देहरादून के एनआईपीवीडी में दृष्टिबाधितों के लिए ब्रेल लिपि में किताबें होती हैं तैयार, इन 6 बिंदुओं का होता है इस्तेमाल, जानें

देहरादून के एनआईपीवीडी में दृष्टिबाधितों के लिए ब्रेल लिपि में किताबें होती हैं तैयार, इन 6 बिंदुओं का होता है इस्तेमाल, जानें


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देहरादून के एनआईपीवीडी में दृष्टिबाधितों के लिए ब्रेल लिपि में किताबें तैयार होती हैं. लुई ब्रेल ने 1824 में 15 साल की उम्र में इस लिपि का आविष्कार किया था, जो 6 उभरे हुए बिंदुओं पर आधारित है. हमारे देश में तमिल, तेलगु, कन्नड़ और मलयालम जैसी भाषा से लेकर दुनिया की कोई भी भाषा ब्रेल लिपि में लिखी जा सकती है. हमारे यहां यूनिफाइड ब्रायन इंग्लिश कॉन्सेप्ट में काम चल रहा है. हमारे देश में यूनिकोड ब्रेल 6 बिंदुओं पर आधारित है. इन 6 बिंदुओं के आधार पर ही यह पढ़ी और लिखी जाती है.

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देहरादून: दृष्टिबाधित व्यक्तियों को नजर नहीं आता है लेकिन शिक्षा हर इंसान के लिए जरूरी होती है ऐसे लोग जो देखा नहीं सकते उनके लिए देहरादून के एनआईपीवीडी में खास तरह की किताबें तैयार होती है. यह ब्रेल लिपि में तैयार होती है. सभी के लिए शिक्षा और सशक्तिकरण का सबसे सशक्त माध्यम है, जिसने उनके लिए पढ़ने-लिखने और ज्ञान की दुनिया के दरवाजे खोले हैं. इसका इतिहास 19वीं शताब्दी की शुरुआत से जुड़ा है, जब फ्रांस के लुई ब्रेल ने 1824 में मात्र 15 साल की आयु में इस क्रांतिकारी पद्धति का आविष्कार किया था. बाल्यावस्था में ही एक दुर्घटना में अपनी आँखों की रोशनी खो देने वाले लुई ब्रेल ने फ्रांसीसी सेना की ‘नाइट राइटिंग’से प्रेरणा लेकर इसे विकसित किया था.

ऐसे काम करती है ब्रेल लिपि

ब्रेल लिपि की कई प्रमुख विशेषताएं हैं. यह लिपि स्पर्श तकनीक पर काम करती है, जिसमें छह उभरे हुए बिंदुओं के विभिन्न संयोजनों का उपयोग किया जाता है. दृष्टिबाधित व्यक्ति अपनी उंगलियों के स्पर्श से इन उभरे हुए बिंदुओं को पहचानकर अक्षरों, संख्याओं और चिह्नों को पढ़ते हैं. यह किसी एक भाषा तक सीमित नहीं है; हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और संगीत के स्वर-लिपि भी ब्रेल में आसानी से लिखे और पढ़े जा सकते हैं. ब्रेल लिपि में किताबें और अध्ययन सामग्री उपलब्ध होने से देख न सकने वाले लोग शिक्षा, साहित्य और पेशेवर क्षेत्रों में सामान्य लोगों की तरह ही प्रगति कर रहे हैं. आज के डिजिटल युग में कंप्यूटर और स्मार्टफोन के लिए भी ‘रिफ्रेशेबल ब्रेल डिस्प्ले’ उपलब्ध हैं, जिससे यह लिपि आधुनिक तकनीक के साथ पूरी तरह तालमेल बिठाकर दृष्टिबाधित समाज को आत्मनिर्भर बना रही है.

दृष्टि बाधित होकर भी लोगों के लिए खोली राह

एनआईपीवीडी के ब्रेल इंस्ट्रक्टर (Braille instructor) रोहित कुमार ने बताया कि हमारे देश में तमिल, तेलगु, कन्नड़ और मलयालम जैसी भाषा से लेकर दुनिया की कोई भी भाषा ब्रेल लिपि में लिखी जा सकती है. हमारे यहां यूनिफाइड ब्रायन इंग्लिश कॉन्सेप्ट में काम चल रहा है. हमारे देश में यूनिकोड ब्रेल 6 बिंदुओं पर आधारित है. इन 6 बिंदुओं के आधार पर ही यह पढ़ी और लिखी जाती है. उन्होंने कहा कि ब्रेल लुईस खुद दृष्टिबाधित थे फिर भी उन्होंने इस पर काम किए. 1821 में स्कूल में फ्रांसीसी सेना के कैप्टन चार्ल्स बार्बिय ने ‘नाइट राइटिंग’ का प्रदर्शन किया जिसे सैनिक युद्ध के मैदान में रात के अंधेरे में संदेश पढ़ने के लिए प्रयोग करते थे. यह 12 बिंदुओं पर आधारित ध्वन्यात्मक प्रणाली थी. 12 साल के लुई ने इसकी क्षमता को पहचाना लेकिन इसकी जटिलता को भी समझा. उन्होंने अगले तीन साल तक दिन-रात एक कर दिया. मात्र 15 साल की उम्र में उन्होंने 12 बिंदुओं को घटाकर 6 कर दिया. उन्होंने महसूस किया कि 6 बिंदुओं वाली एक ‘सेल’ उंगली के एक ही पोर के नीचे पूरी तरह समा जाती है. यही वह क्षण था जब ब्रेल लिपि का जन्म हुआ.



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