NEET-UG को आने वाले समय में पेन-पेपर से कंप्यूटर पर कराने की तैयारी चल रही है. शिक्षा मंत्रालय राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा कंप्यूटर बेस्ड टेस्टिंग (Computer Based Testing) यानी CBT इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है जो सिर्फ NEET जैसी बड़ी परीक्षा का बोझ न संभाले बल्कि भविष्य में देश के दूसरे बड़े एंट्रेंस एग्जाम को भी ऑनलाइन कराने में काम आ सके हालांकि NEET-UG को ऑनलाइन कराने का अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है.
सरकार की तैयारी केवल प्रश्नपत्र को कंप्यूटर स्क्रीन पर पहुंचाने तक सीमित नहीं है.इसके लिए देशभर में पर्याप्त परीक्षा केंद्र तैयार करने, उनके इंफ्रास्ट्रक्चर को एक जैसा रखने, इंटरनेट और बिजली जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करने और अलग-अलग इलाकों के छात्रों को परीक्षा की समान परिस्थितियां देने पर काम किया जा रहा है.
NEET को ऑनलाइन कराने की तैयारी क्यों?
NEET-UG अभी तक पेन-पेपर और OMR शीट के जरिए आयोजित होता रहा है.हर साल करीब 25 लाख उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं.इतने बड़े स्तर पर होने वाली परीक्षा को ऑनलाइन मोड में ले जाना आसान काम नहीं है.इसी वजह से शिक्षा मंत्रालय एक ऐसी राष्ट्रीय CBT इंफ्रास्ट्रक्चर रणनीति तैयार कर रहा है जिसके जरिए देशभर में परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता बढ़ाई जा सके और उनके लिए परीक्षा-स्तर के जरूरी मानक तय किए जा सकें.शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इस रणनीति का मकसद परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता में मौजूद जियोग्राफिक गैप यानी भौगोलिक अंतर को कम करना और परीक्षा केंद्रों के लिए एक जैसे मानक तय करना है.इसके लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने में कई अलग-अलग स्रोतों का इस्तेमाल किया जाएगा.
सिर्फ कंप्यूटर लगाने से ऑनलाइन हो जाएगी NEET?
NEET को CBT मोड में कराने का मतलब केवल इतना नहीं होगा कि अभी जो प्रश्नपत्र कागज पर मिलता है वही कंप्यूटर की स्क्रीन पर दिखाई देने लगे.सरकार को इसके लिए पूरे परीक्षा तंत्र को नए तरीके से तैयार करना होगा.सबसे पहले यह देखना होगा कि देशभर में कितने ऐसे परीक्षा केंद्र उपलब्ध हैं जहां एक साथ बड़ी संख्या में उम्मीदवार कंप्यूटर पर परीक्षा दे सकें.इसके साथ ही इन केंद्रों पर एक जैसे कंप्यूटर और दूसरे जरूरी उपकरण, भरोसेमंद इंटरनेट कनेक्टिविटी, बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था और सुरक्षा इंतजाम भी जरूरी होंगे.इसके अलावा परीक्षा को किस क्रम में ऑफलाइन से ऑनलाइन किया जाए कितने चरणों में बदलाव हो और किन इलाकों में पहले व्यवस्था तैयार की जाए इन सभी पहलुओं पर भी विचार किया जा रहा है.
गांव और छोटे शहरों के छात्रों पर भी नजर
NEET को ऑनलाइन कराने की संभावित योजना में सबसे बड़ी चिंता उन उम्मीदवारों को लेकर है जिनके इलाकों में इंटरनेट और परीक्षा केंद्रों की सुविधाएं सीमित हैं.सरकार यह भी देख रही है कि CBT में बदलाव का ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों, महिला उम्मीदवारों और ऐसे जिलों के विद्यार्थियों पर क्या असर पड़ेगा जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है.इसका मतलब है कि ऑनलाइन परीक्षा की व्यवस्था बनाते समय केवल तकनीकी सुविधा को ही नहीं देखा जा रहा बल्कि यह भी ध्यान रखा जा रहा है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले उम्मीदवारों को परीक्षा देने के लिए तुलनात्मक रूप से समान परिस्थितियां मिलें.
NEET Online का फैसला अभी बाकी
NEET-UG को ऑनलाइन कराने की दिशा में काम जरूर चल रहा है लेकिन अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है. सरकार पहले नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की सिफारिशों का इंतजार कर रही है.यह टास्क फोर्स जुलाई में बनाई गई थी.इसका काम सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन, सुरक्षा, डिजाइन और प्रशासन में व्यापक सुधार के लिए सुझाव देना है.इसके दायरे में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA की ओर से आयोजित होने वाली परीक्षाएं भी शामिल हैं.टास्क फोर्स परीक्षा की सुरक्षा, तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर, पहुंच और समावेशन जैसे मुद्दों पर काम कर रही है.
नीलेकणि पैनल किन लोगों से कर रहा है चर्चा?
