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Indian Economy : भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर दूसरी तिमाही में भी तेज गति से बढ़ने वाली है. वित्त मंत्रालय ने हाल में जारी अपनी समीक्षा रिपोर्ट में कहा है कि जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत की विकास दर 7.3 फीसदी रहने की संभावना है, जो जून तिमाही में 7.8 फीसदी थी. इससे पता चलता है कि भारत आगे भी दुनिया की सबसे तेज बढ़ने वाली इकनॉमी बना रहेगा.
वित्त मंत्रालय ने सितंबर तिमाही के ग्रोथ रेट का अनुमान जारी किया है.
नई दिल्ली. भारत की तेज विकास दर को देखकर जलने वाले विरोधियों के सीने में एक बार फिर आग लगने वाली है. सरकार ने आर्थिक समीक्षा के बाद कहा है कि जुलाई-सितंबर की दूसरी तिमाही में विकास दर 7.3 फीसदी रहने का अनुमान है. वैसे तो यह जून के 7.8 फीसदी के आंकड़े से थोड़ी कम है, लेकिन अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नजरिये से देखा जाए तो यह आंकड़ा काफी बड़ा दिख रहा है. इन आंकड़ों से एक बार फिर पता चलता है कि भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है.
वित्त मंत्रालय ने अपनी समीक्षा रिपोर्ट में बताया कि चालू वित्तवर्ष की दूसरी तिमाही में देश की विकास दर 7.3 फीसदी रहने का अनुमान है. हालांकि, यह जून तिमाही में दर्ज 7.8 फीसदी वृद्धि दर से कम होगी. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल माहौल में बढ़ती अनिश्चितता के बावजूद वित्तवर्ष 2026-27 की शुरुआत मजबूत आधार पर हुई. पश्चिम एशिया संघर्ष ने ऊर्जा बाजार और व्यापार मार्ग को प्रभावित किया है, जिससे दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं के सामने चुनौतियां बढ़ी हैं. भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर पहली तिमाही में 7.8 फीसदी रही थी, जो मौजूदा श्रृंखला में पहली तिमाही की सबसे अधिक वृद्धि दर है.
दूसरी तिमाही में भी तेज ग्रोथ
वित्त मंत्रालय ने बताया कि इस साल की शुरुआत में आर्थिक समीक्षा में पेश किए गए हमारे तात्कालिक अनुमान के अनुसार, वित्तवर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.3 फीसदी रहने की संभावना है. जून तिमाही की ग्रोथ रेट 2026-27 की दूसरी तिमाही में भी जारी रही. हालांकि, इसकी रफ्तार कुछ धीमी हुई है. ई-वे बिल जारी होने और विनिर्माण क्षेत्र के पीएमआई में वृद्धि की गति धीमी हुई, जबकि अगस्त में नई मांग और रोजगार में मजबूती से सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में सुधार हुआ है.
बिजली और ईंधन की खपत भी बढ़ी
रिपोर्ट में कहा गया है कि दूसरी तिमाही के दौरान बिजली और ईंधन की खपत में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है और बैंक लोन में वृद्धि भी मजबूत बनी हुई है. पूंजीगत और बुनियादी ढांचा क्षेत्र के सामान के उत्पादन से निवेश गतिविधियों में मजबूती जारी रहने के संकेत मिलते हैं. ग्रामीण और शहरी दोनों बाजारों में वाहन बिक्री की गति अच्छी रही है, जो खपत के व्यापक आधार को दर्शाती है. इसके अलावा निर्यात आंकड़ा, जीएसटी संग्रह समेत उच्च आवृत्ति वाले ज्यादातर संकेतकों से दूसरी तिमाही की शुरुआत में आर्थिक गतिविधियों के जारी रहने का संकेत मिलता है.
ग्लोबल एजेंसियों ने भी बढ़ाई साख
रिपोर्ट में बताया गया है कि हाल में भारत की साख में सुधार भी अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद को बताता है. जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने सितंबर, 2026 में भारत की रेटिंग को ‘बीबीबी प्लस’ से बढ़ाकर ‘ए माइनस’ कर दिया. रिपोर्ट में कहा गया कि मानसून की स्थिति पहले के अनुमान से बेहतर रही है. कई फसलों की खरीफ बुवाई पिछले साल के स्तर के करीब रही. इससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग की संभावनाओं को समर्थन मिलता है. हालांकि, रबी फसल की संभावनाओं पर नजर रखने की जरूरत होगी.