जिस अमेरिका को भारत माल बेचता था, अब वहीं बना रहा फैक्ट्री, Essar का ₹1.6 लाख करोड़ का दांव क्या बताता है

जिस अमेरिका को भारत माल बेचता था, अब वहीं बना रहा फैक्ट्री, Essar का ₹1.6 लाख करोड़ का दांव क्या बताता है


करीब 20 साल पहले चीन की कंपनियां अमेरिका में पहुंच बना रही थीं. वहां की कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदना और बड़े कारोबारों को खरीदना उस दौर की एक बड़ी स्ट्रैटजी थी. इसके जरिए चीनी कंपनियों को अमेरिकी बाजार, ब्रांड और तकनीक तक पहुंच मिली. लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. भारत की कंपनियां अमेरिका में कारोबार खरीदने के बजाय वहां नई फैक्ट्रियां और प्रोडक्शन कैपेसिटी खड़ी कर रही हैं.

इस बदलाव की बड़ी मिसाल Essar Group का अमेरिका में करीब 18 अरब डॉलर यानी लगभग ₹1.6 लाख करोड़ का निवेश है. इस रकम का बड़ा हिस्सा आयोवा में स्टील प्लांट लगाने पर खर्च होगा. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 28 सितंबर को व्हाइट हाउस में इस निवेश की जानकारी दी है. Essar की अमेरिकी कंपनी Mesabi Metallics सिर्फ प्लांट नहीं लगाएगी. वह Minnesota की खदान से आयोवा की स्टील फैक्ट्री तक पूरी सप्लाई चेन तैयार करेगी. यानी भारत की कंपनी अमेरिकी जमीन पर कच्चे माल से लेकर तैयार स्टील तक का कारोबार खड़ा कर रही है.

चीन से अलग है भारत का तरीका

करीब दो दशक पहले चीन की कंपनियों ने अमेरिकी बाजार में अपनी जगह बनाने के लिए अधिग्रहण का रास्ता अपनाया था. अमेरिकी कंपनियों को खरीदकर या उनमें हिस्सेदारी लेकर उन्होंने वहां पहले से मौजूद कारोबार और नेटवर्क तक पहुंच बनाई. अब भारतीय कंपनियों की स्ट्रैटजी में एक अलग तस्वीर दिख रही है. वे अमेरिका में सीधे पैसा लगाकर नई प्रोडक्शन कैपेसिटी बना रही हैं.

इसका मतलब यह नहीं कि भारत और चीन की सभी कंपनियों ने एक ही स्टैटजी अपनाई है. लेकिन दोनों दौर की तुलना से एक बदलाव साफ दिखता है. भारतीय कंपनियां अब सिर्फ भारत में प्रोडक्शन करके अमेरिका को सामान बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहतीं. वे अमेरिकी बाजार के अंदर ही प्रोडक्शन का आधार तैयार कर रही हैं.

आयोवा में बनेगा 1 करोड़ टन क्षमता वाला स्टील प्लांट

Essar Group आयोवा में करीब 15 अरब डॉलर का स्टील प्लांट लगाने जा रहा है. पूरी तरह तैयार होने के बाद यहां हर साल करीब 1 करोड़ टन स्टील बनाने की योजना है. कंपनी ने 2030 से प्रोडक्शन शुरू करने का टारगेट रखा है. इस प्रोजेक्ट से निर्माण के दौरान हजारों लोगों को काम मिलने की उम्मीद है. स्टील और माइनिंग ऑपरेशन में करीब 2,000 स्थायी नौकरियां भी पैदा हो सकती हैं. ट्रंप ने इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा स्टील प्लांट बताया है. प्लांट में आधुनिक तकनीक इस्तेमाल करने की योजना है. Essar के मुताबिक इसका मुकाबला दुनिया के बड़े स्टील प्लांट्स से करने की तैयारी है.

Minnesota की खदान से आएगा कच्चा माल

दूसरा बड़ा निवेश Minnesota की Mesabi Iron Range में आयरन-ओर माइन विकसित करने पर होगा. इस खदान से सालाना करीब 7.5 मिलियन टन आयरन-ओर का उत्पादन होने की उम्मीद है. कंपनी इस प्रोजेक्ट में करीब 2.5 अरब डॉलर का निवेश कर चुकी है. इस खदान से हर साल करीब 75 लाख टन आयरन प्रोडक्शन का टागरेट है. इससे करीब 350 नौकरियां बनने की उम्मीद है.

यानी आयोवा में बनने वाला स्टील प्लांट अकेला प्रोजेक्ट नहीं है. Minnesota से लौह अयस्क निकलेगा और फिर उसे आयोवा ले जाकर स्टील तैयार किया जाएगा. कंपनी इसे ‘माइन-टू-मिल’ सप्लाई चेन के तौर पर विकसित कर रही है. यानी कच्चा माल अमेरिका में निकलेगा, वहीं प्रोसेस होगा और वहीं तैयार स्टील बनेगा. पूरी वैल्यू चेन एक ही देश में रखने की कोशिश की गई है.

टैरिफ ने बढ़ाई अमेरिका में प्रोडक्शन की जरूरत

Essar का यह निवेश ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिकी सरकार घरेलू मैन्युफैक्चरिंग पर जोर दे रही है. स्टील पर लगाए गए टैरिफ भी कंपनियों के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं. ट्रंप ने Essar के निवेश को अमेरिकी टैरिफ नीति से जोड़ा. उनका कहना था कि कंपनियां अमेरिका में प्रोडक्शन बढ़ा रही हैं ताकि उन्हें आयात पर टैरिफ का सामना न करना पड़े. Mesabi Metallics के चेयरमैन Rewant Ruia ने इस प्रोजेक्ट को अपने लिए ‘होमकमिंग’ बताया. उनका जन्म भारत में हुआ था, लेकिन उन्होंने अमेरिका में पढ़ाई की और अपने जीवन का बड़ा हिस्सा वहां बिताया.

Essar का यह निवेश इसलिए खास है क्योंकि यह सिर्फ एक फैक्ट्री लगाने की कहानी नहीं है. करीब दो दशक पहले चीन की कंपनियां अमेरिकी कारोबार खरीदकर वहां अपनी जगह बना रही थीं. अब भारतीय कंपनियां अमेरिका में पूंजी लगाकर नया कारोबार और प्रोडक्शन कैपेसिटी खड़ी कर रही हैं. Essar का ₹1.6 लाख करोड़ का प्रोजेक्ट इसी बदलती स्ट्रैटजी की एक बड़ी मिसाल है.



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