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Hardoi Latest News: हरदोई में जमीन की पैमाइश के दौरान एक लेखपाल पर युवक से जाति पूछने और फिर SC-ST एक्ट में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगा है. मामले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद बढ़ गया. प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच तहसीलदार सदर को सौंप दी है. अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी.
वीडियो वायरल होते ही मचा हंगामा.
हरदोई: यूपी में हरदोई के सखौरा गांव में जमीन की पैमाइश के दौरान हुई कथित बातचीत अब विवाद की वजह बन गई है. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक लेखपाल के युवक से उसकी जाति पूछने और बाद में SC-ST एक्ट का नाम लेकर कार्रवाई की बात कहने का आरोप लगाया जा रहा है. वीडियो सामने आने के बाद मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी नाराजगी देखने को मिली.
मामला टड़ियावां थाना क्षेत्र का है. गांव के मजरा बेहटी निवासी रामसागर पासी ने पट्टे की जमीन पर कब्जे और उसकी पैमाइश को लेकर तहसील में आवेदन किया था. इसके बाद नायब तहसीलदार के नेतृत्व में राजस्व टीम गांव पहुंची थी. टीम में लेखपाल और पुलिसकर्मी भी मौजूद थे.
इसी दौरान संतोष पांडेय के बेटे गौरव पांडेय ने जमीन पर अपना दावा बताते हुए पूरी जमीन की पैमाइश कराने की मांग की. गौरव का कहना है कि करीब 30 साल पहले उनके बाबा गया प्रसाद पांडेय के नाम जमीन का पट्टा हुआ था. परिवार का दावा है कि वे लंबे समय से वहां पेड़ लगाकर खेती करते आ रहे हैं.
गौरव का आरोप है कि पूरी जमीन की नापजोख किए बिना ही वहां लगे पेड़ों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई. इसी बात को लेकर उसने राजस्व टीम के सामने अपनी बात रखने की कोशिश की.
जाति पूछने के बाद बढ़ा विवाद
गौरव का आरोप है कि इसी दौरान लेखपाल आलोक त्रिपाठी ने उससे उसकी जाति पूछी. उसने खुद को ब्राह्मण बताया. इसके बाद दूसरे पक्ष की जाति पूछे जाने और उनके अनुसूचित जाति से होने की जानकारी मिलने पर उसे SC-ST एक्ट में फंसाने की धमकी दी गई. इस कथित बातचीत का वीडियो 27 सितंबर को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. वीडियो सामने आने के बाद कई लोगों और ब्राह्मण संगठनों ने मामले पर आपत्ति जताई. इसके बाद प्रशासन ने भी पूरे मामले को गंभीरता से लिया.
प्रशासन ने कहा- टिप्पणी गलत थी
हरदोई सदर के एसडीएम मयंक कुंडू ने मामले पर संज्ञान लेते हुए जांच तहसीलदार सदर को सौंप दी है. एसडीएम के मुताबिक, जमीन की पैमाइश के दौरान लेखपाल की ओर से SC-ST एक्ट को लेकर की गई टिप्पणी गलत थी. तहसीलदार को दो दिन में जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं. रिपोर्ट आने के बाद संबंधित लेखपाल के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
लेखपाल ने धमकी देने से किया इनकार
वहीं, आरोपी लेखपाल आलोक त्रिपाठी ने खुद पर लगे आरोपों को गलत बताया है. उनका कहना है कि उन्होंने किसी को धमकी नहीं दी. उनके मुताबिक, मौके पर जमीन को लेकर विवाद था और उन्होंने दोनों पक्षों से कागजों के आधार पर अपना पक्ष रखने को कहा था.
लेखपाल का दावा है कि अनुसूचित जाति के पट्टेदार की जमीन समेत करीब 11 बीघा जमीन पर कब्जे का विवाद था. उनका कहना है कि वायरल वीडियो को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है. ऐसे में अब प्रशासन की जांच रिपोर्ट से ही साफ होगा कि पैमाइश के दौरान वास्तव में क्या हुआ था और वायरल वीडियो में लगाए जा रहे आरोप कितने सही हैं.