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Surguja: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में कौवों की संख्या लगातार घट रही है, जिससे पितृ पक्ष जैसे अवसरों पर उनकी अनुपस्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है. स्थानीय निवासी सलीमा मिंज के अनुसार पेड़ों की कटाई और कीटनाशकों का ज्यादा इस्तेमाल इसके प्रमुख कारण हैं.
Crow Numbers Falling: छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर में कौवों की संख्या में कमी देखी जा रही है. एक विशेषज्ञ ने इस कमी के पीछे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और खेती में कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल को मुख्य कारण बताया है. यह स्थिति पितृ पक्ष जैसे अवसरों पर कौवों की अनुपस्थिति को लेकर चिंता बढ़ा रही है.
कौवों की घटती संख्या
स्थानीय निवासी सलीमा मिंज ने बताया कि पहले गांव और आसपास के इलाकों में कौवे हर जगह दिखाई देते थे, लेकिन अब उनकी संख्या बहुत कम हो गई है. कई जगहों पर तो वे गिनती भर के रह गए हैं. उन्होंने इस बदलाव को पर्यावरण में हो रहे परिवर्तनों का संकेत बताया.
पेड़ों की कटाई मुख्य कारण
सलीमा मिंज के अनुसार, कौवों की संख्या में कमी का एक बड़ा कारण पेड़ों की लगातार कटाई है. उन्होंने बताया कि पहले बड़ी संख्या में पेड़ और जंगल थे, जो पक्षियों के लिए प्राकृतिक आवास थे. पेड़ों की कटाई से पक्षियों के रहने और भोजन तलाशने के स्थान कम हो गए हैं.
कीटनाशकों का बढ़ता उपयोग
खेती और सब्जियों की पैदावार बढ़ाने के लिए रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल पर भी चिंता जताई गई है. सलीमा मिंज का कहना है कि इन रसायनों का असर पर्यावरण और पक्षियों तक पहुंच सकता है. उन्होंने यह भी दावा किया कि इससे कौवों के प्रजनन पर असर पड़ने की संभावना है, जिससे उनकी संख्या में गिरावट आ रही है.
जैविक खेती और संरक्षण की अपील
कौवों और अन्य पक्षियों को बचाने के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाने की अपील की गई है. साथ ही, खेती में जैविक तरीकों को अपनाने और कम हानिकारक कीटनाशकों के विकल्प इस्तेमाल करने की बात कही गई है. सलीमा मिंज के मुताबिक, पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करना भी उनकी मौजूदगी बनाए रखने में सहायक हो सकता है.