अखिलेश यादव का राज्यसभा चुनाव में ‘धनराज परिमल नथवानी’ दांव नया नहीं, सपा का 34 साल का रिकॉर्ड खुद चीख-चीख कर गवाही दे रहा

अखिलेश यादव का राज्यसभा चुनाव में ‘धनराज परिमल नथवानी’ दांव नया नहीं, सपा का 34 साल का रिकॉर्ड खुद चीख-चीख कर गवाही दे रहा


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Dhanraj Parimal Nathwani Samajwadi Party Rajya Sabha: उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय सिर्फ एक ही नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है- धनराज परिमल नथवानी. समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने यूपी की राज्यसभा सीटों के चुनाव के लिए अचानक एक ऐसे नाम की घोषणा की जो बहुत लोगों के लिए हैरानी भरा था. सपा ने इस बार गुजरात के धनराज परिमल नथवानी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है. इससे पहले उम्मीदवारों को लेकर तमाम नामों की अटकलें लगाई जा रही थीं. अब जब धनराज परिमल नथवानी ने राज्यसभा चुनाव के लिए सपा की तरफ से अपना नामांकन कर दिया है तो हैरान होने की बात नहीं है. इसकी पीछे की वजह है सपा का सियासी रिवाज. जबसे पार्टी बनी है, तबसे सपा इस तरह के दांव लगाती रही है. जानते हैं सपा का 34 साल का रिकॉर्ड.

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यूपी से बाहर के चेहरों पर सपा का भरोसा नया नहीं! धनराज नाथवानी से पहले इन नामों को मिल चुका है राज्यसभा टिकट.

Dhanraj Parimal Nathwani Rajya Sabha candidate:उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय राज्यसभा चुनाव को लेकर जबरदस्त हलचल मची हुई है. समाजवादी पार्टी (सपा) ने गुजरात के रहने वाले कॉरपोरेट दिग्गज धनराज परिमल नथवानी को यूपी से अपना राज्यसभा उम्मीदवार बना दिया है. इस फैसले के बाद बहुत सारी चर्चाओं ने जन्म ले लिया है. कई लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि यूपी के कोटे पर किसी बाहरी चेहरे को क्यों चुना गया? इसका जवाब बहुत आसान है. अगर साल 1992 में जब से सपा पार्टी की स्थापना हुई तबसे करीब 34 साल का रिकॉर्ड खंगालेंगे, तो इतिहास चीख-चीख कर गवाही दे रहा है कि अखिलेश यादव का यह कदम कोई इत्तेफाक या नया प्रयोग नहीं है.

दिल्ली के सत्ता गलियारों में मजबूत लॉबिंग, अदालती मोर्चों पर ताकत और कॉरपोरेट नेटवर्किंग को बनाए रखने के लिए यूपी के बाहर के रसूखदारों को तरजीह देना समाजवादी पार्टी का दशकों पुराना राजनीतिक रिवाज रहा है. तो बिना देर किए आइए देखते हैं सपा के इतिहास के वो बड़े ‘बाहरी’ चेहरे, जो यूपी से नहीं थे, लेकिन सपा के कोटे से राज्यसभा सदन में पहुंचे हैं. देखें लिस्ट.

