Nainital: ‘शहर में हैं, फिर भी शहर के नहीं’… सड़क को तरस रहे कृष्णापुर के लोग, बोले- अब सिर्फ आश्वासन नहीं काम चाहिए

Nainital: ‘शहर में हैं, फिर भी शहर के नहीं’… सड़क को तरस रहे कृष्णापुर के लोग, बोले- अब सिर्फ आश्वासन नहीं काम चाहिए


नैनीताल: जिला मुख्यालय का हिस्सा होने के बावजूद सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित नैनीताल के कृष्णापुर क्षेत्र के लोगों का गुस्सा अब सड़क पर उतर आया है. आपदा प्रभावित तल्लीताल के कृष्णापुर वार्ड में क्षतिग्रस्त सड़क के निर्माण की मांग को लेकर क्षेत्रवासियों ने तल्लीताल गांधी चौक पर धरना शुरू कर दिया. लोगों ने प्रशासन से जल्द सड़क निर्माण की मांग की है. साथ ही चेतावनी दी है कि यदि 2027 के चुनाव से पहले सड़क नहीं बनी तो क्षेत्रवासी चुनाव बहिष्कार करेंगे.

क्षेत्रवासियों का कहना है कि कृष्णापुर को नैनीताल शहर से जोड़ने वाला मार्ग लंबे समय से क्षतिग्रस्त है. हालात यह हैं कि इलाके में दोपहिया वाहन तक पहुंचाना मुश्किल है. बीमार, बुजुर्ग, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मुख्य सड़क तक पहुंचाने में लोगों को काफी परेशानी होती है. कई बार मरीजों को स्ट्रेचर की सुविधा नहीं मिलने पर चादर या अन्य साधनों से पैदल ले जाना पड़ता है.

‘शहर में हैं, फिर भी शहर के नहीं’

कृष्णापुर के सभासद सुरेंद्र कुमार ने कहा कि क्षेत्रवासी कई वर्षों से सड़क की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन ही मिला. उन्होंने कहा कि नैनीताल शहर में होने के बावजूद कृष्णापुर के लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं. क्षतिग्रस्त रास्ते के कारण स्थानीय लोगों को रोजाना आवाजाही में परेशानी उठानी पड़ रही है. सुरेंद्र कुमार ने कहा कि क्षेत्र में एक व्यक्ति की हृदयघात से मौत भी हो चुकी है. उनके मुताबिक, यदि सड़क की सुविधा होती तो मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकता था. उन्होंने कहा कि बलियानाला क्षेत्र में करोड़ों रुपये का काम चल रहा है, ऐसे में कृष्णापुर तक छोटी गाड़ियों के पहुंचने लायक रास्ता भी नहीं बन पाना क्षेत्रवासियों के लिए चिंता का विषय है.

2022 में मिला था सड़क का आश्वासन

कृष्णापुर निवासी दीपेश भट्ट ने बताया कि 2022 के चुनाव के दौरान क्षेत्रवासियों को आश्वासन दिया गया था कि बलियानाला परियोजना के बाद सड़क निर्माण कराया जाएगा. उनका कहना है कि बलियानाला का काम अब लगभग पूरा होने की स्थिति में है, लेकिन कृष्णापुर के लोगों को अभी तक सड़क नहीं मिल सकी है, दीपेश के अनुसार, प्रशासन की ओर से भू-वैज्ञानिक अनुमति का हवाला दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही जाती है, लेकिन कृष्णापुर के लोगों को अभी भी इन सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.

5 किलोमीटर पैदल सफर, 200 सीढ़ियों की चुनौती

कृष्णापुर के पूर्व सभासद कैलाश रौतेला ने बताया कि पहले क्षेत्र को जोड़ने वाला मार्ग मौजूद था, लेकिन बलियानाला क्षेत्र में आई आपदा के कारण वह क्षतिग्रस्त हो गया. उन्होंने कहा कि करीब 3,000 से अधिक आबादी वाले क्षेत्र में आज हालात ऐसे हैं कि लोग कई किलोमीटर का सफर पैदल तय कर नैनीताल पहुंचते हैं. उन्होंने बताया कि मोटर मार्ग नहीं होने के कारण बीमार और बुजुर्गों को अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बन गया है. नैनीताल का बीडी पांडे जिला अस्पताल कुछ ही दूरी पर होने के बावजूद सड़क सुविधा के अभाव में कई बार मरीजों को हल्द्वानी ले जाना पड़ता है.

बच्चों की पढ़ाई पर भी असर

स्थानीय महिला लक्ष्मी पपोला ने कहा कि सड़क नहीं होने का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है. बच्चों को स्कूल जाने के लिए कठिन रास्तों से गुजरना पड़ता है. उन्होंने बताया कि लोगों को मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए करीब 200 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. लक्ष्मी ने कहा कि चुनाव के दौरान नेता क्षेत्र में आते हैं और सड़क समेत कई सुविधाएं देने के वादे करते हैं, लेकिन चुनाव के बाद स्थिति जस की तस बनी रहती है. उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के बीमार होने पर उसे अस्पताल तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है.

‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ का ऐलान

धरने पर बैठे क्षेत्रवासियों ने साफ कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा. उनका कहना है कि यदि आगामी चुनाव से पहले कृष्णापुर को सड़क से नहीं जोड़ा गया तो वे ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ के नारे के साथ 2027 के चुनाव का बहिष्कार करेंगे. क्षेत्रवासियों ने सड़क के साथ शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को भी प्राथमिकता देने की मांग की है.



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