12वीं पास था ‘डॉक्टर’, सामने आया 200 करोड़ का ऐसा गड़बड़झाला, पीछे पड़ गई ED
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12वीं पास होने के बावजूद करीब 30 साल तक खुद को डॉक्टर बताने वाले धर्मेंद्र कुमार चंद्रदेव सिंह अब ईडी की जांच के घेरे में हैं. प्रवर्तन निदेशालय ने सीएसआर डोनेशन रैकेट से जुड़े मामले में महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात और दिल्ली-एनसीआर में 8 ठिकानों पर छापेमारी की है. आरोप है कि चैरिटेबल ट्रस्ट और दूसरी संस्थाओं के जरिए पीएसयू और निजी कंपनियों से सीएसआर फंड जुटाया गया. क्या है पूरा मामला जानने के लिए पढ़ें आगे…
फर्जी सीएसआर डोनेशन रैकेट मामले में ईडी ने आठ ठिकानों में रेड की है. (एआई इमेज)
नई दिल्ली: यह मामला फिल्मों की स्क्रिप्ट को भी मात देने वाला है. एक शख्स पिछले 30 सालों तक लोगों के बीच खुद को डॉक्टर बताकर आंखों में धूल झोंकता रहा. लेकिन जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस शख्स को अपने रडार में लिया, तो पता चला कि जनाब के पास मेडिकल की कोई डिग्री तो दूर, 12वीं के आगे की पढ़ाई का भी कोई पुख्ता सबूत नहीं है. इतना ही नहीं, बीते कुछ सालों में इसने अपनी बातों को लोगों को फंसाकर 200 करोड़ रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लिया.
ईडी के अनुसार, इस खेल की शुरुआत एक झूठी पहचान से हुई थी. धर्मेंद्र कुमार चंद्रदेव सिंह नामक इस शख्स ने खुद को ‘डॉक्टर’ बताकर लोगों के बीच अपनी ऐसी छवि बना ली कि लोग उसपर आंख मूंदकर भरोसा करने लगे. फिर इसी भरोसे का फायदा उठाकर उसने कई चैरिटेबल ट्रस्ट और संस्थाएं खड़ी कर दीं. इसके बाद शुरू हुआ असली खेल. इस खेल के तहत पहले पीएसयू और बड़ी निजी कंपनियों के सामने स्वास्थ्य से जुड़े आकर्षक सीएसआर प्रोजेक्ट्स पेश किए जाते थे.
फिर कंपनियों से फंड मिलने के बाद प्रोजेक्ट्स को या तो अधूरा छोड़ा गया या कागजों पर ही पूरा दिखा दिया गया. इसके बाद फर्जी और शेल कंपनियों के जरिए बिलों को बढ़ा-चढ़ाकर रकम बाहर निकाल ली जाती थी. इतना ही नहीं, कंपनियों से मिलने वाले सीएसआर फंड का एक बड़ा हिस्सा नकद में वापस कर दिया जाता था. इस खेल में आरोपी अपना कमीशन अपने पास रख लेता था, जबकि बाकी की भारी-भरकम रकम कंपनियों को कैश लौटा दी जाती थी.
4 राज्यों में ईडी की ताबड़तोड़ छापेमारी
ईडी को शक है कि इस पूरे नेटवर्क के जरिए कंपनियों के ‘अकाउंटेड’ पैसों को ‘अनअकाउंटेड कैश’ में बदलने का एक खतरनाक खेल चल रहा था. इस मामले में मुंबई के जुहू पुलिस स्टेशन में दर्ज शुरुआती एफआईआर दर्ज की गई थी. इसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया. इसके बाद, अपनी कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए ईडी ने महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात और दिल्ली-एनसीआर समेत कुल 8 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है.
जल्द होने कुछ बड़े खुलासे संभव!
फिलहाल, ईडी इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि इस 200 करोड़ रुपये के जाल में पर्दे के पीछे और कौन-कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं. दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं और हर उस कड़ी को जोड़ा जा रहा है जो इस फर्जी ‘डॉक्टर’ से लेकर बड़े कॉरपोरेट घरानों और बिचौलियों तक जाती है.