पितृपक्ष में इन 5 में से लगाएं कोई एक भी पौधा, रोपना संभव नहीं तो करें दान
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Plantation During Shradh Paksha: पितृपक्ष के समापन में अब बस कुछ ही दिन बचे हैं, 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या है. अगर पितृ नाराज हों तो घर में कितनी भी मेहनत कर लो, काम पूरे नहीं होते, कोई ना कोई अड़चन बनी रहती है. वहीं अगर पितर प्रसन्न हों तो परिवार के सभी सदस्यों की तरक्की होती है और आपसी प्रेम भी बना रहता है. ऐसे में आप पितृपक्ष के समय कुछ पौधे लगा लें या फिर दान कर दें तो पितृ समेत कई दोषों से मुक्ति मिलती है. आइए जानते हैं पितृपक्ष के समय कौन से पौधे लगाने या दान करने चाहिए…
Plantation During Shradh Paksha: पितृपक्ष का समय चल रहा है और 10 अक्टूबर को यानी सर्वपितृ अमावस्या को इनका समापन होगा. हर साल जब पितृ पक्ष आते हैं तो लोग अपने पूर्वजों को याद करके उनका तर्पण, ब्राह्मण भोज, तर्पण पिंडदान आदि कार्य करते हैं. ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं और पितृ समेत कई दोष दूर होते हैं. धार्मिक मान्यताओं में पेड़-पौधों को प्रकृति और देवत्व से जोड़कर देखा गया है. यही वजह है कि पितृपक्ष के दौरान कुछ विशेष पौधे लगाना या उनका दान करना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि सर्वपितृ अमावस्या से पहले इन पौधों में से किसी एक को भी घर, मंदिर या उचित स्थान पर रोपने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. अगर पौधा लगाना संभव नहीं है तो उसका दान करने की भी परंपरा है. आइए जानते हैं सर्वपितृ अमावस्या से पहले कौन से पौधे घर पर लगाएं या फिर दान करें…
तुलसी का पौधा – हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे का विशेष महत्व है. ऐसे में पितृपक्ष के समय घर में तुलसी का पौधा लगाना और हर दिन सुबह शाम पूजा करने से देवी-देवताओं के साथ पितर भी काफी प्रसन्न होते हैं. श्राद्ध पक्ष में तुलसी के पत्ती डालकर तर्पण करने से पितरों को तृप्ति मिलती है और पितृदोष भी दूर होता है. अगर तुलसी का पौधा घर पर नहीं लगा सकते हैं तो पितरों के नाम का दान अवश्य करें.
पीपल का पेड़ – धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि पीपल में देवताओं और पितरों का निवास स्थान होता है. ऐसे में पितृ पक्ष के समय पीपल का पौधा लगाने और उसकी सेवा करने से पूर्वज जल्दी प्रसन्न होते हैं. पीपल का पौधा घर पर लगाने से पितृ दोष दूर होता है और उनकी कृपा से सभी अड़चनें भी दूर होती हैं. अगर घर में पीपल का पौधा नहीं लगा सकते तो कम से कम दान अवश्य करें.
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केले का पौधा – केले के पौधे को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का प्रिय माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष के समय केले का पौधा बहुत सौभाग्यशाली माना जाता है. ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार में अगर परेशानियां चल रही हैं तो वह भी दूर हो जाती हैं. अगर घर में केले का पौधा लगाना संभव नहीं है तो इस पवित्र पौधे के किसी मंदिर या अन्य व्यक्ति को पितरों के नाम पर दान अवश्य करें.
बरगद का पौधा – बरगद (वट वृक्ष) को दीर्घायु और मोक्ष प्रदान करने वाला वृक्ष माना गया है. पितृपक्ष के समय बरगद के पौधे को घर पर लगाने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बरगद के पेड़ में देवताओं के साथ पूर्वजों का भी वास होता है. इस पवित्र वृक्ष के नीचे जल अर्पित, दीप जलाने से अतृप्त पितरों को शांति और मुक्ति मिलती है. अगर घर में बरगद का पेड़ लगाना संभव नहीं है तो इसको सर्वपितृ अमावस्या से पहले दान अवश्य कर सकते हैं.
बेल का पेड़ – शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव के प्रिय बेल का पौधा पितृपक्ष में घर पर लगाने से अतृप्त आत्माओं को शांति मिलती है और पितृ दोष का निवारण होता है. धार्मिक मान्यताओं में बताया गया है कि अमावस्या के दिन बेल पत्र और गंगाजल शिवजी पर अर्पण करने से सभी पितरों को मुक्ति मिलेगी और पितरों के डरावने सपने नहीं आएंगे. अगर घर पर यह वृक्ष लगाना संभव नहीं है तो अमावस्या के दिन या उससे पहले कभी भी बेल का पेड़ पितरों के नाम का दान अवश्य करें.