Patna ADM Ravindra Kumar Diwakar Story: कभी थे सरकारी टीचर, BPSC पास कर बने ADM, अब घर से मिलीं नोटों की गड्डियां

Patna ADM Ravindra Kumar Diwakar Story: कभी थे सरकारी टीचर, BPSC पास कर बने ADM, अब घर से मिलीं नोटों की गड्डियां


Patna ADM Ravindra Kumar Diwakar: पटना के अपर समाहर्ता यानी ADM (आपूर्ति) रवींद्र कुमार दिवाकर इस समय काफी चर्चा में हैं.उन पर विजिलेंस की टीम ने छापेमारी की है जिसके बाद वह सुर्खियों में हैं.निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Surveillance Investigation Bureau) ने रवींद्र कुमार दिवाकर और उनकी पत्नी कुमारी स्वीटी से जुड़े पटना और बेगूसराय के कई ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली. यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के मामले में दर्ज केस के आधार पर की गई.कुमारी स्वीटी दानापुर की जिला अवर निबंधक यानी सब-रजिस्ट्रार हैं.रवींद्र कुमार दिवाकर की ज्ञात आय और संपत्ति के बीच करीब 1 करोड़ 6 लाख 85 हजार 900 रुपये की ऐसी संपत्ति सामने आई जिसे आय से अधिक माना गया. तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी, महंगी घड़ियां, आभूषण और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई है.आइए जानते हैं कौन हैं रवींद्र कुमार दिवाकर, कहां के रहने वाले हैं, उन्होंने कब BPSC पास की और ADM तक कैसे पहुंचे..

बेगूसराय से हैं रवींद्र कुमार दिवाकर

रवींद्र कुमार दिवाकर का संबंध बेगूसराय बिहार से बताया जाता है.उनके पैतृक आवास पर भी 28 सितंबर को विजिलेंस की टीम ने तलाशी ली.रिपोर्टों के मुताबिक बेगूसराय शहर के पोखरिया इलाके में स्थित उनके पैतृक आवास पर टीम पहुंची और वहां भी नकदी,आभूषण तथा अन्य दस्तावेजों की जांच की गई.उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार उनका जन्म 25 जून 1975 को हुआ था.स्थानीय स्तर पर उन्हें कवि और साहित्यकार के तौर पर भी जाना जाता था.इसके बाद उन्होंने सरकारी नौकरी का रास्ता चुना और वर्ष 2000 में सरकारी शिक्षक के रूप में काम शुरू किया यानी उनका करियर सीधे प्रशासनिक सेवा से शुरू नहीं हुआ था.वह पहले शिक्षक बने और फिर बिहार प्रशासनिक सेवा तक पहुंचे.

वर्ष 2000 में बने थे सरकारी टीचर

रवींद्र कुमार दिवाकर ने वर्ष 2000 में सरकारी शिक्षक के रूप में नौकरी शुरू की थी. एक तरफ वह शिक्षक के रूप में काम कर रहे थे वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक सेवा में जाने की तैयारी भी जारी रखी.
कुछ साल बाद उनके करियर ने नया मोड़ लिया.वर्ष 2009 में वह सारण जिले में जिला जनसंपर्क पदाधिकारी यानी DPRO के पद पर रहे.इसके बाद प्रशासनिक सेवा में उनका सफर आगे बढ़ता गया.

2011 में BPSC पास कर बने BAS के अधिकारी

रवींद्र कुमार दिवाकर ने BPSC यानी बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की और वर्ष 2011 में बिहार प्रशासनिक सेवा (BAS/बिप्रसे) में अधिकारी बने.प्रशासनिक सेवा में आने के बाद उनकी पोस्टिंग बिहार के अलग-अलग जिलों में होती रही.उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया और धीरे-धीरे प्रशासनिक जिम्मेदारियां बढ़ती गईं.वह कटिहार, दरभंगा, सहरसा, समस्तीपुर, गया और पटना आदि जगहों पर तैनात रहे.

2009 में बने DPRO

रवींद्र कुमार दिवाकर की उपलब्ध पोस्टिंग टाइमलाइन पर नजर डालें तो 2009 में सारण के DPRO के बाद वह 2010-11 में कटिहार में सहायक उप समाहर्ता/वरीय उप समाहर्ता स्तर की जिम्मेदारी में रहे.इसके बाद 2014 में दरभंगा, 2018 में सहरसा और 2020 में समस्तीपुर में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं. वर्ष 2018 में वह सहरसा में लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी (PGRO) रहे, जबकि 2020 में उन्हें समस्तीपुर का SDM बनाया गया.इसके बाद वर्ष 2023 में गया और 2024 में पटना में उनकी पोस्टिंग रही.पटना में शुरुआत में उन्होंने वरीय उप समाहर्ता/ADC स्तर की जिम्मेदारी संभाली और इसके बाद अक्टूबर 2025 से उन्हें पटना ADM (आपूर्ति) की जिम्मेदारी मिली.