  1. जया बच्चन:- मध्य प्रदेश में जन्म, मुंबई कर्मभूमि, यूपी से राज्यसभा: जया बच्चन का जन्म जबलपुर, मध्य प्रदेश में हुआ था. उन्होंने भोपाल और पुणे में पढ़ाई की और उनकी सार्वजनिक पहचान मुख्य रूप से मुंबई के फिल्म जगत से बनी. राज्यसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में उनका स्थायी पता भी जुहू, मुंबई, महाराष्ट्र दर्ज है. सपा ने उन्हें पहली बार 2004 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजा. इसके बाद 2006, 2012 और 2018 में भी वह सपा के जरिए यूपी से राज्यसभा पहुंचीं. 2024 में वह पांचवीं बार राज्यसभा सदस्य बनीं.
  2. किरणमय नंदा:- पश्चिम बंगाल की राजनीति से यूपी की राज्यसभा तक: किरणमय नंदा की राजनीतिक पहचान पश्चिम बंगाल से रही. वह पश्चिम बंगाल विधानसभा के सदस्य रहे और राज्य सरकार में मंत्री भी रहे. बाद में समाजवादी पार्टी से जुड़े और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बने. 2012 में सपा ने उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजा. उनका कार्यकाल 3 अप्रैल 2012 से 2 अप्रैल 2018 तक रहा. यानी उनकी राजनीतिक कर्मभूमि पश्चिम बंगाल थी, लेकिन संसद के उच्च सदन में वह यूपी का प्रतिनिधित्व करने पहुंचे.
  3. मुन्नवर सलीम:- मध्य प्रदेश के विदिशा से यूपी की राज्यसभा तक: मुन्नवर सलीम का संबंध विदिशा, मध्य प्रदेश से था. वह मध्य प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे और सपा की मध्य प्रदेश इकाई से भी जुड़े थे. 2012 में सपा ने उन्हें जया बच्चन और किरणमय नंदा के साथ उत्तर प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार बनाया. तीनों सपा उम्मीदवार चुनाव जीतकर राज्यसभा पहुंचे.
  4. संजय डालमिया: कारोबारी पृष्ठभूमि से सपा के राज्यसभा सांसद- उद्योगपति संजय डालमिया का नाम भी सपा के पुराने राज्यसभा इतिहास में आता है. 1994 में वह सपा के टिकट पर उत्तर प्रदेश से राज्यसभा पहुंचे. उन्हें यूपी की राजनीति के पारंपरिक नेता के बजाय कारोबारी पृष्ठभूमि वाले चेहरे के तौर पर देखा जाता था. इसलिए धनराज नाथवानी के संदर्भ में उनका नाम भी महत्वपूर्ण हो जाता है.
  5. अबू आसिम आजमी: आजमगढ़ में जन्म, राजनीतिक कर्मभूमि महाराष्ट्र- अबू आसिम आजमी का जन्म आजमगढ़, उत्तर प्रदेश में हुआ था, लेकिन उनकी राजनीतिक पहचान मुख्य रूप से मुंबई और महाराष्ट्र से बनी. वह महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं में रहे और महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य भी बने. इससे पहले 2002 में सपा ने उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजा था. यानी यूपी से जन्म का रिश्ता था, लेकिन उनकी सक्रिय राजनीतिक कर्मभूमि महाराष्ट्र रही.
  6. अमर सिंह: आजमगढ़ में जन्म, कोलकाता से पढ़ाई, राष्ट्रीय कारोबारी-सियासी पहचान- अमर सिंह का जन्म आजमगढ़, उत्तर प्रदेश में हुआ था. उनकी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा कोलकाता में हुआ. बाद में उनका कारोबारी और सार्वजनिक जीवन यूपी तक सीमित नहीं रहा. वह समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बने और 1996 में सपा के टिकट पर यूपी से राज्यसभा पहुंचे. 2002 में भी उनका राज्यसभा कार्यकाल शुरू हुआ. इसलिए अमर सिंह उस श्रेणी में आते हैं जहां यूपी से जन्म का रिश्ता था, लेकिन सार्वजनिक जीवन का दायरा यूपी से बाहर भी काफी बड़ा था.
  7. कपिल सिब्बल: दिल्ली में जन्म, कांग्रेस के बड़े नेता, सपा समर्थित निर्दलीय- कपिल सिब्बल का मामला अलग है. उनका जन्म जालंधर, पंजाब में हुआ था और उनकी राजनीतिक पहचान लंबे समय तक दिल्ली की राजनीति और राष्ट्रीय स्तर की कांग्रेस राजनीति से रही. 2022 में कांग्रेस छोड़ने के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा चुनाव लड़ा. अखिलेश यादव की सपा ने उनका समर्थन किया. इसलिए उन्हें “सपा के टिकट पर भेजा गया” कहना सही नहीं होगा.



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