नीलेकणि की अध्यक्षता वाली टास्क फोर्स अपनी सिफारिशें तैयार करने के लिए विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों से बातचीत कर रही है.द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार टास्क फोर्स ने पूर्व ISRO चेयरमैन के. राधाकृष्णन से भी सलाह ली है. राधाकृष्णन उस समिति के अध्यक्ष रह चुके हैं जिसे 2024 में NEET-UG पेपर लीक के बाद NTA में सुधार के सुझाव देने के लिए बनाया गया था.नई टास्क फोर्स की ओर से की जा रही यह बातचीत NTA और देश की परीक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की प्रक्रिया का हिस्सा है.
2024 NEET पेपर लीक के बाद परीक्षा सुधार की चर्चा
NEET को ऑनलाइन कराने की चर्चा नई नहीं है. इससे पहले भी कई बार मेडिकल प्रवेश परीक्षा को CBT मोड में कराने का विचार सामने आ चुका है लेकिन अब इस दिशा में तैयारी ऐसे समय हो रही है, जब 2024 के NEET-UG पेपर लीक के बाद देश की परीक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों पर जोर दिया जा रहा है.सरकार परीक्षा की सुरक्षा और पूरी प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए व्यापक स्तर पर बदलावों पर विचार कर रही है. इसी बड़े सुधार कार्यक्रम के साथ CBT इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की योजना भी आगे बढ़ रही है.
SC भी परीक्षा सुधारों को लेकर पूछ चुका है सवाल
NEET परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी केंद्र से जानकारी मांग चुका है. शीर्ष अदालत ने केंद्र से राधाकृष्णन समिति और नीलेकणि टास्क फोर्स की सिफारिशों को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण देने को कहा है.सुप्रीम कोर्ट ने यह भी जोर दिया है कि NEET से जुड़े सुधार केवल अस्थायी इंतजामों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उन्हें संस्थागत रूप दिया जाना चाहिए.इसी व्यापक सुधार प्रक्रिया के बीच शिक्षा मंत्रालय CBT इंफ्रास्ट्रक्चर की योजना तैयार कर रहा है.
JEE और दूसरे एग्जाम भी हो सकते हैं ऑनलाइन
NEET अकेली ऐसी बड़ी परीक्षा नहीं है, जिसे ऑनलाइन कराने पर विचार किया जा रहा है. NTA पहले से ही कई प्रमुख परीक्षाएं CBT मोड में आयोजित करता है. इनमें JEE-Main, CUET-UG, CUET-PG, UGC-NET और CSIR-UGC-NET शामिल हैं.NEET अभी भी NTA की सबसे बड़ी पेन-पेपर परीक्षाओं में से एक है और इसमें करीब 25 लाख उम्मीदवार हर साल शामिल होते हैं.शिक्षा मंत्रालय की प्रस्तावित राष्ट्रीय CBT इंफ्रास्ट्रक्चर रणनीति तैयार होने के बाद इसका इस्तेमाल दूसरे पेन-पेपर एंट्रेंस एग्जाम को भी धीरे-धीरे कंप्यूटर आधारित परीक्षा में बदलने के लिए किया जा सकता है यानी अगर यह व्यवस्था तैयार होती है तो इसका असर केवल NEET तक सीमित नहीं रहेगा. भविष्य में देश की कई दूसरी राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के लिए भी इसी तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया जा सकता है.
एक जैसी परीक्षा व्यवस्था बनाना बड़ी चुनौती
NEET जैसे बड़े एग्जाम को ऑनलाइन कराने के लिए सबसे बड़ी चुनौती उसका पैमाना है. देश के अलग-अलग राज्यों और जिलों में पर्याप्त संख्या में परीक्षा केंद्र उपलब्ध कराने होंगे.इन केंद्रों में मानक के अनुसार कंप्यूटर और दूसरे उपकरण होने चाहिए.इंटरनेट कनेक्टिविटी भरोसेमंद होनी चाहिए और बिजली जाने की स्थिति में बैकअप की व्यवस्था भी जरूरी होगी. साथ ही परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा को भी मजबूत रखना होगा.इसके अलावा यह भी सुनिश्चित करना होगा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों को लगभग समान परीक्षा परिस्थितियां मिलें.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
परीक्षा सुधार और एग्जाम सिक्योरिटी पर काम करने वाले इनोवेशनव्यू के डायरेक्टर आशीष मित्तल ने न्यूज 18 से कहा कि अभी तक देश में परीक्षाओं को लेकर कंप्यूटर आधारित परीक्षा कराने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित नहीं किए गए हैं और यह समय की मांग है क्योंकि आप देखेंगे कि हेल्थ से लेकर शॉपिंग तक के लिए अलग इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था है लेकिन परीक्षाओं के मामले में देश में डेडिकेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित नहीं है जिससे परीक्षार्थियों को परेशानी होती है. अगर सरकार इस दिशा में कोई कदम उठा रही है तो यह सराहनीय है. यह भारत की परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा.