क्‍यों शरीर के ल‍िए इतना जरूरी है फैट? स‍िर्फ दुश्‍मन नहीं है ये, जानें बॉडी के ‘सीक्रेट एजेंट’ के बारे में

क्‍यों शरीर के ल‍िए इतना जरूरी है फैट? स‍िर्फ दुश्‍मन नहीं है ये, जानें बॉडी के ‘सीक्रेट एजेंट’ के बारे में


जब भी वजन घटाने की या खुद को शेप में लाने की बात होती है, सबसे पहला ध्‍यान जाता है डाइट पर. डाइट कंट्रोल में सबसे पहले खाने से फैट हटाने की कवायद शुरू कर दी जाती है. अक्‍सर आपने सुना होगा कि फैट शरीर की सेहत के ल‍िए क‍ितना बुरा है. बाजार में तो लो-फैट डाइट और लो-फैट प्रोडक्ट्स की बाढ़ ही आ चुकी है. ‘जीरो-फ‍िगर’ का ट्रेंड यूं तो पुराना हो गया है, लेकिन अभी तक फीका नहीं पड़ा है. यंग टीनेजर्स तक खुद को ‘लीन’ द‍िखाने के ल‍िए अपनी डाइट से फैट को गायब कर रहे हैं. लेकिन क्‍या आप जानते हैं, ज‍िस फैट को अपने ‘दुश्‍मन’ करार दे द‍िया है, वो हमारी सेहत से लेकर हमारे शरीर के ल‍िए क‍ितना जरूरी है?

बीबीसी की ताजा र‍िपोर्ट बताती है कि दुनियाभर में मोटापा जहां एक बड़ी समस्‍या है, वहीं दूसरी तरफ बहुत ज्‍यादा पतला होना भी ट्रेंड बनता जा रहा है. च‍िंता वाली बात ये है कि बाजार में आईं ‘मोटापा कंट्रोल करने की दवाओं’ का भी इस्‍तेमाल इस तरह के ट्रेंड में ज्‍यादा इस्‍तेमाल हो रहा है. शरीर में बहुत ज्‍यादा फैट का होना कई बीमार‍ियों को दावत देता है. लेकिन शरीर से फैट यानी वसा पूरी तरह से कम कर देना आपके शरीर के ल‍िए खतरनाक साब‍ित हो सकता है. इस र‍िपोर्ट में मिशिगन यूनिवर्सिटी की एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और मेडिसिन प्रोफेसर एलिफ़ ओरल कहती हैं, ‘हमें अपने शरीर के फैट से प्यार करना चाहिए. यह शरीर में बहुत ज़रूरी जैविक काम करती है.’

शरीर के ल‍िए क्‍यों इतना जरूरी है फैट?

फैट 2 तरह का होता है, डाइटरी फैट और बॉडी फैट. डाइटरी फैट वो है, जो हम हमारे भोजन में खाते हैं जैसे तेल-घी वगैरह. बॉडी फैट यानी शरीर में स्‍टोर वो एनर्जी ज‍िसका हम इस्‍तेमाल नहीं करते. जब हम भोजन करते हैं तो हमारे खाने में जो भी फैट, प्रोटीन या कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं, शरीर में वो स‍िंपल ब‍िल्‍ड‍िंग ब्‍लॉक्‍स में तब्‍दील हो जाते हैं जो हमें एनर्जी देते हैं. इसमें कार्बोहाइड्रेट्स ग्‍लूकोस बन जाते हैं, प्रोटीन अमीनो एस‍िड बनते हैं और फैट्स फैटी एसिड बनते हैं. अगर आप रोजमर्रा में अपने शरीर की जरूरत से ज्‍यादा कैलोरी लेते रहते हैं, तो जो फैट सेल्‍स होती हैं, वो शरीर में एक्‍स्‍ट्रा न्‍यूट्र‍िएंट्स को ‘ल‍िपिड्स’ के तौर पर स्‍टोर कर लेती हैं. जैसे-जैसे ये स्‍टोरेज बढ़ता जाता है, फैट सेल्‍स बढ़ती हैं और मोटापा भी.

दुनियाभर में मोटापा जहां एक बड़ी समस्‍या है, वहीं दूसरी तरफ बहुत ज्‍यादा पतला होना भी ट्रेंड बनता जा रहा है.

