‘बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता है’, बेगूसराय में महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर और क्या बोले लोग, Video

‘बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता है’, बेगूसराय में महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर और क्या बोले लोग, Video


बेगूसरायः आज 1 अक्टूबर के साथ ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जयंती माह की शुरुआत हो चुकी है. आज लोकल 18 पर चर्चा करते हैं उस सवाल का जो आप आमतौर पर किसी न किसी से जरूर पूछते होंगे. जैसा कि आप जानते हैं महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा और ईमानदारी का संदेश दिया था. लेकिन आज के दौर में लोग इन सिद्धांतों को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में कितना अपनाते हैं? इसी को जानने के लिए लोकल 18 ने समाज के अलग-अलग वर्गों के लोगों से बातचीत की. इस दौरान झूठ बोलने, रिश्वत देने, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने, सोशल मीडिया पर गाली-गलौज और भारतीय सामान के इस्तेमाल से जुड़े सवाल पूछे गए. लोगों ने इन सवालों पर खुलकर अपनी राय रखी.

रिश्वत के बिना काम नहीं होता
शिक्षामित्र शंभू शरण सिंह से पूछा गया कि क्या वह अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में झूठ बोलते हैं? उन्होंने बताया कि वह झूठ नहीं बोलते हैं. उनसे अगला सवाल पूछा गया कि क्या कभी अपना काम कराने के लिए रिश्वत दी है? इस पर उन्होंने कहा कि 100 प्रतिशत रिश्वत देना पड़ता है, बिना दिए कोई काम ही नहीं होता है.

विदेशी सामान पर क्या बोले शिक्षक?
उच्च विद्यालय के शिक्षक संजय सिंह से पूछा गया कि क्या वह सोशल मीडिया पर गाली-गलौज करते हैं? उन्होंने कहा कि हमलोग तो नहीं किए हैं, लेकिन सुनने को देखने को मिलता है. इनसे अगला सवाल पूछा गया कि विदेशी सामान या भारतीय सामान में क्या पसंद करते हैं और क्यों? इस पर उन्होंने कहा कि भारतीय सामान में गुणवत्ता हीन मानते हैं, इसलिए विदेशी सामान की गुणवत्ता और रेट भी ठीक रहती है. इसलिए लाचार होकर विदेशी सामान लेते हैं. लेकिन चाइनीज सामान का विरोध भी करते हैं.

भ्रष्टाचार देखकर आवाज उठाते हैं या चुप रहते हैं?
सामाजिक कार्यकर्ता मुकेश कुमार सिन्हा से पूछा गया कि भ्रष्टाचार सामने देखने पर आवाज उठाते हैं या चुप रहते हैं? उन्होंने कहा कि कोशिश करते हैं कि आवाज उठाएं, लेकिन स्थानीय और असामाजिक तत्वों से डर लगता है.उनसे यह भी पूछा गया कि क्या निजी जिंदगी में अहिंसा के सिद्धांत का पालन करते हैं? उन्होंने बताया कि बहुत ही कोशिश करते हैं कि उनके सिद्धांतों का पालन करें. सार्वजनिक जगहों पर सफाई का ध्यान रखने के सवाल पर उन्होंने कहा कि विशेष ध्यान रखते हैं. इनके घरों के सामने SH 55 पर अक्सर सफाई दिखाई भी देती है.

गांधी की कौन-सी सीख अपनाते हैं?
दवा कारोबारी राकेश कुमार सिन्हा से पूछा गया कि गांधी की कौन-सी एक सीख को वह अपनी जिंदगी में वास्तव में अपनाते हैं? इस पर उन्होंने कहा, ‘बुरा मत सुनो, बुरा मत देखो, बुरा मत कहो.’ उन्होंने बताया कि इस दौरान सामाजिक बुराइयों का भी सामना करना पड़ता है. कहीं-कहीं समाज के हित को देखते हुए बुरा भी बोलना पड़ता है.

‘हां भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता हूं’
बेगूसराय में यूट्यूबर पत्रकार दिवाकर सिंह से पूछा गया कि भ्रष्टाचार सामने देखने पर आवाज उठाते हैं या चुप रहते हैं? उन्होंने कहा कि वह भ्रष्टाचार देखते हैं तो आवाज उठाते हैं. छात्र जीवन से ही महात्मा गांधी के कदमों पर चलने के लिए प्रयासरत हैं.उनसे पूछा गया कि क्या हिंसक प्रदर्शन को सही मानते हैं? इस पर उन्होंने कहा कि कोशिश करते हैं महात्मा गांधी के विचारों का पूरा पालन करने की.

झूठ और रिश्वत पर क्या बोले लोग?
सिंह जी नाम के एक किसान से पूछा गया कि क्या वह रोजमर्रा की जिंदगी में झूठ बोलते हैं? उन्होंने हां में जवाब दिया और कहा कि अपने फायदे के लिए झूठ बोलते हैं. उनसे यह भी पूछा गया कि क्या उन्होंने किसी काम के लिए रिश्वत दी है? इस सवाल पर उन्होंने हां में जवाब दिया.गृहिणी सीता देवी से पूछा गया कि क्या वह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को जानती हैं? उन्होंने कहा कि हां, जानती हैं. वह कहते थे कि झूठ नहीं बोलना चाहिए, इसलिए हम झूठ नहीं बोलते.उनसे पूछा गया कि क्या सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए रिश्वत देना पड़ता है? इस पर उन्होंने नहीं में जवाब दिया.

नफरत भरे मैसेज और सफाई पर भी पूछे सवाल
लोगों से यह भी पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी बिना जांचे-परखे कोई नफरत भरा मैसेज या फॉरवर्ड शेयर किया है? इस सवाल पर अधिकार लोगों ने मना कर दिया.वहीं, सार्वजनिक जगहों पर सफाई का ध्यान रखने के सवाल पर कुछ लोगों ने हां में जवाब दिया.

लोकल 18 ने इस बातचीत के जरिए समाज के अलग-अलग वर्गों के लोगों की राय जानी. लोगों के जवाबों में गांधीजी के सत्य, अहिंसा और ईमानदारी के सिद्धांतों को लेकर अलग-अलग विचार सामने आए.



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