farming tips | agriculture tips | crop care tips | बेमौसम बारिश ने आपकी फसल भी कर दी है बर्बाद? ये 4 फसलें नुकसान की कर देंगी भरपाई

farming tips | agriculture tips | crop care tips | बेमौसम बारिश ने आपकी फसल भी कर दी है बर्बाद? ये 4 फसलें नुकसान की कर देंगी भरपाई


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बेमौसम बारिश ने आपकी फसल कर दी है बर्बाद? ये 4 फसलें नुकसान की कर देंगी भरपाई

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Shahjahanpur News: UP के कई जिलों में हुी भारी बारिश से धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है. लेकिन किसान अब धान की कटाई कर रबी फसलों से इस घाटे की भरपाई कर सकते हैं. खेत की नमी का फायदा उठाकर कुछ फसलें किसानों का मुनाफा बढ़ाकर उन्हें संकट से बाहर निकाल सकती हैं. आइए उन्हीं फसलों के बारे में विस्तार से जानते हैं.

शाहजहांपुर: हाल ही में हुई बेमौसम भारी बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है. खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल गिरकर बर्बाद हो गई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है. हालांकि इस प्राकृतिक आपदा के बीच उम्मीद की एक किरण अभी बाकी है. किसान धान की अगेती कटाई कर खेत में बची नमी का सही उपयोग कर सकते हैं. रबी सीजन की सही फसलों की बुवाई करके न केवल बारिश से हुए नुकसान की भरपाई संभव है, बल्कि आने वाले दिनों में बेहतर पैदावार हासिल कर अपनी कमाई को भी वापस ट्रैक पर लाया जा सकता है.

प्रगतिशील युवा किसान रनजोद सिंह ने बताया कि बेमौसम बारिश से घबराने की बजाय किसानों को तुरंत खेत प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए. धान की कटाई के बाद खेत में मौजूद पर्याप्त नमी का फायदा उठाकर कम लागत वाली फसलें लगानी चाहिए. अगर किसान समय रहते सरसों, आलू या मटर की बुवाई कर लेते हैं तो वे अपनी लागत वसूल कर सकते हैं. दलहनी फसलें लगाने से मिट्टी की खोई हुई उर्वरता भी वापस लौट आती है. सही समय पर ली गई सही फसल का फैसला ही किसानों को इस आर्थिक संकट से बाहर निकालने में सबसे मददगार साबित होगा.

सरसों और आलू की खेती बेहतरीन विकल्प
धान की फसल में हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरसों और आलू की खेती एक बेहतरीन विकल्प है. यह फसलें बहुत कम समय में तैयार हो जाती हैं और इनमें लागत भी काफी कम आती है. बाजार में अगेती सब्जियों और सरसों की मांग हमेशा बनी रहती है, जिससे किसानों को शुरुआती दौर में ही बहुत अच्छे दाम मिल जाते हैं. कम समय में मिलने वाला यह मुनाफा बारिश से हुए घाटे को काफी हद तक कम कर देता है.

धान कटने के बाद खेत में बची हुई नमी का सही समय पर इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है. बारिश के कारण जमीन में पहले से पानी मौजूद है, जिससे अलग से सिंचाई का खर्च बच जाता है. इस नमी में चने की बुवाई करने से पौधे तेजी से अंकुरित होते हैं. सही समय पर की गई यह बुवाई फसल को मजबूत बनाती है और आगे चलकर बंपर पैदावार देती है जिससे किसानों की आमदनी में सुधार होता है.

दलहनी फसलें लगाना फायदेमंद
बारिश की वजह से मिट्टी के पोषक तत्व बह जाते हैं, ऐसे में चना, मटर और मसूर जैसी दलहनी फसलें लगाना बहुत फायदेमंद रहता है. दलहनी फसलों की जड़ें हवा से नाइट्रोजन सोखकर जमीन को दोबारा उपजाऊ बनाने का काम करती हैं. इससे अगली फसलों के लिए महंगे रासायनिक खाद खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती है. खाद का खर्च घटने से किसानों की खेती की लागत अपने आप कम हो जाती है और उनका मुनाफा बढ़ जाता है.

अगली फसल की योजना बनाना समझदारी
प्राकृतिक आपदा से उबरने के लिए किसानों को सही रणनीति और समय प्रबंधन पर खास ध्यान देना होगा. नुकसान का रोना रोने के बजाय तुरंत अगली फसल की योजना बनाना ही समझदारी है. रबी सीजन की शुरुआत में की गई सही बुवाई फसलों को कीटों और बीमारियों से भी बचाती है. अगर किसान कृषि वैज्ञानिकों की सलाह मानकर उन्नत किस्म के बीजों का इस्तेमाल करेंगे तो वे निश्चित रूप से अपनी आय और पैदावार दोनों में शानदार बढ़ोतरी कर पाएंगे.



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