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Dehradun News: देहरादून के गढ़ी कैंट में 68 साल की जसोदा जी अपने संघर्ष और स्वाद से हर किसी का दिल जीत रही हैं. पति के असमय निधन के बाद उन्होंने हार मानने के बजाय ठेले की कमान संभाली और बीते तीन दशकों से अपनी लज़ीज़ ‘बन टिक्की’ के ज़रिये बच्चों की परवरिश और पढ़ाई पूरी कराई. तवे पर सिकती कुरकुरी टिक्की और ख़ास चटपटी चटनी का यह ज़ायका डाकरा बाज़ार में ख़ूब मशहूर है. ढलती उम्र में आत्मनिर्भरता की यह कहानी सभी महिलाओं के लिए एक बड़ी मिसाल है.
देहरादून: हौसलों के आगे उम्र और मुश्किलें भी घुटने टेक देती हैं. परिवार पर जब दुखों का पहाड़ टूटा और सिर से पति का साया उठा, तो आंसुओं को अपनी ताकत बनाकर देहरादून की जसोदा जी ने वो कर दिखाया जो मिसाल बन गया. 68 साल की उम्र में जब लोग आराम की जिंदगी चुनते हैं, उस ढलती उम्र में भी वे गढ़ी कैंट की गलियों में अपने हाथों के ज़ायके और मेहनत की खुशबू बिखेर रही हैं. ऐसी ही एक कहानी है देहरादून की जसोदा की.
आमतौर पर देखा जाता है कि 60 साल की उम्र के बाद लोग काम से थक कर आराम करते हैं, लेकिन जसोदा 68 साल की उम्र में भी अपना बिज़नेस चला रही हैं. एक बुज़ुर्ग महिला, जो तीन दशकों से ज़्यादा समय से देहरादून की ऑथेंटिक बन टिक्की का स्वाद लोगों को परोसने का काम कर रही है और उन महिलाओं के लिए भी मिसाल पेश कर रही हैं जो ज़िंदगी के संघर्षों से डर जाती हैं. पति के देहांत के बाद उन्होंने अपने इसी बिज़नेस से बच्चों की पढ़ाई और परवरिश की.
घूमने आएं तो जरूर चखें स्वाद
देहरादून के कैंट क्षेत्र में जब आप मशहूर टपकेश्वर महादेव मंदिर या रॉबर्स केव की सैर के लिए निकलें, तो जरूर स्वाद चखें. जसोदा ने बताया कि वह इसी क्षेत्र में रहती हैं. उनके पति ठेले पर टिक्की बनाने का काम करते थे, लेकिन अचानक उनका देहांत हो गया और बच्चों के साथ वह अकेली पड़ गईं. इसके बाद उन्होंने इस बिज़नेस को चलाया.
गली में महकती है बन टिक्की की खुशबू
68 साल की उम्र में जसोदा जी अपने छोटे से ठेले पर पूरे समर्पण और आत्मीयता के साथ गरमा-गरम ‘बन टिक्की’ परोसती नज़र आती हैं. तवे पर सिकती कुरकुरी टिक्की, ताज़ा बन और साथ में परोसी जाने वाली ख़ास इमली, लच्छेदार प्याज़ और ज़ीरे की चटपटी चटनी का संगम स्वाद प्रेमियों को बरबस अपनी ओर खींच लेता है. जब भी आपका देहरादून आना हो, तो इस सादे मगर बेमिसाल ज़ायके का आनंद लेना बिल्कुल न भूलें. गढ़ी कैंट के डाकरा बाज़ार में आप शाम को इसका स्वाद ले सकते हैं. 35 रुपए में दो करारी टिक्की के साथ बन दिए जाते हैं.