एक युवक से शुरू हुई मुहिम, आज 100 से ज्यादा युवा है साथ, नैनीताल को खूबसूरत बनाने हर हफ्ते निकलती है ‘क्लीन नैनीताल’ की टीम

एक युवक से शुरू हुई मुहिम, आज 100 से ज्यादा युवा है साथ, नैनीताल को खूबसूरत बनाने हर हफ्ते निकलती है ‘क्लीन नैनीताल’ की टीम


नैनीताल: झील, पहाड़ और प्राकृतिक खूबसूरती के लिए देश-दुनिया में पहचान रखने वाले उत्तराखंड के खूबसूरत शहर, नैनीताल को साफ और सुंदर बनाए रखने के लिए  युवाओं ने एक अनूठी मुहिम शुरू की है. युवा आशु निगम की ओर से शुरू की गई ‘क्लीन नैनीताल’ पहल अब एक सामूहिक अभियान का रूप ले चुकी है. कभी अकेले शुरू हुई यह मुहिम आज 100 से अधिक युवाओं और स्थानीय लोगों को अपने साथ जोड़ चुकी है. अभियान के तहत हर सप्ताह शहर के अलग-अलग हिस्सों के साथ ट्रैकिंग रूट और प्राकृतिक स्थलों पर सफाई अभियान चलाया जा रहा है.

टीम के फाउंडर मेंबर आशु निगम बताते हैं कि ‘क्लीन नैनीताल’ की शुरुआत 1 मार्च 2026 को हुई थी. शुरुआत में उन्होंने खुद 21 दिनों का चैलेंज लिया था. इस दौरान वह नैनीताल झील और आसपास के इलाकों में खुद कूड़ा उठाते थे और सफाई की वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते थे. उनका उद्देश्य सिर्फ कचरा हटाना नहीं, बल्कि लोगों को यह दिखाना भी था कि शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी केवल सरकारी विभागों की नहीं है, बल्कि हम सबकी है. धीरे-धीरे उनकी पहल को लोगों का समर्थन मिलने लगा और युवा इस मुहिम से जुड़ते चले गए.

80 से ज्यादा क्लीन ड्राइव, 12000 किलो से अधिक कचरा एकत्र

आशु निगम के मुताबिक, पिछले सात महीनों में शहर के अलग अलग हिस्सों में 80 से अधिक क्लीन ड्राइव आयोजित की जा चुकी हैं. इन अभियानों में झील के किनारे, बाजार, सार्वजनिक स्थानों, ट्रैकिंग रूट और पर्यटक स्थलों से बड़ी मात्रा में कूड़ा एकत्र किया गया. टीम का दावा है कि अब तक चलाए गए अभियानों में प्रत्येक ड्राइव में 150 किलो से ज्यादा कचरा एकत्र किया जाता है. आशु बताते हैं कि उन्हें पहाड़ों में ट्रैकिंग करना पसंद है. ट्रैकिंग के दौरान उन्होंने कई खूबसूरत और अपेक्षाकृत दुर्गम इलाकों में प्लास्टिक की बोतलें, चिप्स के पैकेट, खाने-पीने की सामग्री के रैपर और शराब की कांच की बोतलें बिखरी देखीं. कई जगहों पर कचरा इस कदर फैला था कि प्राकृतिक सुंदरता प्रभावित हो रही थी. इसके बाद उन्होंने सफाई के साथ लोगों को जागरूक करने का फैसला लिया.

‘सिर्फ सफाई नहीं, सोच बदलना भी जरूरी’

इस अभियान से पिछले करीब पांच महीनों से जुड़ी निहारिका का कहना है कि पहाड़ों की खूबसूरत जगहों पर पहुंचने वाले लोग अक्सर अपने साथ ले जाया गया कचरा वापस नहीं लाते. उनके मुताबिक, पहले उन्हें भी लगता था कि पहाड़ों में कूड़ा फैलाने की मुख्य वजह पर्यटक हैं, लेकिन सफाई अभियानों के दौरान कई जगह स्थानीय लोगों द्वारा फेंका गया कचरा भी सामने आया. निहारिका कहती हैं कि ट्रैकिंग रूट पर कांच की बोतलें तोड़कर छोड़ना खासतौर पर खतरनाक है. इससे दूसरे लोगों और वन्यजीवों को भी नुकसान का खतरा रहता है. टीम ऐसे स्थानों से कचरा हटाने के साथ लोगों को यह संदेश भी दे रही है कि कचरा साथ ले जाएं, पहाड़ों को साफ रखें.

सोशल मीडिया से जुड़ रहे युवा

‘क्लीन नैनीताल’ अभियान की खास बात यह है कि इसमें Gen Z युवाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है. सोशल मीडिया पर सफाई अभियानों की तस्वीरें और वीडियो साझा किए जाने के बाद कई युवा स्वयं टीम से संपर्क कर अभियान का हिस्सा बन रहे हैं. निहारिका के मुताबिक, नैनीताल को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी केवल बाहर से आने वाले पर्यटकों की नहीं है. स्थानीय लोगों को भी अपनी भूमिका समझनी होगी. उनका कहना है कि शहर की खूबसूरती को बचाने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा. अभियान का लक्ष्य आने वाले समय में क्लीन ड्राइव को और व्यापक स्तर तक ले जाना है. टीम सफाई के साथ पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता पर भी काम करना चाहती है.

संस्था के अनुसार, नगर पालिका नैनीताल की ओर से भी अभियान को सहयोग दिया जा रहा है. एक युवक के अकेले शुरू किए गए 21 दिन के चैलेंज से शुरू हुई यह पहल अब 100 से ज्यादा लोगों की सामूहिक मुहिम बन चुकी है. ‘क्लीन नैनीताल’ की कोशिश यह संदेश देने की है कि पहाड़ों की खूबसूरती केवल देखने की चीज नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित रखना भी वहां के नागरिकों की उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी है.



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