घर पर बनाओ घन जीवामृत और जीवामृत, डीएपी और यूरिया का देसी तोड़
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Make Organic Fertilizer At Home: रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते दाम, उपलब्धता में आ रही परेशानी और इनके बहुत ज्यादा इस्तेमाल से होने वाले दुष्प्रभावों को लेकर किसान चिंतित हैं. वहीं, रासायनिक खाद के इस्तेमाल से उत्पादित अनाज और सब्जियों पर पड़ने वाले संभावित प्रतिकूल प्रभावों को लेकर भी लोगों में जागरूकता बढ़ रही है. ऐसे में कई किसान अब प्राकृतिक खेती की ओर रुख कर रहे हैं. हालांकि, सही जानकारी और तकनीकी मार्गदर्शन के अभाव में प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को अपेक्षित उत्पादन हासिल करने में परेशानी हो रही है.
इसी को ध्यान में रखते हुए बिक्रमगंज कृषि विज्ञान केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डॉ. रमाकांत सिंह ने किसानों को घर पर ही जैविक खाद तैयार करने के सरल तरीके बताए हैं. डॉ. सिंह के अनुसार, जैविक खादों के संतुलित और उचित इस्तेमाल से रासायनिक उर्वरकों की तुलना में लगभग समान उत्पादन पाया जा सकता है. इसके लिए किसान घर पर उपलब्ध गोबर, गोमूत्र, गुड़ और बेसन जैसी सामग्री का इस्तेमाल कर सकते हैं.
डॉ. रमाकांत सिंह ने बताया कि जैविक खाद में घन जीवामृत काफी उपयोगी है. इसे तैयार करने के लिए 100 किलो गाय का गोबर, 2 किलो गुड़, 2 किलो बेसन और 20 लीटर गोमूत्र की आवश्यकता होती है. इसे तैयार करने के लिए सबसे पहले गोबर को लगभग एक मीटर क्षेत्र में फैला दिया जाता है. इसके बाद गुड़, बेसन और गोमूत्र को मिलाकर घोल तैयार किया जाता है और उसका गोबर पर छिड़काव किया जाता है.
इसके बाद इसे धीरे-धीरे सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है. करीब तीन दिन बाद घन जीवामृत तैयार हो जाता है. इसे किसान करीब एक साल तक सुरक्षित रखकर इस्तेमाल कर सकते हैं. इसका प्रयोग फसल की बुआई से पहले खेत में डीएपी की तरह किया जा सकता है. धूप कम हुई तो सूखने में अधिक समय लग सकता है.
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डॉ. सिंह ने बताया कि खेतों में यूरिया के विकल्प के तौर पर जीवामृत का प्रयोग किया जा सकता है. इसे तैयार करने के लिए 200 लीटर क्षमता के ड्रम में 20 लीटर गोमूत्र, 2 किलो गुड़, 2 किलो बेसन, 5 किलो गोबर और रसायन मुक्त भूमि से ली गई करीब 1 किलो मिट्टी मिलाई जाती है. इसके बाद इसमें पानी डालकर मिश्रण तैयार किया जाता है.
मिश्रण को डंडे की मदद से अच्छी तरह एंटी-क्लॉकवाइज यानी उल्टी दिशा में घुमाया जाता है. करीब तीन दिन बाद जीवामृत तैयार हो जाता है. डॉ. सिंह के अनुसार, बेहतर परिणाम के लिए तैयार जीवामृत का इस्तेमाल छह दिनों के भीतर कर लेना चाहिए.
इसे खेतों में हर हफ्ते इस्तेमाल करने से बेहतर परिणाम मिलता है. उन्होंने बताया कि किसान फसल की जरूरत के अनुसार जीवामृत का 5-6 बार, हर सप्ताह अपने खेतों में प्रयोग कर सकते हैं. इससे प्राकृतिक खेती में बेहतर परिणाम मिलने की संभावना रहती है.