UP Chunav 2027: यूपी चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस ने क्यों खेला जय श्री राम के मुकाबले हर हर महादेव’ वाला कार्ड?

UP Chunav 2027: यूपी चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस ने क्यों खेला जय श्री राम के मुकाबले हर हर महादेव’ वाला कार्ड?


नई दिल्ली. यूपी चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस और बीजेपी में भगवान राम और भगवान शिव को लेकर युद्ध छिड़ गया है. तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी के भगवान राम और शिव को लेकर दिए गए बयान पर बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने पलटवार किया है. सीएम रेवंड रेड्डी ने 29 सितंबर 2026 को दिल्ली में कहा था कि भगवान राम अमीरों के देवता हैं, जबकि भगवान शिव गरीबों के देवता हैं’ इस बयान पर बीजेपी ने प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी हिंदू समाज को बांटने की कोशिश कर रही है. ये अब भगवान को बांटना चाह रहे हैं. इन्हें हिंदू धर्म का कुछ नहीं पता. कांग्रेस का मतलब मुसलमान सम्मान. ये हिंदू समाज को बांटना चाहते हैं. राहुल गांधी नास्तिक हैं. ये भगवान को भी बांट रहे हैं.’ ऐसे में बड़ा सवाल क्या यूपी चुनाव 2027 में ‘जय श्रीराम’ बनाम ‘हर-हर महादेव’ होने जा रहा है?

सोमवार को नई दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए तेलांगना के सीएम रेवंत रेड्डी ने भाजपा के चुनावी प्रभुत्व को चुनौती देते हुए यह टिप्पणी की थी. रेवंत रेड्डी ने कहा, ‘हम द्रविड़ियन हैं, जबकि उत्तर भारत के लोग आर्य हैं. हम भगवान शिव के भक्त हैं, जबकि वहां के लोग भगवान राम के भक्त हैं. भाजपा ने भगवान राम को हाइजैक कर लिया है. लेकिन भाजपा कभी हर-हर महादेव क्यों नहीं कहती? शिव गरीबों के देवता हैं और राम अमीरों के देवता हैं. भाजपा अमीरों की पार्टी है.’

क्यों खींची जा रही हैं ऐसी सियासी सीमाएं?

रेवंत रेड्डी का यह बयान केवल एक आकस्मिक टिप्पणी नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा रणनीतिक गणित छिपा नजर आ रहा है. भाजपा के आक्रामक हिंदुत्व और ‘जय श्री राम’ के नारे को काउंटर करने के लिए कांग्रेस का एक धड़ा शैव परंपरा, जो भगवान शिव की पूजा करते हैं और स्थानीय सांस्कृतिक प्रतीकों को आगे रख रहा है उसको मुद्दा बना सकता है. परिसीमन और केंद्रीय करों के बंटवारे जैसे मुद्दों को लेकर दक्षिण भारत के राज्य पहले से ही लामबंद हो रहे हैं. रेवंत रेड्डी का यह दांव दक्षिण में क्षेत्रीय अस्मिता को हवा देने की कोशिश है. लेकिन इसे यूपी चुनाव 2027 से पहले भी आजमाया जा सकता है.

क्या यूपी चुनाव 2027 में यह बड़ा मुद्दा बनेगा?

भगवान राम को ‘अमीरों’ और शिव को ‘गरीबों’ का देवता बताकर कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि भाजपा का हिंदुत्व केवल उच्च वर्ग और पूंजीपतियों के लिए है, जबकि बहुजन और गरीब आबादी शिव की उपासक है. उत्तर प्रदेश की राजनीति हमेशा से धार्मिक और सामाजिक ध्रुवीकरण के इर्द-गिर्द घूमती रही है. ऐसे में रेवंत रेड्डी का यह बयान 2027 के यूपी चुनाव में बड़ा प्रभाव डाल सकता है.

यूपी चुनाव 2027 से पहले सीएम योगी की दिल्ली में बैक-टू-बैक मीटिंग.

यूपी चुनाव 2027 में बीजेपी कैसे देगी जवाब?

भाजपा नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों ने रेवंत रेड्डी पर सनातन धर्म को बांटने का आरोप लगाया है. भाजपा का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद काशी विश्वनाथ का प्रतिनिधित्व करते हैं. यूपी में योगी आदित्यनाथ और भाजपा इस बयान का इस्तेमाल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को हिंदू विरोधी और विभाजनकारी ठहराने के लिए करेंगे. हालांकि, उत्तर प्रदेश में भगवान राम और भगवान शिव दोनों के प्रति आस्था बेहद गहरी है. दक्षिण से आया यह ‘राम बनाम शिव’ या ‘आर्य बनाम द्रविड़’ का नैरेटिव यूपी के मतदाताओं के बीच कांग्रेस के सहयोगी दलों जैसे सपा को रक्षात्मक मुद्रा में ला सकता है.

यूपी में अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के बाद से ‘राम भक्ति’ एक बड़ा चुनावी कारक रही है. दक्षिण भारतीय मुख्यमंत्री द्वारा राम को ‘अमीरों का भगवान’ कहना यूपी के सवर्ण, पिछड़े और ग्रामीण इलाकों के रामभक्तों को भाजपा के पक्ष में गोलबंद कर सकता है. रेवंत रेड्डी के इस बयान से साफ है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले देश में धार्मिक, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय ध्रुवीकरण की नई बिसात बिछाई जा रही है. जहां एक तरफ भाजपा इसे पूरे हिंदू समाज का अपमान बताकर भुनाने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष इसे आर्थिक-सामाजिक असमानता की बहस में बदलने की कोशिश कर सकता है.



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