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Panna Tiger Reserve News: मानसून सीजन के बाद पन्ना टाइगर रिजर्व के सभी गेट को खोल दिया गया है. रिजर्व के गेट खुलते ही फूल-मालाओं से सैलानियों का स्वागत किया गया. बाघों सहित अन्य जंगली जानवरों के दीदार के लिए पर्यटकों में उत्साह देखने को मिला..
पन्ना टाइगर रिजर्व के खुले गेट, पर्यटकों में दिखा उत्साह
गणेश प्रसाद/पन्ना. देशभर के वन्यजीव, प्रकृति प्रेमियों के लिए आज से बहुत बड़ी खुशखबरी है. एक अक्टूबर से देश के सभी टाइगर रिजर्व नए पर्यटन सत्र के लिए खुल गए हैं. पन्ना टाइगर रिजर्व में भी मंडला और हिनौता गेट से पर्यटकों को प्रवेश दिया गया. पहले दिन गाइड, जिप्सी चालक और सैलानियों का फूल-मालाओं से स्वागत हुआ.सफारी शुरू होते ही पर्यटकों में खासा उत्साह नजर आया. बाघों के साथ तेंदुआ, भालू, चीतल, हिरण, बाहरसिंघा, हाथी और अन्य वन्यजीवों के दीदार की उम्मीद पर्यटकों को पन्ना टाइगर रिजर्व खींच रही है.
1 एक अक्टूबर से पन्ना टाइगर रिजर्व का नया पर्यटन सत्र शुरू हो गया है. सुबह मंडला गेट पर पर्यटकों के स्वागत के लिए विशेष तैयारियां की गई. फील्ड डायरेक्टर बृजेंद्र श्रीवास्तव और डिप्टी डायरेक्टर बी.के. पटेल की मौजूदगी में गेट को फूलों से सजाया गया था. जहां फीता काटकर गेट खोले गए और फिर गाइड जिप्सी चालक व सैलानियों का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया. इसके बाद जिप्सियों को हरी झंडी दिखाकर गेट से प्रवेश देकर सफारी के लिए रवाना किया गया. पहले दिन ही पर्यटकों में जंगल सफारी और वन्यजीवों के दीदार को लेकर खासा उत्साह नजर आया.
पिछली बार 8 करोड़ रुपये से अधिक का आया राजस्व
अधिकारियों को इस पर्यटन सत्र में भी बेहतर पर्यटक संख्या और राजस्व की उम्मीद है. पिछले पर्यटन वर्ष में पन्ना टाइगर रिजर्व को पर्यटकों से 8 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ था. पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों के साथ तेंदुआ, हिरण, भालू, बारहसिंघा, हाथी और कई अन्य वन्य जीव पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. घने जंगल, प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीवों की मौजूदगी के चलते देश-विदेश से पर्यटक यहां पहुंचते हैं. और पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या से साइटिंग भी अच्छी होती है.
बाघ संरक्षण की कहानी
पन्ना कभी बाघों की संख्या में भारी गिरावट के कारण चर्चा में आया था. इसके बाद यहां बाघ पुनर्स्थापना कार्यक्रम चलाया गया. दूसरे टाइगर रिजर्व से बाघ और बाघिन लाकर पन्ना में बसाए गए. इसके बाद बाघों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई और पन्ना को बाघ संरक्षण की सफल कहानियों में शामिल किया जाने लगा.