इंटरनेट पर इस वक्त यूट्यूबर अभिनव रेड्डी और एक रशियन बोलने वाली लड़की की कहानी खूब वायरल हो रही है. ये कहानी ऋषिकेश से शुरू होकर बेलारूस के एक छोटे से गांव तक पहुंच जाती है. ऋषिकेश में अभिनव की मुलाकात मारिया नाम की एक लड़की हुई थी, दोनों की दोस्ती हुई और मरिया ने खुशकर उन्हें अपने गांव आने का न्योता दे डाला. ट्विस्ट ये था कि ये ऐसा गांव था जहां टूरिट्स ना के बराबर आते थे. बस फिर क्या था, अभिनव तुरंत अपना झोला लेकर पहुंच गए मरिया के गांव और वहां उन्होंने जो कुछ देखा, उनकी आंखें फटी रह गईं.
ऋषिकेश की एक मुलाकात ने कैसे बदल दी यूट्यूबर की किस्मत?
यूरोप में कई ऐसे बेहद खूबसूरत देश और छोटे-छोटे गांव छिपे हुए हैं, जहां आम तौर पर पर्यटक नाममात्र के लिए जाते हैं. बेलारूस भी एक ऐसा ही देश है. वैसे तो ये देश रूस का बहुत करीबी पड़ोसी है, लेकिन यहां विदेशियों की आवाजाही काफी कम ही देखने को मिलती है.
लेकिन ट्रेवल यूट्यूबर अभिनव रेड्डी की जिंदगी में असली मोड़ तब आया, जब वो भारत के मशहूर शहर ऋषिकेश की वादियों में घूम रहे थे. वहां अचानक उनकी मुलाकात मारिया नाम की लड़की से हुई. दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ और धीरे-धीरे एक अच्छी दोस्ती हो गई. मारिया ने अभिनव से कहा मेरे गांव भी जरूर आना. अभिनव ने भी बिना एक पल गंवाए इस सुनहरे मौके को लपक लिया और बैग पैक करके सीधे बेलारूस पहुंच गए! वहां पहुंचकर वो मारिया के परिवार के साथ पूरे 7 दिन तक रहे और यूरोप के गांव की जिंदगी को जिया.
जब बेलारूस के स्कूल में देसी कुर्ते में पहुंचे अभिनव!
अभिनव के इस पूरे बेलारूस दौरे का सबसे प्यारा और दिल को छू लेने वाला पल तब आया, जब मारिया उन्हें अपने पुराने स्कूल ले गई. यहां अभिनव जीन्स या टी-शर्ट जैसे आम पश्चिमी कपड़ों में नहीं गए थे, बल्कि वो अपना पारंपरिक भारतीय कुर्ता पहनकर पहुंचे थे. सोचिए, बेलारूस के एक गांव के स्कूल में जब भारतीय कुर्ते में कोई इंसान कदम रखता है, तो माहौल कैसा होगा!
जैसे ही अभिनव स्कूल के गेट से अंदर दाखिल हुए तो वहां के छोटे-छोटे बच्चे और स्कूल के शिक्षक उन्हें बड़ी हैरानी से देखने लगे. अभिनव ने बहुत प्यार से सभी बच्चों को भारतीय संस्कृति के बारे में बताना शुरू किया. उन्होंने बच्चों और टीचर्स को दोनों हाथ जोड़कर ‘नमस्ते’ कहना सिखाया. जब बेलारूस के उन मासूम बच्चों ने अपनी नन्हीं हथेलियों को जोड़कर बेहद प्यार से ‘नमस्ते’ कहा, तो पूरा माहौल भारतमय हो गया. इस छोटे से सांस्कृतिक आदान-प्रदान ने वहां मौजूद हर शख्स के दिल में भारत और भारतीय संस्कृति के लिए एक खास जगह बना दी.
गांव की पगडंडियां, खेतों में चलाया हल और लिया ‘बान्या’ का मजा!
अभिनव का ये बेलारूस का दौरा सिर्फ आम पर्यटकों की तरह घूमने-फिरने या फोटो खिंचवाने तक सीमित नहीं था. उन्होंने बेलारूस के उस गांव की असली जिंदगी को बहुत करीब से जिया. उन्होंने गांव की शांत गलियों और पगडंडियों पर पैदल सैर की, वहां के स्थानीय लोगों से मुलाकात की और उनके साथ समय बिताया. इतना ही नहीं, वो खेतों में उतर गए और अपने हाथों से हल भी चलाया! मिट्टी से जुड़ा ये ठेठ देसी अनुभव अभिनव के लिए बेहद अनोखा और यादगार बन गया.
इस सफर के दौरान अभिनव ने एक और बेहद खास चीज का अनुभव किया, जिसे वहां ‘बान्या’ कहा जाता है. बान्या असल में रूस और उसके आसपास के इलाकों का एक बेहद पुराना और पारंपरिक स्टीम बाथ यानी भाप वाला स्नान होता है. इसमें लकड़ी के चूल्हे को जलाकर बहुत तेज गर्मी और नमी पैदा की जाती है, जिससे शरीर को आराम मिलता है. सबसे हैरानी और कमाल की बात तो ये थी कि जिस बान्या का मजा अभिनव ने लिया, उसे मारिया के पिता ने खुद अपने हाथों से बनाया था! गांव की इस सादगी, प्यार और अनोखे अनुभव से अभिनव इतने ज्यादा प्रभावित हुए कि उन्होंने कह दिया, ‘ये देश अब मेरा सबसे पसंदीदा देश बन गया है’.
‘यहां तो भाषा का फर्क ही मिट गया’- बेलारूस के लोगों का अपनापन!
गांव के माहौल और वहां के लोगों के रहन-सहन के बारे में बात करते हुए अभिनव ने अपने दिल की बात शेयर की. उन्होंने बताया कि बेलारूस का ये गांव सिर्फ रहने की कोई आम जगह नहीं है, बल्कि ये एक बहुत ही खास और आपस में जुड़ा हुआ समाज यानी कम्युनिटी है. यहां के लोग किसी एक बड़े परिवार की तरह रहते हैं.