308 टायर वाला Truck ही क्यों? 200 टन के वेसल को लाने के लिए क्यों चुना गया ये महाट्रक, जानें पूरी कहानी

308 टायर वाला Truck ही क्यों? 200 टन के वेसल को लाने के लिए क्यों चुना गया ये महाट्रक, जानें पूरी कहानी


नई द‍िल्‍ली. ओडिशा के पारादीप पोर्ट से उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी स्थित कुंभी यूनिट तक करीब 200 टन वजनी औद्योगिक वेसल लाया जा रहा है. इसे सामान्य ट्रक पर नहीं, बल्कि 308 पहियों वाले मल्टी-एक्सल हाइड्रोलिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है. इसकी वजह सिर्फ ज्यादा पहिए होना नहीं है. असली कहानी वजन को कई एक्सल में बांटने, हाइड्रोलिक सस्पेंशन से संतुलन बनाए रखने और इतने बड़े वेसल को नियंत्रित तरीके से सड़क पर चलाने की है.

308 टायर वाला ट्रक ही क्यों चुना गया?
करीब 200 टन का वेसल एक जगह से दूसरी जगह ले जाना है. इसे अगर कम पहियों वाले ट्रेलर पर रखा जाए तो वजन कम एक्सल पर पड़ेगा. ऐसे में सड़क, पुल और ट्रेलर के अलग-अलग हिस्सों पर ज्यादा भार आ सकता है. मल्टी-एक्सल हाइड्रोलिक ट्रेलर का डिजाइन ही ऐसे भारी और बड़े सामान को ले जाने के लिए होता है. इसमें बड़ी संख्या में एक्सल होते हैं और हाइड्रोलिक सिस्टम की मदद से लोड को संभाला जाता है. भारत सरकार के मॉड्यूलर हाइड्रोलिक ट्रेलर संबंधी नियमों में भी एक्सल लाइन, मॉड्यूल और कई मॉड्यूल को जोड़कर बड़े कॉन्फिगरेशन बनाने की व्यवस्था दी गई है. यानी यहां 308 पहिए दिखावे के लिए नहीं, बल्कि पूरे लोड को ज्यादा संख्या में सपोर्ट पॉइंट पर बांटने के लिए हैं.

308 पहियों का सबसे बड़ा फायदा क्या है?
मान लीजिए आपके पास 200 किलो का वजन है और उसे 4 लोगों को उठाना है. हर व्यक्ति पर औसतन 50 किलो का भार आएगा. अब वही वजन 20 लोग उठाएं तो हर व्यक्ति पर करीब 10 किलो का भार आएगा. ट्रक में भी मूल विचार कुछ ऐसा ही है. एक्सल और पहियों की संख्या बढ़ने से भारी लोड को ज्यादा सपोर्ट पॉइंट पर बांटा जा सकता है. लेकिन असल इंजीनियरिंग सिर्फ वजन बांटने तक सीमित नहीं है. लोड का आकार, उसका वजन कहां केंद्रित है, सड़क की क्षमता, मोड़ और ऊंचाई जैसी चीजें भी देखी जाती हैं.

308 टायर आखिर ट्रक में कहां-कहां लगे हैं?
इस खास 308 पहिया ट्रांसपोर्टर का आधिकारिक एक्सल-वाइज या मॉड्यूल-वाइज ब्रेकअप सार्वजनिक रिपोर्टों में उपलब्ध नहीं है. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि इतने टायर आगे और इतने पीछे हैं. लेकिन इसकी बनावट को समझने के लिए सामान्य मल्टी-एक्सल मॉड्यूलर ट्रेलर को देख सकते हैं. ऐसे ट्रांसपोर्ट सिस्टम में पहिए सिर्फ पीछे के हिस्से में नहीं होते. लंबे लोडिंग प्लेटफॉर्म के नीचे आगे से पीछे तक कई एक्सल लाइन में पहिए फैले होते हैं. इसी वजह से दूर से देखने पर यह एक लंबे प्लेटफॉर्म के नीचे पहियों की कई कतारों जैसा दिखाई देता है. मसलन, एसपीएमटी जैसे मॉड्यूलर ट्रांसपोर्टर में 4, 5, 6 या 8 एक्सल लाइन वाले मॉड्यूल को जरूरत के हिसाब से जोड़ा जा सकता है. मॉड्यूल को आगे-पीछे और अगल-बगल भी जोड़ा जा सकता है.

308 पहियों का मतलब कितने एक्सल?
टायर, पहिया, एक्सल और एक्सल लाइन एक ही चीज नहीं हैं.
– टायर – रबर का हिस्सा
– पहिया/व्हील – टायर और व्हील असेंबली
– एक्सल – जिस पर पहिए लगे होते हैं
– एक्सल लाइन – भारी ट्रांसपोर्ट सिस्टम में एक निर्धारित एक्सल कॉन्फिगरेशन

मॉड्यूलर हाइड्रोलिक ट्रेलरों में अलग-अलग डिजाइन में प्रति एक्सल टायरों की संख्या भी अलग हो सकती है. उदाहरण के लिए गोल्‍डफॉर के कुछ हेवी ड्यूटी मॉड्यूल ट्वीन टायर्स का इस्तेमाल करते हैं और 2 से 8 एक्सल तक के मॉड्यूल उपलब्ध हैं. इसलिए 308 टायर देखकर सीधे यह गणना करना कि इसमें इतने ही एक्सल लाइन हैं सही नहीं होगा जब तक इस खास ट्रांसपोर्टर का तकनीकी कॉन्फिगरेशन सामने न हो.

