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Lemongrass Chai Recipe: शहरों में मिलने वाली चाय से अलग, सरगुजा के एक गांव में 55 वर्षीय बुजुर्ग रामअवतार यादव लेमनग्रास से खास देसी चाय बना रहे हैं. यह चाय मिट्टी के चूल्हे पर बनती है और इसे स्वाद, सुकून और सेहत का अनोखा संगम बताया जा रहा है. इसमें दूध का उपयोग नहीं होता, बल्कि यह लाल चाय के रूप में तैयार की जाती है.
रामअवतार यादव के अनुसार, इस चाय को बनाने के लिए सबसे पहले ताजी लेमनग्रास की पत्तियां लाई जाती हैं. जरूरत के हिसाब से पानी लेकर, लेमनग्रास को हाथ से हल्का रगड़कर पानी में डाला जाता है.
इसे लगभग 10 मिनट तक अच्छी तरह उबाला जाता है. स्वाद के लिए इसमें थोड़ी चायपत्ती और अदरक भी डाली जा सकती है. रामअवतार यादव का कहना है कि अदरक न होने पर भी लेमनग्रास की अपनी खुशबू और स्वाद चाय को खास बनाता है.
रामअवतार यादव बताते हैं कि लकड़ी वाले चूल्हे पर बनी लेमनग्रास चाय का स्वाद गैस पर बनी चाय से अलग होता है. उनके मुताबिक, चूल्हे की आंच पर बनी इस चाय में एक अलग ही देसीपन और खुशबू आती है.
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रामअवतार यादव ने बताया कि उन्होंने यह तरीका किसी किताब या आधुनिक माध्यम से नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों से सीखा है. पहले घर के बड़े-बुजुर्ग इसी तरह की चाय बनाकर पीते थे और परिवार के अन्य सदस्यों को भी पिलाते थे. यह पारंपरिक तरीका पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ता रहा है.
रामअवतार यादव इस चाय को दूध वाली चाय से अलग बताते हैं. इसमें दूध का इस्तेमाल नहीं किया जाता और इसे साधारण लाल चाय की तरह तैयार किया जाता है. उनका मानना है कि यह चाय हल्की और खुशबूदार होती है.