चंदौली: मुगलसराय के गल्ला मंडी में इन दिनों एक ऐसे युवा कारोबारी की चर्चा है, जिसने MBA करने के बाद अच्छी नौकरी की, करीब डेढ़ साल फाइनेंस सेक्टर में काम किया और फिर नौकरी छोड़कर गुड़ का कारोबार शुरू कर दिया. राम जी गुड़ वाले के नाम से कारोबार कर रहे आशीष यादव ने कहा कि वह ऐसा बिजनेस करना चाहते थे, जिसमें लोगों को शुद्ध और बेहतर उत्पाद उपलब्ध कराया जा सके. उन्होंने अयोध्या और लखीमपुर खीरी जिले से सीधे गुड़ मंगाकर अपना कारोबार शुरू किया.
MBA के बाद क्यों चुना गुड़ का कारोबार?
आशीष यादव ने लोकल18 से बातचीत में बताया कि उन्होंने हाल ही में MBA किया है, जिसमें फाइनेंस और मार्केटिंग की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने करीब डेढ़ साल तक फाइनेंस सेक्टर में नौकरी भी की. हालांकि, मन में शुरू से ही अपना कारोबार करने की इच्छा थी. नौकरी के दौरान उन्हें लगा कि आखिर कब तक नौकरी करेंगे, क्यों न अपना कोई काम शुरू किया जाए. इसके बाद उन्होंने कई बिजनेस आइडिया पर विचार किया और गुड़ को अपने कारोबार के लिए चुना. आशीष ने बताया कि गुड़ ऐसा उत्पाद है, जिसकी मांग हमेशा रहती है और इसे सीधे उत्पादन स्थल से खरीदकर ग्राहकों तक पहुंचाया जा सकता है.
अयोध्या से शुरू हुई कारोबार की कहानी
आशीष ने बताया कि उन्होंने गुड़ के कारोबार को समझने के लिए अयोध्या और लखीमपुर खीरी जिले का दौरा किया. अयोध्या में उनके एक परिचित का कोल्हू है, जहां उनके सामने गुड़ तैयार होता है. इसी वजह से उन्होंने वहीं से गुड़ मंगाकर मुगलसराय में बेचना शुरू किया. उन्होंने कहा कि सीधे कोल्हू से गुड़ लेने की वजह से उन्हें उत्पाद की गुणवत्ता और बनाने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी रहती है.
50 से 90 रुपये किलो तक की कई वैरायटी
आशीष के यहां अलग-अलग तरह का गुड़ उपलब्ध है. उन्होंने बताया कि साधारण गुड़ करीब 50 रुपये किलो से शुरू होता है. इसके अलावा चॉकलेटी गुड़ करीब 90 रुपये किलो तक मिलता है. नरम गुड़ भी ग्राहकों की पसंद में शामिल है, जिसे आसानी से तोड़ा जा सकता है. इसके अलावा तिल और मूंगफली से तैयार गुड़ भी उपलब्ध है. इसमें गुड़ के साथ तिल और मूंगफली मिलाई जाती है, जिससे इसका स्वाद अलग हो जाता है. कारोबारी के मुताबिक बुजुर्ग ग्राहकों के लिए नरम गुड़ काफी पसंद किया जाता है, क्योंकि इसे काटने में ज्यादा परेशानी नहीं होती.
गुड़ में कचरा क्यों दिखता है?
गुड़ खरीदने वाले ग्राहकों का एक आम सवाल यह रहता है कि गुड़ में कभी-कभी छोटे-छोटे कण या गंदगी क्यों दिखाई देती है. इस पर आशीष ने बताया कि पारंपरिक तरीके से गुड़ खुले स्थान पर तैयार किया जाता है. भट्ठी और आसपास के वातावरण की वजह से कभी-कभी छोटे कण गुड़ में चले जाते हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि गुड़ में असामान्य रूप से ज्यादा कण या कोई अन्य पदार्थ दिखाई दे, तो उसके कारण अलग हो सकते हैं. इसलिए ग्राहकों को गुड़ खरीदते समय उसकी बनावट, रंग, गंध और स्रोत पर भी ध्यान देना चाहिए.
आशीष के यहां गन्ने से तैयार सिरका भी उपलब्ध है. उन्होंने बताया कि इसे लंबे समय तक फर्मेंटेशन के बाद तैयार किया जाता है. उन्होंने दावा किया कि वे करीब एक साल पुराना गन्ने का सिरका ग्राहकों को उपलब्ध कराते हैं. हालांकि, किसी खाद्य पदार्थ के स्वास्थ्य लाभ या पाचन संबंधी प्रभावों के बारे में डॉक्टर या खाद्य विशेषज्ञ की सलाह को प्राथमिकता देना उचित है.
चीनी से गुड़ की ओर बढ़ेगा रुझान?
आशीष ने बताया कि स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ने के साथ आने वाले समय में लोग चीनी के विकल्प के तौर पर गुड़ को अधिक इस्तेमाल कर सकते हैं. इसी उम्मीद के साथ उन्होंने MBA की नौकरी छोड़कर गुड़ के कारोबार को चुना है. अब मुगलसराय की गल्ला मंडी में उनका कारोबार अलग-अलग स्वाद और बनावट वाले देसी गुड़ की वजह से ग्राहकों का ध्यान खींच रहा है.
वहीं, आशीष यादव ने बताया कि बिजनेस शुरू करने में लगभग ₹3 लाख का निवेश लगा. वर्तमान में मासिक टर्नओवर करीब ₹2.5 लाख है और लगभग 8% का मुनाफा होता है. व्यवसाय से अप्रत्यक्ष रूप से 4 लोग जुड़े हुए हैं. सप्लाई चेन की बात करें, तो उत्पादों की सप्लाई मुख्य रूप से होलसेलर और रिटेलर, दोनों को की जाती है.