कब बने पटना के ADM?

रवींद्र कुमार दिवाकर अक्टूबर 2025 से पटना जिले के ADM (Supply) के पद पर कार्यरत बताए जा रहे हैं.इससे पहले वर्ष 2024 में वह पटना में वरीय उप समाहर्ता/ADC के पद पर थे.आपूर्ति से जुड़े ADM के तौर पर उनकी जिम्मेदारियों में जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली और आपूर्ति से जुड़े प्रशासनिक काम शामिल होते हैं.इसी पद पर रहते हुए अब वह विजिलेंस की आय से अधिक संपत्ति की जांच के कारण चर्चा में हैं.

पत्नी भी प्रशासनिक सेवा में, दानापुर में सब-रजिस्ट्रार

रवींद्र कुमार दिवाकर की पत्नी कुमारी स्वीटी भी सरकारी अधिकारी हैं.वह बिहार निबंधन सेवा में हैं और वर्तमान में दानापुर की जिला अवर निबंधक यानी सब-रजिस्ट्रार के पद पर तैनात बताई गई हैं. उनका भी बिहार के अलग-अलग रजिस्ट्री कार्यालयों में पदस्थापन रहा है.उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उन्होंने 2013 से 2017 तक तेघड़ा अवर निबंधन कार्यालय, 2017 से 2021 तक हवेली खड़गपुर और 2021 से 2024 तक सकरा अवर निबंधन कार्यालय में सेवा दी.इसके बाद उनकी तैनाती दानापुर अवर निबंधन कार्यालय में हुई.इसी अधिकारी दंपती के ठिकानों पर अब निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में तलाशी ली है.

क्यों हुई विजिलेंस की कार्रवाई?

विजिलेंस की जांच का आधार आय से अधिक संपत्ति यानी Disproportionate Assets (DA) का मामला है. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार शुरुआती जांच में रवींद्र कुमार दिवाकर की ज्ञात आय और संपत्ति के बीच करीब 1,06,85,900 रुपये की ऐसी संपत्ति का पता चला जिसे आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक माना गया.इसके बाद निगरानी थाना में केस नंबर 113/26 दर्ज किया गया. प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जांच एजेंसी ने अदालत से तलाशी वारंट हासिल किया और 28 सितंबर को पटना और बेगूसराय के अलग-अलग परिसरों में एक साथ तलाशी शुरू की.यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि आय से अधिक संपत्ति का मामला अभी जांच के स्तर पर है.बरामद संपत्ति या दस्तावेजों का जांच के बाद मूल्यांकन होगा और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी.

पटना से करीब 70 लाख

विजिलेंस की कार्रवाई के दौरान अलग-अलग रिपोर्टों में नकदी की मात्रा को लेकर अलग आंकड़े सामने आए हैं.ताजा रिपोर्टों के मुताबिक पटना स्थित परिसर से करीब 70 लाख रुपये नकद मिलने की जानकारी है.वहीं बेगूसराय स्थित पैतृक आवास से करीब 9 लाख रुपये नकद मिलने की भी रिपोर्ट है. एक अन्य रिपोर्ट में तलाशी के दौरान करीब 79 लाख रुपये की कुल नकदी बरामद होने की बात कही गई है.नोटों की संख्या अधिक होने के कारण उनकी गिनती के लिए मशीन का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी भी सामने आई है.

48 महंगी घड़ियां भी मिलीं

तलाशी के दौरान करीब 48 घड़ियां मिलने की जानकारी सामने आई है.कुछ रिपोर्टों में इन घड़ियों की अनुमानित कीमत करीब 6 लाख रुपये बताई गई है. इसके अलावा सोने-चांदी के आभूषण और जमीन-जायदाद से जुड़े दस्तावेज भी मिलने की जानकारी है. इन सभी सामान और दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है.

शिक्षक से ADM तक पहुंचने का पूरा सफर

रवींद्र कुमार दिवाकर की कहानी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उनका सरकारी करियर एक शिक्षक के तौर पर शुरू हुआ था. वर्ष 2000 में सरकारी शिक्षक की नौकरी से शुरुआत करने के बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा की परीक्षा पास की और 2011 में बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी बने.इसके बाद सारण में DPRO से लेकर कटिहार, दरभंगा, सहरसा, समस्तीपुर और गया में अलग-अलग प्रशासनिक पदों पर काम किया. वर्ष 2024 में पटना पहुंचे और अक्टूबर 2025 में पटना के ADM (आपूर्ति) की जिम्मेदारी संभाली.अब करीब ढाई दशक के सरकारी करियर के बाद उनका नाम आय से अधिक संपत्ति की जांच से जुड़ा है हालांकि इस मामले में जांच अभी जारी है और विजिलेंस द्वारा बरामद संपत्ति, नकदी, आभूषण और दस्तावेजों का अंतिम मूल्यांकन होना बाकी है.



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