‘द ग्रेट आइस कॉफी डिबेट 2026 क्या है? इस सवाल का जवाब जानने से पहले, याद कीजिए अपनी जॉब के इंटरव्यू का वो दिन. पूरी तरह से सलीके के कपड़ों में सजे हुए आप और हाथ में जरूरी कागजात. जेब में वो रुमाल भी जरूरी था, जो बार-बार घबराहट की वजह से आ रहा पसीना पोंछने की काम आता था. लेकिन अब मैं आपको बताऊं की इंटरव्यू के दौरान कोई हाथ में कोल्ड कॉफी या माचा टी का कप हाथ में पकड़े इंटरव्यू रूम में आए तो? बस यहीं से शुरू हुई है ये ‘द ग्रेट आइस कॉफी डिबेट 2026’. एक सिंपल सी आइस कॉफी ने इंटरनेट पर इंटरव्यू एटीकेट्स को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है.
इस पूरी बहस के केंद्र में सवाल है, क्या इंटरव्यू में आइस कॉफी या माचा लेकर जाना ठीक है? ये बहस शुरू हुई अमेरिकी रिक्रूटर कैटलिन वेहनाइन के ऑरिजनल वीडियो से. उन्होंने जॉब ढूंढने वाले खासकर जेन Z को अपने इस वीडियो में कहा कि इंटरव्यू में कम से कम आइस कॉफी लेकर न आएं. उनका कहना था कि इससे लगता है जैसे इंटरव्यू दिन के बाकी छोटे-मोटे कामों में से ही एक है. लेकिन कैटलिन की इस बात ने दो पीढ़ियों को दो-फाड़ कर दिया है.
एक तरफ जहां कई लोग इस वीडियो के समर्थन में खड़े हैं और वहीं कुछ लोग इस तरह की बात को ‘पुरानी, बेतुकी और दकियानूसी’ बता रहे है. हालांकि इस विवाद के बाद उन्होंने ये भी कहा कि वे कॉफी को अपने-आप में बुरा नहीं मानतीं, उनका मकसद सिर्फ ध्यान भटकाने वाली चीजों से बचना था.
क्यों बन गई यह जेनरेशनल बहस?
टिकटॉक वीडियो से शुरू हुई ये बहस अब आगे बढ़कर वर्कप्लेस एटीकेट्स और प्रोफेशनलिज्म की बदलती समझ पर पहुंच गई है. कई मिलेनियल्स आइस ड्रिंक को बहुत कैजुअल मानते हैं और इंटरव्यू जैसे फॉर्मल सेटअप में हाथ में कोल्ड कॉफी लेकर जाना कुछ ज्यादा ही केज्युअल हो जाता है. साथ ही कॉफी गिरना, या पीते समय मुंह से आवाज आना, गीले हाथ जैसी कई प्रैक्टिकल प्रॉब्लम्स भी हो सकती हैं. Firstpost की रिपोर्ट में एटिकेट एक्सपर्ट थॉमस फार्ले कहते हैं कि इससे ये भी फीलिंग जाती है कि उम्मीदवार ने समय की प्लानिंग सही नहीं की और मल्टीटास्किंग कर रहा है.
Gen-Z की है इसपर अलग राय
इस पूरे मामले पर बहस के दूसरे हिस्से में खड़ा नजर आता है जेन-जी. ये जनरेशन इसे बेवजह की पाबंदी मानती है. 22 साल की लॉस एंजिल्स की टिकटॉक क्रिएटर एशा कहती हैं, ‘हमने हाल के सालों में यह शिफ्ट किया है कि काम के अलावा भी हमारी जिंदगी है. तो मैं इंटरव्यू के लिए अपना कॉफी क्यों न पियूं?’ कई युवा सोशल मीडिया पर पूछ रहे हैं कि योग्यता से जुड़ी चीजों के बजाय एक ड्रिंक पर जजमेंट क्यों हो.
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का क्या कहना है?
लिंक्डइन की कैथरीन फिशर सलाह देती हैं कि सावधानी बरतें और ड्रिंक न लेकर जाएं. ‘ आप नहीं जानते कि इंटरव्यू लेने वाला कौन है. इतनी छोटी चीज पर रिस्क क्यों लें?’ कुछ रिक्रूटर्स इससे सहमत नहीं. उनका कहना है कि अगर उम्मीदवार अच्छा है तो मुझे फर्क नहीं पड़ता कि उन्होंने आइस कॉफी लाई है या नहीं. बॉनी डिलबर का कहना है कि अगर कोई हायरिंग मैनेजर सिर्फ आइस कॉफी की वजह से किसी को रिजेक्ट करे तो उन्हें कोचिंग की जरूरत है.
क्यों इतनी चर्चा हो रही है?
इन दिनों AI की वजह से जॉब मार्केट में काफी मुश्किले हैं. नई तकनीक और एआई ने एंट्री लेवल जॉब्स पर काफी खतरा पैदा कर दिया है. वैकेंसी घट रही हैं और हायरिंग धीमी पड़ी है. ऐसे में इंटरव्यू के दौरान इस तरह का केज्युअल बिहेवियर क्या सही है. ये पूरी बहस सिर्फ कॉफी की नहीं है. यह बदलते वर्कप्लेस नियम, नए माहौल, जेनरेशनल गैप और इस सवाल को दिखाती है कि प्रोफेशनलिज्म की परिभाषा अब कितनी फ्लेक्सिबल हो गई है.