Parenting Advice : बच्चा हर बात पर झिझकता है? जानिए उसका डर दूर करने और आत्मविश्वास बढ़ाने के आसान पेरेंटिंग टिप्स

Parenting Advice : बच्चा हर बात पर झिझकता है? जानिए उसका डर दूर करने और आत्मविश्वास बढ़ाने के आसान पेरेंटिंग टिप्स


Parenting Advice : क्या आपका बच्चा भी हर नई बात से कतराता है? स्कूल में नए दोस्तों से बात करने में झिझकता है, स्टेज पर जाने से डरता है या फिर अपनी बात कहने में हिचकिचाता है? अगर आपका जवाब ‘हां’ है, तो आप अकेले नहीं हैं. आज के समय में बहुत से माता-पिता इस बात से परेशान रहते हैं कि उनका बच्चा बहुत संकोची (शर्मीला) है. बच्चों में झिझक या डर होना एक सामान्य बात है, लेकिन अगर इसे समय रहते न संभाला जाए, तो यह उनके भविष्य और आत्मविश्वास पर असर डाल सकता है. आइए जानते हैं कि बच्चों के मन से इस डर को कैसे निकाला जाए और उन्हें कैसे एक आत्मविश्वासी इंसान बनाया जाए.

बच्चों की झिझक के पीछे की असली वजह क्या है?
किसी भी समस्या का समाधान ढूंढने से पहले उसकी जड़ को समझना जरूरी है. बच्चे अचानक से शर्मीले नहीं बन जाते. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. कई बार माता-पिता बच्चों को हर मुश्किल से बचाने के चक्कर में उन्हें खुद फैसले लेने का मौका नहीं देते. इससे बच्चा खुद पर भरोसा करना भूल जाता है.बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से करना उनके आत्मविश्वास को अंदर से तोड़ देता है.  बच्चों के मन में हमेशा यह डर रहता है कि अगर वे गलती करेंगे, तो लोग क्या कहेंगे या माता-पिता गुस्सा करेंगे.यही नहीं, अगर बच्चे के कुछ कहने पर हमेशा उसे डांटा जाए या उसकी बात अनसुनी कर दी जाए, तो वह दोबारा बोलने से डरने लगता है.

आत्मविश्वास बढ़ाने के 5 ‘गोल्डन रूल्स’-

पेरेंटिंग में कुछ छोटे-छोटे बदलाव करके आप अपने बच्चे के भीतर छिपा आत्मविश्वास जगा सकते हैं. अपनाएं ये खास टिप्स:

1. बच्चे की भावनाओं को समझें, मजाक न उड़ाएं
जब आपका बच्चा किसी बात से डरे या झिझके, तो उसकी बात को नजरअंदाज न करें. कई बार माता-पिता कह देते हैं, “इसमें डरने वाली कौन सी बात है?” इससे बच्चे को लगता है कि उसकी भावनाएं अहम नहीं हैं. इसके बजाय, उसकी बात ध्यान से सुनें और कहें, “मैं समझ सकता/सकती हूं कि आपको थोड़ा अजीब लग रहा है, लेकिन हम मिलकर इसका सामना करेंगे.”

2. गलतियों को सीखने का अवसर बनाएं
बच्चों को यह समझाएं कि गलती करना बुरी बात नहीं है. हर महान इंसान गलतियों से सीखकर ही आगे बढ़ता है. जब बच्चा कोई गलती करे, तो उस पर चिल्लाने के बजाय उसे प्यार से समझाएं कि अगली बार इसे बेहतर तरीके से कैसे किया जा सकता है. इससे उसका डर खत्म होगा.

किसी भी समस्या का समाधान ढूंढने से पहले उसकी जड़ को समझना जरूरी है. बच्चे अचानक से शर्मीले नहीं बन जाते. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं:(Canva)

3. घर से बाहर फैसले लेने की आज़ादी दें
बच्चों को बचपन से ही छोटे-छोटे फैसले खुद लेने दें. जैसे-रेस्टोरेंट में अपना खाना खुद ऑर्डर करना, दुकान से कोई सामान लाना या अपनी पसंद के कपड़े चुनना. जब बच्चे छोटे-छोटे मामलों में फैसले लेते हैं, तो उनका खुद पर भरोसा मजबूत होता है.

4. दूसरों के सामने तुलना बिल्कुल न करें
“शर्मा जी के बेटे को देखो, वह कितनी जल्दी सबसे घुल-मिल जाता है!”—ऐसी बातें बच्चों के दिल पर गहरा असर करती हैं. हर बच्चा अपने आप में खास होता है. उसकी तुलना किसी और से करने के बजाय उसके पिछले प्रदर्शन से तुलना करें और उसकी छोटी-छोटी सफलताओं की भी तारीफ करें.

5. सामाजिक मेल-जोल (Social Interaction) को बढ़ावा दें
संकोची बच्चों को धीरे-धीरे समाज से जोड़ें. उन्हें पार्क में अन्य बच्चों के साथ खेलने के लिए प्रोत्साहित करें, परिवार के छोटे-मोटे कार्यक्रमों में उन्हें मेहमानों से बात करने का मौका दें. शुरुआत में वे झिझकेंगे, लेकिन धीरे-धीरे उनका झिझकना कम हो जाएगा.

बच्चे की झिझक रातों-रात दूर नहीं होगी. इसके लिए माता-पिता को बहुत सारा धैर्य और प्यार दिखाने की जरूरत होती है. बच्चे को यह अहसास कराएं कि आप हर कदम पर उसके साथ हैं, चाहे वह जीते या हारे. जब बच्चे को माता-पिता का यह सुरक्षा चक्र मिलता है, तो उसका डर अपने आप छूमंतर हो जाता है और वह एक आत्मविश्वासी व निडर इंसान के रूप में उभरता है.



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