यह ट्रक कितने हिस्सों में बना होता है?
इसे एक सामान्य भारी-भरकम ट्रक की तरह एक ही बॉडी वाला ट्रक समझना गलती होगी. ऐसे मॉड्यूलर ट्रांसपोर्ट स‍िस्‍टम को मोटे तौर पर इन हिस्सों में समझ सकते हैं:

1. आगे का पावर/टो यूनिट
यह ट्रांसपोर्टर को खींचने या चलाने में मदद करता है. कॉन्फिगरेशन के हिसाब से इसके साथ अलग-अलग टोव‍िंग इंक्‍यूमेंट लगाया जा सकता है.

2. मॉड्यूलर एक्सल यूनिट
यही इस महाट्रक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसमें कई एक्सल और पहियों की कतार होती है.

3. हाइड्रोलिक सिस्टम
यह लोड के नीचे प्लेटफॉर्म की ऊंचाई और सस्पेंशन को नियंत्रित करने में मदद करता है. भारी ट्रांसपोर्ट मॉड्यूल में हाइड्रोलिक एक्‍सल कंपनसेशन भी होता है.

4. लोडिंग प्लेटफॉर्म/डेक
जिसके ऊपर वेसल रखा जाता है. अलग-अलग जरूरत के हिसाब से फ़्लैटबेड, वैसल का डेक और दूसरे प्रकार के डेक लगाए जा सकते हैं.

5. स्टीयरिंग सिस्टम
इतने लंबे और चौड़े वाहन को मोड़ना सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है. मॉड्यूलर ट्रांसपोर्ट सिस्टम में पहियों के स्‍टीयर‍िंग को नियंत्रित किया जा सकता है. एसपीएमटी में तो अलग-अलग दिशाओं में मूवमेंट की क्षमता भी होती है.

6. ब्रेक और कंट्रोल सिस्टम
इतने भारी लोड को रोकने और धीरे-धीरे आगे बढ़ाने के लिए सामान्य ट्रक से कहीं ज्यादा जटिल नियंत्रण व्यवस्था की जरूरत होती है.

क्या सिर्फ वजन के कारण 308 पहिए लगाए गए?
वजन सबसे बड़ा कारण है, लेकिन अकेला कारण नहीं. इसके साथ कई दूसरी चीजें भी देखी जाती हैं:
– वेसल का कुल वजन
– वेसल की लंबाई और चौड़ाई
– वजन का वितरण
– सेंटर ऑफ ग्रैविटी
– सड़क की क्षमता
– पुलों की क्षमता
– मोड़ की जगह
– सड़क की चौड़ाई
– ऊंचाई की बाधाएं
– बिजली के तार और अन्य ढांचे
– ट्रेलर की अपनी लोड क्षमता

यही वजह है कि इस महाट्रक के रास्ते में प्रशासन को भी कई जगह तैयारी करनी पड़ रही है. वाराणसी में तो इसके गुजरने के लिए फुटओवर ब्रिज के हिस्सों को अस्थायी रूप से हटाने की योजना तक सामने आई.

इसकी रफ्तार इतनी कम क्यों है?
यह महाट्रक सामान्य ट्रक की तरह तेज नहीं चल सकता. रिपोर्टों के मुताबिक करीब 200 टन के वेसल को लेकर चल रहा यह ट्रेलर कई जगह प्रतिदिन सिर्फ 10-12 किलोमीटर की दूरी तय कर रहा है. यानी अगर किसी सामान्य ट्रक को कोई दूरी तय करने में कुछ घंटे लगते हैं, तो इस महाट्रक को वही रास्ता तय करने में काफी ज्यादा समय लग सकता है.

रास्ते में: ट्रैफिक रोकना पड़ता है, सड़क के किनारे की बाधाएं देखनी पड़ती हैं, पुलों की जांच करनी पड़ती है, साइनेज हटाने पड़ सकते हैं, जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक रास्ता तैयार करना पड़ता है. चंदौली में बारिश के कारण इसकी रफ्तार रुक गई थी और एक रिंग रोड का पुल भी इसके रास्ते में बाधा बना था.

308 पहियों के अलावा कौन-कौन से विकल्प हो सकते थे?
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इनमें से किसी दूसरे सिस्टम को इस खास वेसल के लिए आधिकारिक विकल्प बताया नहीं गया है. उपलब्ध रिपोर्टों में 308-पहिया सिस्टम चुनने की पूरी तकनीकी तुलना सार्वजनिक नहीं की गई है. लेकिन भारी और ओवरसाइज कार्गो के लिए दुनिया में इस तरह के विकल्प इस्तेमाल होते हैं:



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