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Who is Mullah Afroz : जामा मस्जिद सर्वे के विरोध में हुई हिंसा के मास्टरमाइंड शारिक साठा के गुर्गे मुल्ला अफरोज को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. उसके खिलाफ लगाए गए एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम) को हटा दिया गया है. क्या अब अफरोज जेल से बाहर आ जाएगा?
मुल्ला अफरोज. (फाइल फोटो)
संभल : उत्तर प्रदेश के संभल में हम आए दिन कोई न कोई विवाद सुन ही लेते हैं. मगर साल 2024 में भड़की हिंसा कोई नहीं भुला सकता. उस समय कई लोग घायल हुए थे. यहां तक कि चार लोगों की जान चली गई थी. अब आप सोच रहे होंगे कि हम दो साल पुरानी हिंसा के बारे में क्यों बात कर रहे हैं. दरअसल, इस हिंसा का मास्टरमाइंड कहे जाने वाले मुल्ला अफरोज को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है. उस पर लगे एनएसए को ही हटाने का फरमान सुना दिया. यहां तक कि यूपी सरकार पर तो 10 लाख का जुर्माना तक लगा दिया. अब ये मुल्ला अफरोज है कौन… आइए जानते हैं.
यह है मामला
24 नवंबर 2024 को संभल में जामा मस्जिद के सर्वे के विरोध में हिंसा भड़क गई थी. इसमें 4 लोगों की मृत्यु हो गई, जबकि 30 से अधिक अधिकारी व पुलिसकर्मी घायल हो गए थे. इस मामले में 37 लोगों को नामजद करते हुए 3750 अज्ञात के खिलाफ सात मुकदमे दर्ज किए थे. 19 जनवरी को मुल्ला अफरोज सहित 10 उपद्रवी को पुलिस ने गिरफ्तार किया था. पुलिस ने इस मामले में अप्रैल 2025 में चार्जशीट दाखिल की थी. पुलिस की ओर से अफरोज को हिंसा और हथियारों से जुड़े मामले में आरोपी बताया गया था. उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत का आदेश जारी किया गया. आदेश 13 अक्टूबर 2025 को हुआ और बाद में राज्य सरकार ने इसे मंजूरी दी.
इसके बाद अफरोज ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. सुप्रीम कोर्ट ने दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. अब अदालत ने एनएसए के तहत मुल्ला अफरोज की निरोधात्मक हिरासत रद्द कर दी. कोर्ट ने कहा कि केवल पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे को आधार बनाकर किसी व्यक्ति को NSA के तहत हिरासत में नहीं रखा जा सकता. साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख का जुर्माना भी लगाया.
कौन है अफरोज?
मुल्ला अफरोज प्रापर्टी डीलर के साथ शारिक साठा के लिए काम करता था. उसके इशारे पर दिल्ली, एनसीआर से लग्जरी गाड़ियां चोरी कर बंगाल, असम के साथ नेपाल तक भेजता था. पूछताछ में अफरोज ने खुद बताया था कि हिंसा के पीछे वर्षों से पुलिस के लिए चुनौती बना साठा है. उसने अपने गुर्गों को हथियार मुहैया कराकर हिंसा कराई थी.
अफरोज 2012 से दुबई में छिपे साठा के संपर्क में था. उसके कहने पर चोरी के वाहनों और हथियारों की सप्लाई करता था. हिंसा में मारे गए बिलाल और अयान को उसने ही गोली मारी थी. उससे पास से 32 बोर की पिस्टल, तीन कारतूस और 15 खोखे मिले थे. उसकी हिंसा के पीछे मंशा थी कि 10-20 पुलिस व पब्लिक के लोग मरते, तो पुलिस वाले सस्पेंड होते. फिर वह आगे सक्रिय नहीं रह पाते और शाकिर साठा का दबदबा हो जाता. साठा से वह मोबाइल एप के जरिए बात करता था. इस क्रम में जेल में बंद मुल्ला अफराेज के खिलाफ एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम) के तहत कार्रवाई हुई थी. मगर, अब सुप्रीम कोर्ट ने एनएसए रद्द कर दी है. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला NSA की हिरासत को अवैध ठहराने से जुड़ा हुआ है. इसका मतलब यह नहीं है कि अदालत ने उसे संभल हिंसा के मूल आपराधिक आरोपों से बरी कर दिया है.