पूरी दुनिया के हीरो बने पायलट ‘स्मित’ के नाम का अर्थ क्या है? खून से लथपथ आसमान में मौत से लड़े और बचा ली 179 जिंदगियां!

पूरी दुनिया के हीरो बने पायलट ‘स्मित’ के नाम का अर्थ क्या है? खून से लथपथ आसमान में मौत से लड़े और बचा ली 179 जिंदगियां!


Meaning of Smit: वे आसमान में 30 हजार फुट की ऊंचाई पर फ्लाईदुबई फ्लाइट उड़ा रहे थे. उनके हाथ में 179 लोगों की जिंदगी थी. इसी बीच ओमान के को-पायलट ने पास में ही रखी कुल्हाड़ी से उनपर ताबड़तोड़ हमला कर दिया. अब वे खून से लथपथ हो गए. झटके में कंट्रोल पैनल से हाथ छिटक गया जिसकी वजह से नियंत्रण खोने लगा. विमान तेजी से 17 हजार फीट नीचे जा गिरा. विमान में बैठे यात्री अपने अंतिम पल को याद करने लगे. लेकिन इस मुश्किल वक्त में जाबांज भारतीय कैप्टन स्मित ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने अपनी प्रतिभा और जबर्दस्त सूझबूझ से विमान को संतुलित किया और सफतलापूर्वक अरब में विमान की इमरजेंसी लैंडिंग कराई. वे खून से लथपथ थे लेकिन उनके चेहरे पर इतने लोगों की जान बचाने का संतोष था और वे सहज भाव से मुस्कुरा रहे थे. वास्तव में स्मित ने अपने नाम के अर्थ का सच्चे अर्थों में साकार किया. आज वे देश ही नहीं पूरी दुनिया के हीरो बन गए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित दुनिया के कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने उन्हें रियल हीरो बताया है. अब आइए स्मित के नाम का अर्थ जानते हैं.

स्मित शब्द का अर्थ

अगर भारतीय संस्कृत व्याकरण और वैदिक साहित्य को देखें तो स्मित शब्द का अर्थ बहुत खूबसूरत है. संस्कृत व्याकरण के अनुसार स्मित शब्द’स्मि’ धातु से बना है. यानी इसकी मूल धातु स्मि (Smi) है. इसका अर्थ होता है मुस्कुराना. इसके बाद स्मि धातु में क्त प्रत्यय लगा है. इस तरह स्मि और क्त मिलकर स्मित शब्द बना.

स्मि (धातु) + क्त (प्रत्यय)} = स्मित.

इस तरह संस्कृत साहित्य में ‘स्मित’ का अर्थ है, स्मि यानी मंद मुस्कान या हल्की हंसी और ईषत यानी हल्की सी मुस्कुराहट, जिसमें दांत न दिखें या केवल होंठों में खिंचाव हो. स्मित का एक अर्थ फूल की तरह खिलना भी है. जैसे किसी फूल का हल्का सा खिलना. स्मि धातु में आगे चलकर ‘स्मय’ यानी आश्चर्य, ‘विस्मय’ यानी अचरज और ‘सस्मित’ यानी मुस्कान के साथ जैसे शब्द बने हैं.

कैप्टन स्मित मच्छार. Photo: ANI

व्याकरण में स्मित शब्द का अर्थ

भारतीय काव्यशास्त्र में स्मित को हास्य रस का एक रूप माना गया है. दरअसल, संस्कृत साहित्य में हास्य के छह प्रकार होते हैं. ये हैं- स्मित, हसित, विहसित, अवहसित, अपहसित, अतिहसित. इनमें स्मित को सबसे सात्विक, मर्यादापूर्ण और उत्तम श्रेणी की मुस्कान माना गया है.

वेदों और उपनिषदों में ‘स्मित’ शब्द का उल्लेख

वैदिक साहित्य और उपनिषदों में केवल भौतिक या सांसारिक हंसी के लिए नहीं, बल्कि देवताओं की प्रसन्नता, प्रकृति के खिलने और ब्रह्म-चेतना के आनंद को दर्शाने के लिए स्मि धातु और स्मित शब्द का प्रयोग किया गया है. ऋग्वेद में ‘स्मि’ धातु और इसके रूपों जैसे स्मयते, स्मयमाना का उल्लेख उषा (सुबह की देवी), अग्नि और देवों की प्रसन्नता का वर्णन करने के लिए आया है. इसमें एक जगह कहा गया है “स्मयमाना युवतीः न आगात्…” यानी जैसे कोई मुस्कुराती हुई युवती सामने आती है, वैसे ही उषा देवी हल्की मुस्कान बिखेरती हुई प्रकट होती हैं.

उपनिषदों में ‘स्मित’ का प्रयोग आत्म-प्रसन्नता यानी अंदर की प्रसन्नता और ईश्वर के सौम्य रूप को व्यक्त करने के लिए किया गया है.कठोपनिषद और छान्दोग्य उपनिषद में जब साधक को आत्मज्ञान की अनुभूति होती है, तो उसके मुख पर स्वाभाविक रूप से जो शांति और आनंद झलकती है, उसे स्मित कहा गया है. श्रीमद्भागवत में भगवान श्रीकृष्ण की मुस्कान के लिए बार-बार मंदस्मित या सस्मित-मुख शब्द का प्रयोग होता है, जो उनकी शांत, निर्भय और करुणामयी चेतना का प्रतीक है. योग और भक्तिशास्त्र में माना जाता है कि चित्त के शांत होने पर चेहरे पर जो पहला भाव आता है, वही स्मित है.



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