हॉर्मुज खुला तो भारत को मिलेगा डबल फायदा, LPG सिलेंडर वाले तो हो जाएंगे खुश
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स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खुलने पर भारत को डबल फायदा मिल सकता है. अभी इस रास्ते से तेल और गैस लाने में डर, जहाज का किराया और बीमा सब महंगा पड़ रहा है. इसका पैसा आखिरकार तेल खरीदने वाली कंपनियों को ही देना पड़ता है. हॉर्मुज खुला तो खाड़ी से तेल लाना आसान हो सकता है. जहाजों का किराया घट सकता है. बीमा का खर्च कम हो सकता है. कतर से LNG भी आसानी से आ सकती है. यानी भारत को एक साथ तेल, गैस और ढुलाई तीनों मोर्चों पर राहत मिल सकती है.
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज फिर से खुलता है तो भारत को इसका सीधा फायदा मिल सकता है. बात सिर्फ कच्चे तेल की नहीं है. तेल को भारत तक लाने में अभी जहाज का किराया और बीमा भी महंगा हो गया है. ऊपर से खाड़ी से मिलने वाला तेल भी महंगा पड़ रहा है. ऐसे में हॉर्मुज का रास्ता सामान्य हुआ तो भारत को एक साथ कई तरफ से राहत मिल सकती है. तेल की खरीद सस्ती हो सकती है. जहाज का खर्च घट सकता है. गैस लाने की परेशानी भी कम हो सकती है.
भारत अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी कच्चा तेल बाहर से खरीदता है. खाड़ी के देश इसमें बड़ा हिस्सा देते हैं. इराक, सऊदी अरब और UAE भारत के बड़े तेल सप्लायर हैं. लेकिन अभी दिक्कत यह है कि हॉर्मुज को लेकर डर बना हुआ है. इससे तेल की खरीद और उसे भारत तक लाने का खर्च बढ़ गया है. अगस्त में भारत ने UAE से करीब 6.20 लाख बैरल रोज तेल खरीदा. सऊदी से करीब 3.28 लाख बैरल और इराक से करीब 1.71 लाख बैरल रोज तेल आया. अगर हॉर्मुज पूरी तरह सामान्य होता है तो इन देशों से तेल लाने का रास्ता आसान होगा. इससे भारतीय रिफाइनरों को बड़ी राहत मिल सकती है.
यहां असली खेल सिर्फ तेल की कीमत का नहीं है. तेल खरीदने के बाद उसे जहाज में भरकर भारत लाना पड़ता है. यही खर्च अभी बढ़ गया है. खाड़ी के सप्लायर तेल पर ज्यादा प्रीमियम मांग रहे हैं. ऊपर से जहाज का किराया भी बढ़ा है. यानी एक बैरल तेल की कीमत बढ़ने के साथ उसे भारत तक पहुंचाने का खर्च भी बढ़ रहा है. हॉर्मुज खुला तो जहाजों को लेकर खतरा कम होगा. इससे टैंकर कंपनियां भी कम जोखिम के साथ काम कर सकेंगी. नतीजा यह हो सकता है कि जहाज का किराया नीचे आए. बीमा का खर्च भी घटे. यानी भारत को तेल खरीदने और भारत तक लाने, दोनों जगह फायदा हो सकता है.
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भारत ने पिछले कुछ साल में रूस से बड़ी मात्रा में सस्ता तेल खरीदा है. इससे रिफाइनरों को फायदा मिला. लेकिन अब रूस से आने वाले तेल पर भी दबाव है. अगस्त में भारत ने रूस से करीब 21 लाख बैरल रोज कच्चा तेल खरीदा. सितंबर में यह घटकर करीब 17.5 लाख बैरल रोज रहने का अनुमान है. ऐसे में भारतीय कंपनियां फिर खाड़ी के देशों की तरफ देख रही हैं. अगर हॉर्मुज खुल जाता है तो सऊदी, UAE और इराक से तेल की सप्लाई बढ़ाना आसान होगा. यानी रूस से कम तेल आया तो उसकी भरपाई करने के लिए भारत के पास खाड़ी का बड़ा रास्ता खुला रहेगा.
हॉर्मुज का मामला सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है. भारत बड़ी मात्रा में LNG यानी प्राकृतिक गैस भी बाहर से खरीदता है. भारत के लिए कतर इसमें बहुत बड़ा सप्लायर है. वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 2.7 करोड़ टन LNG आयात की थी. इसमें करीब 1.12 करोड़ टन कतर से आया. यानी भारत की कुल LNG खरीद का करीब 41 फीसदी हिस्सा कतर से आया. कतर की LNG भारत तक पहुंचाने में हॉर्मुज का रास्ता बेहद अहम है. रास्ता सामान्य रहा तो भारत को कतर से गैस लाने में आसानी होगी. महंगे दूसरे देशों के LNG कार्गो पर निर्भरता भी कम हो सकती है.
अब एक और खर्च समझिए. तेल भारत तक जहाज से आता है. संकट बढ़ा तो जहाज मालिक ज्यादा पैसा मांगते हैं. वजह साफ है. जोखिम ज्यादा है. हाल के दिनों में बड़े तेल टैंकरों का किराया काफी ऊपर गया है. कुछ मामलों में यह कई गुना बढ़ गया. इसके साथ जहाज का बीमा भी महंगा हुआ है. हॉर्मुज खुलने पर अगर जहाजों का डर कम होता है तो किराया भी नीचे आ सकता है. बीमा कंपनियां भी कम जोखिम के हिसाब से प्रीमियम तय कर सकती हैं. इसका सीधा फायदा भारतीय तेल कंपनियों को मिलेगा. उन्हें एक बैरल तेल भारत तक लाने में कम पैसा खर्च करना पड़ेगा.
हॉर्मुज खुला तो क्या पेट्रोल और डीजल तुरंत सस्ता हो जाएगा? ऐसा जरूरी नहीं है. भारत में पेट्रोल-डीजल का दाम सिर्फ कच्चे तेल से तय नहीं होता. इसमें टैक्स है. रिफाइनिंग का खर्च है. रुपये और डॉलर का भाव है. तेल कंपनियों का खर्च भी है. इसलिए हॉर्मुज खुलने के अगले दिन पेट्रोल-डीजल के दाम गिर जाएं, ऐसा कहना सही नहीं होगा. लेकिन अगर तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत और जहाज का खर्च लंबे समय तक नीचे रहता है तो तेल कंपनियों की लागत जरूर कम होगी. उसके बाद देखना होगा कि इसका कितना फायदा आम ग्राहक तक पहुंचता है.
भारत ने पिछले कुछ समय में तेल खरीदने के मामले में एक और काम किया है. उसने किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय कई देशों से तेल खरीदना शुरू किया है. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक भारत अब 41 देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है. पहले यह संख्या 27 थी. यानी अगर किसी एक रास्ते या देश से सप्लाई में दिक्कत आती है तो भारत के पास दूसरे विकल्प मौजूद हैं. यही वजह है कि हॉर्मुज खुलने का फायदा भारत को सिर्फ तेल की कमी से बचाने के रूप में नहीं मिलेगा. इससे तेल खरीदने की कीमत, जहाज का किराया, बीमा और LNG की लागत में भी राहत मिल सकती है.