Premanand Ji Maharaj Viral News: राधा-राधा-राधा… ये सुनते ही आपके दिल और दिमाग में एक नाम आता है, वो है प्रेमानंद जी महाराज (Premanand Maharaj). आज यह नाम किसी पहचान का मोहताज नहीं है. रानी के परम भक्त और वृंदावन (Vrindavan) के संत की ख्याति आज देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में फैल चुकी है. हालांकि, संत प्रेमानंद अपने शिष्य की संदिग्ध हालात में मौत के बाद से एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं. उनके अक्सर सोशल मीडिया पर वीडियो (Viral Video) छाए रहते हैं. अब एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने बताया कि कोई खुदकुशी करता है तो उसके बाद उसके साथ क्या कुछ होता है.
यह है मामला
मथुरा के वृंदावन के वराह घाट मार्ग पर गऊ कृपा कुंज आश्रम की छत से कूदकर संत प्रेमानंद महाराज के साधक (परिकर) रसिक दुलारी शरण की बीते गुरुवार को संदिग्ध हालात में चौथे फ्लोर से गिरकर जान चली गई. कोई इसे हत्या मान रहा है तो कोई आत्महत्या. साधक का प्राइवेट पार्ट कटा हुआ था. इसलिए कई सवाल खड़े हो गए. पुलिस जांच कर रही है.
प्रेत, पीने को पानी नहीं…
प्रेमानंद महाराज ने आत्महत्या को लेकर लोगों को बेहद गंभीर संदेश दिया था. उन्होंने कहा कि जो लोग अपने शरीर को खत्म करने के लिए सोचते हैं उन्हें पता होना चाहिए कि मरने के बाद बहुत समय तक प्रेत बनना पड़ेगा. तड़पते रहोगे, पीने को जल भी नहीं मिलता. जीवन बहुत कष्ट भरा हो जाता है. जीवन में कितनी भी मुश्किलें आएं, आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं है. परीक्षा में असफलता, परिवार में परेशानी, बीमारी, नौकरी या रिश्तों में दिक्कत जैसी परिस्थितियों से परेशान होकर जीवन खत्म करने का फैसला नहीं लेना चाहिए.
उनका कहना है कि मनुष्य जीवन बहुत कठिनाई से मिलता है और इसे खत्म करने के बजाय भगवान की भक्ति और अच्छे कर्मों में लगाना चाहिए. जिन लोगों के मन में कभी आत्महत्या का विचार आता है, उन्हें एक बार रुककर सोचना चाहिए कि क्या मरने से उनकी समस्या खत्म हो जाएगी? अगर जीवन में परेशानी है तो उससे लड़ने की कोशिश करनी चाहिए. उन्होंने लोगों से कहा कि अगर उन्हें लगता है कि जीवन में कुछ नहीं बचा है, तो अपना जीवन भगवान को समर्पित कर दें और दूसरों की मदद करने को अपना उद्देश्य बना लें.
‘परीक्षा में फेल हुए तो दोबारा कोशिश करें’
संत ने बच्चों और अभिभावकों को भी संदेश दिया. उन्होंने कहा कि अगर कोई बच्चा परीक्षा में फेल हो जाता है तो उसे डांटने या दबाव देने के बजाय परिवार को उसके साथ खड़ा होना चाहिए. माता-पिता को बच्चों के साथ मित्र जैसा व्यवहार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि परीक्षा में असफलता जिंदगी की असफलता नहीं है. बच्चा दोबारा मेहनत कर सकता है और आगे बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि इसी तरह पति-पत्नी के रिश्ते में परेशानी हो, नौकरी न मिले या कोई इच्छा पूरी न हो तो भी जीवन खत्म करना कोई रास्ता नहीं है. ऐसी परिस्थितियों में शांत होकर विचार करना चाहिए और सही रास्ता तलाशना चाहिए.
‘समस्या से हारना नहीं, लड़ना सीखें’
संत ने कहा कि जीवन में समस्याएं आती-जाती रहेंगी, लेकिन मनुष्य का जीवन बार-बार नहीं मिलता. इसलिए व्यक्ति को समस्या से हारना नहीं, बल्कि उसका सामना करना सीखना चाहिए. उन्होंने नाम जप और भगवान के स्मरण को मानसिक मजबूती का माध्यम बताया. मनुष्य शरीर को उन्होंने एक ऐसी नाव बताया, जिससे जीवन रूपी भवसागर को पार किया जा सकता है. इसके लिए गुरु, सत्संग और भगवान की कृपा का सहारा जरूरी है. व्यक्ति को अपने हर काम को भगवान को समर्पित करने की भावना रखनी चाहिए.
‘बुढ़ापे में भजन करूंगा’ की सोच छोड़ें
संत ने युवाओं को भी संदेश दिया कि यह सोच गलत है कि अभी जिंदगी भोगने के लिए है और बुढ़ापे में भगवान का भजन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इंसान जिस चीज के बारे में लगातार सोचता और करता है, वही धीरे-धीरे उसके मन में गहरी बैठ जाती है. इसलिए बचपन और युवावस्था से ही अच्छे संस्कार, सत्संग और भगवान के नाम का स्मरण करना चाहिए. केवल बुढ़ापे में भजन शुरू करने की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए.
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