लेकिन हमारे शरीर का ये बॉडी फैट स‍िर्फ ‘पड़ा’ नहीं रहता, बल्‍कि हमारी बॉडी के कई कामों को कंट्रोल करता है. स्वीडन के कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट में फैट टिश्यू रिसर्च के प्रोफेसर मिकाएल राइडेन कहते हैं कि हम अपनी बॉडी फैट को एक खास स्टोरेज तिजोरी की तरह सोच सकते हैं. जब शरीर में ऊर्जा ज्यादा होती है तो यह पोषक तत्व जमा कर लेती है, और जरूरत पड़ने पर ही उन्हें छोड़ती है. दरअसल ये स‍िस्‍टम हमारे शरीर के तब सबसे ज्‍यादा काम आता था, जब मानव श‍िकार पर अपना जीवन गुजारता था. आज के समय में जब हमारे शरीर को हमारे भोजन से जरूरी न्‍यूट्रिएंट्स नहीं म‍िलते तो शरीर इसी वसा को तोड़कर एनर्जी बनाता है. शरीर में जमा इस फैट से हमें कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन से दुगनी एनर्जी म‍िलती है.

वसा का दूसरा सबसे जरूरी काम हार्मोन बनाने का है. फैट सेल्स हार्मोन बनाते हैं, जो शरीर के बाकी हिस्सों को बताते हैं कि हमारे पास कितनी ऊर्जा है और हम कितने भरे हुए हैं. इनमें सबसे ज्यादा अध्ययन किया गया हार्मोन है लेप्टिन. एलिफ़ ओरल बताती हैं, “लेप्टिन दिमाग को बताता है कि ऊर्जा का भंडार पर्याप्त है, फिर दिमाग लगभग आराम कर सकता है.” इससे शरीर प्रजनन और संक्रमण से लड़ने जैसे जरूरी जैविक कामों पर ध्यान दे पाता है. लेप्टिन न हो तो दिमाग ऊर्जा की कमी को लेकर चिंतित हो जाता है और जरूरी कामों को पीछे धकेलने लगता है.

बॉड़ी फैट का एक और जरूरी काम है शरीर को गर्म रखना. बॉडी में वाइट सेल्‍स एक्‍स्‍ट्रा एनर्जी को जमा करती हैं और शरीर में इंसुलेशन की एक परत की तरह काम करती हैं. जबकि ब्राउन फैट सेल्‍स वो हैं, जो उर्जा को जलाकर गर्मी पैदा करती हैं. इससे शररी का तापमान बना रहता है.

शरीर में क‍ितना फैट है जरूरी?

जैसे शरीर में ज्‍यादा फैट या मोटापा कई बीमार‍ियों की वजह है, वैसे ही शरीर में कम फैट भी मुसीबत का सबब बन सकता है. शरीर में अगर फैट बहुत कम हो जाता है, तो ये स्‍वास्‍थ्‍य और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य दोनों को प्रभावित कर सकता है. शरीर में बॉडी फैट की कमी हार्मोन और शरीर की प्रजनन शक्‍ति को भी प्रभावित करता है. जबकि पुरुषों में ये टेस्टोस्टेरोन लेवल के ब‍िगड़ने का कारण बन सकता है. कई महिला एथलीट्स, ज‍िनके शरीर में बॉडी फैट बहुत ही कम हो जाता है, उनके पीरियड्स या तो अनियम‍ित हो जाते हैं, या अचानक रुक जाते हैं.

शरीर का ये बॉडी फैट स‍िर्फ ‘पड़ा’ नहीं रहता, बल्‍कि हमारी बॉडी के कई कामों को कंट्रोल करता है.

स्‍टडीज बताती हैं कि मीड‍ियम उम्र या बुढ़ापे में थोड़ा अतिरिक्त वजन होना गंभीर बीमारी के दौरान जीवित रहने की संभावना बढ़ाता है. जैसे मोटापे से ग्रस्त लोगों को हार्ट ड‍िजीज होने का खतरा ज्यादा होता है, लेकिन उसी बीमारी से ग्रस्त पतले लोगों की तुलना में उनकी मृत्यु होने की संभावना कम होती है. इसे “ओबेसिटी पैराडॉक्स” (मोटापे का विरोधाभास) कहा जाता है. म‍िशिगन यूनिवर्सिटी की र‍िसर्चर एलिफ़ ओरल के अनुसार, वसा का एक कुशन शरीर को गंभीर हृदय संबंधी घटनाओं, स्ट्रोक और अन्य तीव्र बीमारियों को सहने में मदद करता है.

शरीर में क‍ितना हेल्‍दी फैट होना चाहिए इसका कोई वैश्‍विक स्‍तर पर पैमाना नहीं है. लेकिन एक्‍सपर्ट्स कहते हैं कि एक स्‍वस्‍थ्‍य पुरुष में 10-20% बॉडी फैट होना चाहिए. जबकि एक स्‍वस्‍थ्‍य महिला में 20-29% बॉडी फैट होना चाहिए.



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