Last Updated:
टाटा संस की लिस्टिंग टालने को टाटा समूह ने एक मास्टरस्ट्रोक चला है. टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) ने समूह की दो प्रमुख कंपनियों, टाटा इलेक्ट्रोनिक्स सिस्टम्स साल्यूशंस (TESS) और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (TCE) का सीधे होल्डिंग कंपनी टाटा संस में विलय करने का प्रस्ताव दिया है.
आरबीआई ने टाटा संस को अपर लेयर की एनबीएफसी लिस्ट में रखा है.
नई दिल्ली. टाटा संस की लिस्टिंग टालने को टाटा समूह ने एक मास्टरस्ट्रोक चला है. टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) ने समूह की दो प्रमुख कंपनियों, टाटा इलेक्ट्रोनिक्स सिस्टम्स साल्यूशंस (TESS) और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (TCE) का सीधे होल्डिंग कंपनी टाटा संस में विलय करने का प्रस्ताव दिया है.इसका मकसद टाटा संस को एनबीएफसी और कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के तकनीकी दायरे से बाहर निकालना है, ताकि कंपनी को शेयर बाजार में लिस्ट न कराना पड़े.
भारतीय रिजर्व बैंक ने टाटा संस को अपर-लेयर एनबीएफसी (NBFC-UL) की श्रेणी में रखा हुआ है. ऐसी कंपनियों को तय समयसीमा के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य होता है. हाल ही में आरबीआई ने टाटा संस क की अपनी सीआईसी (CIC) रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी को खारिज कर दिया था. ऐसे में टाटा संस में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स ने समूह की दो सक्रिय ऑपरेटिंग और नॉन-फाइनेंशियल कंपनियों को मिलाकर टाटा संस को शुद्ध वित्तीय होल्डिंग कंपनी के बजाय एक ऑपरेटिंग बिजनेस कंपनी में तब्दील करने का खाका तैयार किया गया है.
आज दिया प्रस्ताव, मंजूरी लेनी होगी
28 सितंबर को टाटा ट्रस्ट्स ने यह प्रस्ताव दिया है. यदि टाटा संस बोर्ड और भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी मिल जाती है तो कंपनी अपनी अनलिस्टेड प्राइवेट कंपनी की स्थिति बरकरार रख सकेगी. टाटा ट्रस्ट्स ने कंपनी के बोर्ड को पत्र लिखकर इस पुनर्गठन पर विचार करने और इसे मंजूरी देने का अनुरोध किया है. साथ ही ट्रस्ट्स ने नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) के लिए आरबीआई के पास आवेदन देने की बात भी कही है.
ये है टाटा ट्रस्ट्स का पूरा प्लान
प्रस्तावित योजना के तहत टाटा संस को तोड़ने या डीमर्जर करने के बजाय कंपनी का आकार बढया जाएगा. इसके तहत दो ऑपरेटिंग और नॉन-फाइनेंशियल कंपनियों यानी टाटा इलेक्ट्रोनिक्स सिस्टम्स साल्यूशंस (TESS) और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (TCE) को टाटा संस में शामिल किया जाएगा. इससे टाटा संस को टाटा ग्रुप की कंपनियों में निवेश से होने वाली आय के अलावा अपने प्रत्यक्ष कारोबार से भी बड़ी मात्रा में ऑपरेटिंग रेवेन्यू प्राप्त होगा. यदि यह विलय 31 मार्च 2026 की स्थिति में देखा जाए, तो संयुक्त इकाई का कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू करीब 1,05,043 करोड़ रुपये बैठता है. इसकी तुलना में समूह कंपनियों के शेयरों व निवेश से होने वाली वित्तीय आय महज 40,072 करोड़ रुपये रह जाएगी.
इस पूरी कवायद का दूसरा मुख्य उद्देश्य टाटा संस को कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) की परिभाषा से भी बाहर निकालना भी है. प्रस्तावित विलय के बाद बनने वाली इकाई की कुल नेट एसेट्स करीब 2,00,158 करोड़ रुपये होंगी. इनमें से 1,77,120 करोड़ रुपये, यानी करीब 88.5 फीसदी टाटा ग्रुप की कंपनियों में निवेश के रूप में होंगे. टाटा ट्रस्ट्स के बयान के अनुसार, यह अनुपात सीआईसी के लिए लागू 90 फीसदी की सीमा से नीचे होगा.
खबर अपडेट हो रही है…