन, फ्लावर पॉट, लैंप शेड और नक्काशीदार राखियां जैसे आकर्षक उत्पाद बनाए हैं. मेलों में शानदार सफलता के बाद उन्होंने एआई की मदद से इसे पूर्णकालिक व्यवसाय बनाया है. उनकी वर्कशॉप पूरी तरह सौर ऊर्जा पर चलती है, जो जीरो कार्बन उत्सर्जन के साथ समाज को प्लास्टिक का एक सुरक्षित और बेहतरीन विकल्प प्रदान कर रही है.
आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश के रेलवे कोडूर का एक युवा इन दिनों अपने अनोखे और पर्यावरण के अनुकूल स्टार्टअप को लेकर खूब सुर्खियां बटोर रहा है. अक्सर लोग नारियल का पानी पीने या उसकी गिरी निकालने के बाद सख्त कटोरी यानी खोल को कचरा समझकर फेंक देते हैं. लेकिन रेलवे कोडूर के रहने वाले युवा उद्यमी अव्वारु हरिकृष्ण ने इसी बेकार समझे जाने वाले कचरे को अपने व्यवसाय और आजीविका का मुख्य जरिया बना लिया है. हरिकृष्ण ने अपनी रचनात्मक सोच और कड़ी मेहनत के दम पर नारियल के खोल से घरेलू बर्तन, घर सजाने का सामान और त्योहारों से जुड़ी 100 से अधिक प्रकार की कलाकृतियां तैयार करके एक मिसाल कायम की है. आज उनका यह इको-फ्रेंडली व्यवसाय न केवल पर्यावरण को बचा रहा है, बल्कि कई लोगों को रोजगार भी दे रहा है.
युवा उद्यमी अव्वारु हरिकृष्ण बताते हैं कि उन्हें अपने कॉलेज के दिनों से ही कुछ नया और रचनात्मक करने की गहरी प्रेरणा मिली थी. वे लंबे समय से किसी ऐसे अनोखे विचार की तलाश में थे जो प्रकृति के भी अनुकूल हो. एक दिन जब वे अपने भाई के घर गए, तो उन्होंने वहां नारियल के कई खोल बेकार पड़े हुए देखे. इन बेकार पड़े खोलों को देखकर उनके मन में यह विचार आया कि क्या इनसे कुछ उपयोगी और सुंदर सामान बनाया जा सकता है. इसके बाद उन्होंने बिना समय बर्बाद किए नारियल के छिलकों और खोल पर छोटे-छोटे प्रयोग शुरू कर दिए. शुरुआत में उन्होंने इन्हें काटना, घिसना और धीरे-धीरे विभिन्न आकार देना शुरू किया. उनके इन्हीं शुरुआती छोटे प्रयोगों ने आज एक बड़े और सफल स्टार्टअप का रूप ले लिया है.
मेलों में मिली शानदार सफलता और एआई का उपयोग
जब हरिकृष्ण ने अपने पहले कुछ उत्पाद पूरी तरह से तैयार कर लिए, तो उन्होंने इन्हें लोगों के सामने पेश करने का फैसला किया. उन्होंने पहली बार तिरुपति, हैदराबाद, नेल्लोर और अराकू में आयोजित होने वाले ऑर्गेनिक मेले में अपना स्टॉल लगाया. इन मेलों में लोगों ने उनके प्राकृतिक उत्पादों को इतना ज्यादा पसंद किया कि उनका पूरा स्टॉक देखते ही देखते हाथों-हाथ बिक गया. इस शानदार और अप्रत्याशित सफलता ने उनका हौसला काफी बढ़ा दिया. इसके बाद उन्होंने व्यवसाय को बड़े पैमाने पर ले जाने की सोची. बाजार की मांग, नई डिजाइनिंग और भविष्य की संभावनाओं को गहराई से समझने के लिए उन्होंने आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद भी ली. आज वह इसे एक पूर्णकालिक और सफल व्यवसाय के रूप में स्थापित कर चुके हैं.
100 से अधिक पर्यावरण अनुकूल उत्पाद और सौर ऊर्जा
वर्तमान समय में हरिकृष्ण की वर्कशॉप में नारियल के सख्त खोल से 100 से ज्यादा अलग-अलग प्रकार के उत्पाद बनाए जा रहे हैं. इनमें मुख्य रूप से किचन के लिए कटोरे, चम्मच, चाय पीने के कप और मसाले रखने के डिब्बे शामिल हैं. इसके अलावा बच्चों के लिए सुरक्षित फीडिंग चम्मच, घर की सजावट के लिए फ्लावर पॉट, लैंप शेड और चाबी के छल्ले (की-रिंग) भी भारी मात्रा में बनाए जा रहे हैं. बाजारों में पारंपरिक कलाकृतियों वाली नक्काशीदार राखियों की भी काफी मांग है, जिसके चलते उन्हें 200 से 300 ऑर्डर थोक में मिल रहे हैं. इस पूरी पहल की सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल है. निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली मशीनों को चलाने के लिए मुख्य रूप से सौर ऊर्जा का उपयोग किया जाता है. उनका अंतिम लक्ष्य प्लास्टिक का सुरक्षित विकल्प पेश करने के साथ-साथ जीरो कार्बन उत्सर्जन के जरिए प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ना है.