Jodhpur Basni Factory Fire: बासनी केमिकल फैक्ट्री अग्निकांड में 65% झुलसे फायर फाइटर सुरेंद्र की मौत

Jodhpur Basni Factory Fire: बासनी केमिकल फैक्ट्री अग्निकांड में 65% झुलसे फायर फाइटर सुरेंद्र की मौत


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Jodhpur Fire Tragedy: जोधपुर के बासनी इंडस्ट्रियल एरिया स्थित केमिकल फैक्ट्री में हुए अग्निकांड में एक और फायर फाइटर सुरेंद्र की दुखद मौत हो गई है. आग बुझाने के दौरान वे 65% से अधिक झुलस गए थे और महात्मा गांधी अस्पताल की बर्न यूनिट में उनका इलाज चल रहा था. डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन गंभीर हालत के चलते उन्होंने दम तोड़ दिया. अस्पताल अधीक्षक डॉ. फतेह सिंह ने मौत की पुष्टि की. इस घटना से अग्निशमन विभाग में भारी शोक की लहर है.

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Jodhpur Fire Tragedy: बासनी केमिकल फैक्ट्री अग्निकांड में झुलसे फायर फाइटर सुरेंद्र का निधन

Jodhpur: जोधपुर के बासनी औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एक केमिकल फैक्ट्री में लगे भीषण अग्निकांड में एक और दुखद खबर सामने आई है. आग बुझाने के दौरान गंभीर रूप से झुलसे फायर फाइटर सुरेंद्र ने महात्मा गांधी अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया है. इस दुखद घटना ने पूरे अग्निशमन विभाग और शहर को झकझोर कर रख दिया है. सुरेंद्र की शहादत आग से लड़ने वाले उन बहादुर जवानों के जोखिम भरे जीवन को दर्शाती है, जो दूसरों की जान और संपत्ति बचाने के लिए अपनी जान दांव पर लगा देते हैं.

बासनी इंडस्ट्रियल एरिया की केमिकल फैक्ट्री में लगी भयावह आग पर काबू पाने के अभियान में सुरेंद्र अग्रिम मोर्चे पर तैनात थे. इसी दौरान एक बड़ा हादसा हुआ और वह आग की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गए थे. उन्हें तुरंत महात्मा गांधी अस्पताल के विशेष बर्न यूनिट में भर्ती कराया गया था. जानकारी के अनुसार, इस अग्निकांड में सुरेंद्र का शरीर 65 प्रतिशत से अधिक झुलस चुका था, जिससे उनकी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई थी.

डॉक्टरों ने की बचाने की पूरी कोशिश
सुरेंद्र को बचाने के लिए महात्मा गांधी अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम लगातार प्रयासरत थी. उन्हें गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में रखकर हर संभव चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही थी. गंभीर हालत के चलते वह चौबीसों घंटे चिकित्सकों की सघन निगरानी में थे. अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों ने अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन शरीर का बड़ा हिस्सा झुलस जाने के कारण संक्रमण और अन्य जटिलताओं ने उनकी स्थिति को और बिगाड़ दिया. तमाम प्रयासों और दुआओं के बावजूद, जांबाज फायर फाइटर सुरेंद्र को बचाया नहीं जा सका.

अस्पताल अधीक्षक ने की मौत की पुष्टि, विभाग में पसरा सन्नाटा
महात्मा गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. फतेह सिंह ने भारी मन से फायर फाइटर सुरेंद्र के निधन की आधिकारिक पुष्टि की. जैसे ही यह खबर अग्निशमन विभाग तक पहुंची, वहां शोक की लहर दौड़ गई. सुरेंद्र के साथियों और सहकर्मियों की आंखें नम हो गईं. विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सुरेंद्र के अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है. इस हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों और फायर फाइटर्स के लिए उन्नत सुरक्षा उपकरणों की आवश्यकता पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है.



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