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उज्जैन में शाही मस्जिद को तोड़े जाने को लेकर विवाद गहरा गया है. मस्जिद हटाने की कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों ने पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) पर पथराव कर दिया. हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े. पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर स्थिति को नियंत्रित करने में जुटी हुई है.
शाही मस्जिद पर विवाद हो रहा है.
उज्जैन में शाही मस्जिद तोड़ने को लेकर गहरा विवाद हो गया है. मस्जिद तोड़ने के दौरान स्थानीय लोगों ने पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स पर पथराव कर दिया. इसकी जवाब की कार्रवाई में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोडे़ हैं. स्थिति को कंट्रोल करने में लगी हुई है. यहां हम आपको मस्जिद की महाकाल मंदिर से दूरी और इसकी खासियत के बारे में बताने जा रहे हैं.
शाही मस्जिद की महाकाल मंदिर से 1-2 किलोमीटर की दूरी पर है. अगर आप पैदल जाते हैं, तो एक 1.2 किलोमीटर का दूरी है. वहीं, कार या बाइक से जाते हैं, तो 2.3 किलोमीटर की दूरी पड़ती है. पैदल 17 मिनट में इस मस्जिद तक पहुंच जाएंगे.शाही मस्जिद का इतिहास बहुत पुराना है. यह मस्जिद 636 साल पहले तारीख 1390 में बनी थी. ग्वालियर गवर्नमेंट का पत्र भी 1925 लिखा हुआ है. उस वक्त जब जरूरत पड़ी थी मस्जिद ने अपना 8 फीट हिस्सी दिया था.
गूगल मैप पर दिखाई गई दूरी. (फोटो साभारः गूगल मैप)
शाही मस्जिद की क्या है खासियत? जानिए 10 बड़ी बातें
1. महाकाल मंदिर के करीब है मस्जिद
उज्जैन की शाही मस्जिद पुराने शहर के छत्री चौक इलाके में है. यह महाकाल मंदिर के काफी करीब स्थित है. मस्जिद से जुड़ा रास्ता गोपाल मंदिर से महाकाल मंदिर की ओर जाता है. यह रास्ता धार्मिक यात्राओं के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है.
2. करीब 636 साल पुरानी होने का दावा
मस्जिद से जुड़े लोगों के अनुसार, इसका निर्माण 1390 ईस्वी में हुआ था. इस हिसाब यह 636 साल पुरानी है. हालांकि, इस ऐतिहासिक दावे की स्वतंत्र पुष्टि के लिए पुराने दस्तावेजों और विशेषज्ञों की जांच जरूरी है. मौजूदा कोर्ट रिकॉर्ड में मस्जिद पक्ष ने भी इसे प्राचीन ढांचा बताया है.
3. 1925 के दस्तावेज का हवाला
मस्जिद से जुड़े लोग 1925 के एक ग्वालियर सरकार के पत्र का हवाला देते हैं. उनका कहना है कि उस समय भी मस्जिद से जुड़ी जमीन और निर्माण को लेकर सरकारी रिकॉर्ड मौजूद था. इसी दस्तावेज के आधार पर मस्जिद पक्ष अपने पुराने अस्तित्व की बात रखता है.
4. सड़क के लिए जमीन देने का दावा
मस्जिद पक्ष का कहना है कि पुराने समय में सड़क से जुड़े काम के लिए मस्जिद ने अपनी जमीन का कुछ हिस्सा दिया था. उनके अनुसार, करीब 8 फीट जमीन दी गई थी. बाद में जालियां आदि लगाने के दौरान भी कुछ हिस्सा पीछे किया गया. उनका दावा है कि अब तक मस्जिद की ओर से काफी जमीन दी जा चुकी है.
5. ‘सुर्ख लाइन’ का भी जिक्र
मस्जिद से जुड़े लोगों के अनुसार, 1925 के दस्तावेज में एक ‘सुर्ख लाइन’ का जिक्र है. उनका कहना है कि इस लाइन के अंदर मौजूद मस्जिद के हिस्से में बदलाव नहीं करने की बात कही गई थी. इसी दस्तावेज में मीनार और गेट से जुड़ी अनुमति होने का भी दावा किया जाता है.
6. मीनार और गेट की अनुमति का दावा
मस्जिद पक्ष के मुताबिक, पुराने समय में मीनार बनाने की अनुमति दी गई थी. इसका उद्देश्य यह था कि दूर से भी मस्जिद दिखाई दे. अच्छे और सुंदर गेट के निर्माण की बात भी दस्तावेज में होने का दावा किया गया है.
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