बिहार में बनेंगे 3.88 लाख करोड़ के हाईवे-एक्सप्रेसवे, नितिन गडकरी ने रखा 5 लाख करोड़ के काम का लक्ष्य

बिहार में बनेंगे 3.88 लाख करोड़ के हाईवे-एक्सप्रेसवे, नितिन गडकरी ने रखा 5 लाख करोड़ के काम का लक्ष्य


पटना: बिहार में सड़क और हाईवे नेटवर्क के विस्तार को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ी परियोजनाओं का ब्यौरा दिया है. उन्होंने कहा कि बिहार में हाईवे निर्माण के क्षेत्र में ₹3.88 लाख करोड़ के काम किए जाने हैं और मौजूदा कार्यकाल के अंत तक करीब ₹5 लाख करोड़ के काम पूरे करने का लक्ष्य है. पटना में आयोजित ‘राइजिंग बिहार इन्वेस्टर समिट 2026’ में गडकरी ने बताया कि करीब ₹33,000 करोड़ की लागत से 2,910 किलोमीटर की परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं. वहीं ₹65,100 करोड़ की लागत से 1,878 किलोमीटर के काम चल रहा है. करीब ₹3.25 लाख करोड़ की आगामी परियोजनाएं प्रस्तावित हैं.

10 साल में बढ़ी राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई
गडकरी के मुताबिक 2014 में बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई करीब 4,615 किलोमीटर थी, जो अब बढ़कर लगभग 6,500 किलोमीटर हो गई है. अब इसमें 72 हजार करोड़ रुपये का गोरखपुर-सिलीगुड़ी हाई स्पीड कॉरिडोर भी अहम परियोजना बताया जा रहा है. करीब ₹72,000 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना में लगभग ₹52,000 करोड़ का निवेश बिहार में होने की बात कही गई है. 526 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर में करीब 410 किलोमीटर हिस्सा बिहार में होगा. ग्रीनफील्ड एलाइनमेंट को मंजूरी मिल चुकी है और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के लिए अधिसूचना जारी की जा चुकी है. पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के प्रस्ताव को कैबिनेट मंजूरी के लिए भेजे जाने की जानकारी दी गई.

रक्सौल-हल्दिया कॉरिडोर से बिहार को मिलेगा कनेक्शन
करीब 550 किलोमीटर लंबे रक्सौल-हल्दिया ग्रीनफील्ड कॉरिडोर की अनुमानित लागत ₹45,200 करोड़ है. इसमें बिहार में करीब 400 किलोमीटर हिस्सा और लगभग ₹26,000 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है. डीपीआर दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया है. परियोजना से रक्सौल से हल्दिया की यात्रा का समय करीब 20 घंटे से घटकर 8 घंटे होने की संभावना है.

वाराणसी-रांची-कोलकाता कॉरिडोर भी अहम
करीब 600 किलोमीटर लंबे वाराणसी-रांची-कोलकाता कॉरिडोर की लागत लगभग ₹32,000 करोड़ है और करीब 35 फीसदी काम पूरा हो चुका है. इसके पूरा होने पर वाराणसी से कोलकाता का यात्रा समय 18 घंटे से घटकर करीब 5 घंटे होने की संभावना है.

पटना रिंग रोड पर ₹10,200 करोड़ खर्च होंगे
पटना रिंग रोड परियोजना करीब 162 किलोमीटर लंबी होगी और इसकी अनुमानित लागत ₹10,200 करोड़ है. इसका उद्देश्य पटना में ट्रैफिक दबाव कम करने के साथ आसपास के इलाकों की कनेक्टिविटी बेहतर करना है. परियोजना के जरिए दरभंगा एयरपोर्ट को भी बेहतर कनेक्टिविटी देने की योजना है.

राम-जानकी मार्ग और बुद्ध सर्किट पर भी जोर
करीब 440 किलोमीटर लंबे राम-जानकी मार्ग की लागत ₹5,440 करोड़ है और इसका करीब 27 फीसदी काम पूरा हो गया है. इसे नवंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है. भगवान गौतम बुद्ध से जुड़े कॉरिडोर के तहत करीब ₹22,000 करोड़ की परियोजनाओं पर काम चल रहा है और लगभग 90 फीसदी काम पूरा होने की जानकारी दी गई.

इसके अलावा बक्सर-भागलपुर हाई स्पीड कॉरिडोर करीब 218 किलोमीटर लंबा होगा, जिसकी लागत लगभग ₹10,000 करोड़ है. अनीसाबाद-दिदारगंज, पटना परियोजना करीब 13.4 किलोमीटर लंबी होगी और इसकी अनुमानित लागत ₹8,500 करोड़ है. इसका प्रस्ताव भी कैबिनेट को भेजे जाने की जानकारी दी गई है.

गडकरी ने कहा कि हाईवे, एक्सप्रेसवे और ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का यह नेटवर्क बिहार को देश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों से बेहतर तरीके से जोड़ेगा. इससे लॉजिस्टिक्स लागत और यात्रा समय कम होने के साथ निवेश, औद्योगिक गतिविधियों, व्यापार और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.



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