पितृ पक्ष में इन 5 वस्तुओं का दान माना जाता है खास, जानें धार्मिक मान्यताएं
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Shraddh Paksha 2026: श्राद्ध पक्ष में दान का उद्देश्य केवल धार्मिक पुण्य प्राप्त करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना और पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त करना भी है. इस पक्ष में हर व्यक्ति को अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार कुछ वस्तुओं का दान जरूर करना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं में इस दौरान किए गए दान को विशेष पुण्यकारी बताया गया है.
श्राद्ध पक्ष को हिंदू धर्म में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का महत्वपूर्ण समय माना जाता है. इस दौरान लोग अपने पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध पक्ष में जरूरतमंदों को भोजन कराने और सामर्थ्य के अनुसार उपयोगी वस्तुओं का दान करने से पितरों की तृप्ति होती है. यही वजह है कि इन दिनों मंदिरों, तीर्थ स्थलों और घरों में दान-पुण्य की गतिविधियां बढ़ जाती हैं.
ज्योतिषी पं. मनीष उपाध्याय के अनुसार श्राद्ध पक्ष में दान का उद्देश्य केवल धार्मिक पुण्य प्राप्त करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना और पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त करना भी है. उनका कहना है कि व्यक्ति को अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार ही दान करना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं में इस दौरान किए गए दान को विशेष पुण्यकारी बताया गया है.
श्राद्ध पक्ष में गरीब, जरूरतमंद और ब्राह्मणों को भोजन कराना महत्वपूर्ण माना जाता है. इसके अलावा चावल, नमक, घी और अन्य खाद्य सामग्री का दान करने की भी परंपरा है. मान्यता है कि अन्न का दान करने से पितरों की तृप्ति होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. कई लोग इस अवसर पर जरूरतमंद परिवारों को राशन सामग्री भी उपलब्ध कराते हैं.
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध पक्ष में वस्त्र, पुस्तकें तथा जरूरत की अन्य वस्तुओं का दान भी शुभ माना जाता है. सामर्थ्य रखने वाले लोग सोना-चांदी जैसी वस्तुओं का दान भी करते हैं. वहीं सामान्य परिवार अपनी क्षमता के अनुसार कपड़े, अनाज, भोजन या दैनिक उपयोग की वस्तुएं जरूरतमंदों को देकर इस परंपरा में सहभागी बन सकते हैं.
श्राद्ध पक्ष में कन्याओं को भोजन कराने की भी धार्मिक परंपरा है. इसके साथ ही गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना तथा उनकी आवश्यकताओं के अनुसार मदद करना पुण्यकारी माना जाता है. आचार्य उपाध्याय के मुताबिक, दान में सबसे महत्वपूर्ण भावना और श्रद्धा है, इसलिए दिखावे के बजाय सामर्थ्य के अनुसार सेवा करनी चाहिए.
पं मनीष उपाध्याय के बताते हैं कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध पक्ष में श्रद्धापूर्वक किए गए तर्पण, श्राद्ध और दान से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इस अवधि को केवल कर्मकांड तक सीमित न मानकर पूर्वजों को याद करने, उनका सम्मान करने और जरूरतमंदों की मदद करने के अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है.