सोचिए, आप किसी गांव में बस यूं ही घूमने निकले हों और अचानक आपका मेटल डिटेक्टर जमीन के नीचे दबी किसी चीज का संकेत देने लगे. आप मिट्टी हटाना शुरू करें और वहां से एक-दो नहीं, बल्कि सैकड़ों चांदी के सिक्के निकलने लगें. जर्मनी में एक शख्स के साथ कुछ ऐसा ही हुआ. उसे जमीन के नीचे करीब 2,000 साल पुराना रोमन खजाना मिला, जिसे देखकर पुरातत्वविद (Archaeologist) भी हैरान रह गए.
दरअसल, पश्चिमी जर्मनी(West Germany) में कोलोन के दक्षिण में वेसलिंग के पास ओलिवर रीडल मेटल डिटेक्टर लेकर खोजबीन कर रहे थे. यह उनके लिए कोई नई बात नहीं थी. वह पहले भी कई बार इसी तरह पुरानी चीजों की तलाश में निकल चुके थे. लेकिन इस बार उनके हाथ जो लगा, वह उनकी उम्मीद से कहीं ज्यादा खास था. रीडल को जमीन के अंदर से लगातार इशारे मिल रहे थे. शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद कोई पुरानी धातु की चीज होगी, लेकिन जब डिटेक्टर लगातार सिग्नल देता रहा तो उन्हें अंदाजा हो गया कि जमीन के नीचे कुछ बड़ा दबा हुआ है. रीडल ने बाद में बताया कि उस समय यह साफ हो गया था कि यहां कोई महत्वपूर्ण चीज छिपी हुई है.
मिट्टी के नीचे दबे थे 934 चांदी के सिक्के
रीडल ने जब इस बारे में अधिकारियों को जानकारी दी तो पुरातत्वविदों की टीम ने मौके पर पहुंचकर खुदाई शुरू की. इसके बाद जो सामने आया, उसने सभी को चौंका दिया. खुदाई में रोमन काल के 934 चांदी के डेनारी मिले. इन सिक्कों का कुल वजन करीब 6.8 पाउंड यानी लगभग 3.1 किलोग्राम था. माना जा रहा है कि यह खजाना करीब 2,000 साल पुराना है. राइनलैंड में पुरातात्विक स्मारकों के संरक्षण कार्यालय के मुताबिक, सम्राट हैड्रियन के शासनकाल से जुड़ा यह जर्मनी में अब तक मिला सबसे बड़ा सिक्का-भंडार बताया जा रहा है.
आखिर किसने और क्यों जमीन में छिपाए थे सिक्के?
इतने सारे सिक्के एक साथ जमीन में क्यों दबाए गए थे, इसका पक्का जवाब अभी तक नहीं मिला है. विशेषज्ञों का मानना है कि इन्हें दूसरी शताब्दी ईस्वी की दूसरी तिमाही के दौरान जानबूझकर जमीन में छिपाया गया था. राज्य के पुरातत्वविद् और संबंधित कार्याल के मुताबिक, इसके पीछे की असली वजह का सिर्फ अनुमान लगाया जा सकता है. हालांकि, सबसे संभावित बात यही है कि उस समय किसी व्यक्ति ने अपनी जमा पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए जमीन में छिपाया होगा. लेकिन इसके बाद वह व्यक्ति वापस क्यों नहीं आया, यह सवाल आज भी रहस्य बना हुआ है. किसी वजह से वह अपना खजाना लेने नहीं पहुंच सका और देखते ही देखते यह दौलत सदियों तक जमीन के अंदर दबी रही.
एक रोमन सैनिक की कई साल की कमाई के बराबर था खजाना
इन सिक्कों से सिर्फ उस दौर की दौलत का अंदाजा नहीं मिलता, बल्कि यह भी पता चलता है कि उस समय इतनी बड़ी रकम कितनी महत्वपूर्ण रही होगी. पुरातत्व कार्यालय के अनुसार, एक रोमन सैनिक को साल में करीब 300 दीनार मिलते थे. हालांकि उसकी कमाई का कुछ हिस्सा भोजन और जरूरी सामान पर खर्च हो जाता था. शोधकर्ताओं के अनुमान के मुताबिक, वेसलिंग में मिले खजाने जितनी रकम जमा करने के लिए एक सैनिक को अपनी खर्च करने लायक पूरी आय करीब छह साल तक बचानी पड़ती.
आज संग्रहालय में देख सकते हैं यह प्राचीन खजाना
हजारों साल तक जमीन में छिपे रहने के बाद अब इन सिक्कों को सुरक्षित कर लिया गया है. इस खोज को बॉन के LVR-LandesMuseum में प्रदर्शित किया गया है, जहां लोग इस प्राचीन खजाने को देख सकते हैं. पुराने सिक्कों के भंडार मिलना पूरी तरह असामान्य नहीं है, लेकिन पुरातत्वविदों के मुताबिक दूसरी शताब्दी के इतने बड़े सिक्का-भंडार बहुत कम मिलते हैं. यह खोज सिर्फ एक प्राचीन खजाना मिलने की कहानी नहीं है. इन 934 सिक्कों के जरिए करीब 2,000 साल पहले के उस दौर की अर्थव्यवस्था की भी झलक मिलती है, जब रोमन साम्राज्य का राइन क्षेत्र के बड़े हिस्से पर नियंत्रण था.