10 रुपये, 20 रुपये, 50 रुपये या 100 रुपये या 500 रुपये का नोट हर किसी ने देखा होगा. उस नोट पर महात्मा गांधी मुस्कुराते नजर आते हैं. ज्यादातर लोग यही समझते हैं कि यह कोई कलाकार का बनाया हुआ स्केच या पोर्ट्रेट है. लेकिन सच बहुत अलग है. यह तस्वीर कोई बनावटी नहीं, बल्कि एक असली फोटो का टुकड़ा है. और उस फोटो में गांधीजी अकेले नहीं थे. उनके ठीक बगल में एक अंग्रेज साहब खड़े थे, जिन्हें रिजर्व बैंक ने नोट पर छपने से पहले क्रॉप कर दिया.
कहानी 1946 की है. उस साल दिल्ली के वायसराय हाउस (आज जिसे हम राष्ट्रपति भवन कहते हैं) के बाहर एक फोटो खींची गई थी. फोटो में दो व्यक्ति दिख रहे थे. एक तरफ महात्मा गांधी, दूसरी तरफ ब्रिटिश राजनेता लॉर्ड फ्रेडरिक विलियम पेथिक-लॉरेंस. गांधीजी किसी बात पर मुस्कुरा रहे थे. उनकी मुस्कान इतनी साफ, शांत और दिल को छूने वाली थी कि आज भी वही मुस्कान हमारे नोटों पर छाई हुई है. आरबीआई ने बाद में इसी फोटो को चुना, लेकिन अंग्रेज साहब को हटा दिया. सिर्फ गांधीजी का चेहरा बचाया. और नोट पर जो तस्वीर छपती है, वह असल फोटो का उल्टा यानी मिरर इमेज है. सुशीलकुमार अग्रवाल की किताब Global Collectibles of Mahatma Gandhi Through Banknotes, Coins & Stamps में इस बात का जिक्र है. इस किताब में दुनिया भर के देशों द्वारा गांधीजी पर जारी किए गए नोट, सिक्के और टिकटों की जानकारी दी गई है.
लॉर्ड पेथिक-लॉरेंस कौन थे?
लॉर्ड फ्रेडरिक विलियम पेथिक-लॉरेंस अंग्रेज थे. वे ब्रिटेन में महिलाओं को वोट का अधिकार दिलाने वाले आंदोलन के बड़े नेता रहे. बाद में वे भारत और बर्मा के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट बने. 1946 में वे भारत आए थे. उसी समय वायसराय हाउस के बाहर यह फोटो खींची गई. गांधीजी उस वक्त आजादी की बातचीत में व्यस्त थे. फोटो में उनकी मुस्कान इतनी स्वाभाविक थी कि आरबीआई के अधिकारियों को लगा कि यही चेहरा पूरे देश को एकजुट कर सकता है.
आजादी के बाद नोटों पर क्या छापा जाता था?
1947 में भारत आजाद हुआ. उससे पहले नोटों पर ब्रिटिश राजा जॉर्ज छठे की तस्वीर छपती थी. आजादी के बाद सब सोचते थे कि अब गांधीजी की तस्वीर आ जाएगी. आरबीआई ने कुछ डिजाइन भी तैयार किए. लेकिन आखिरकार फैसला हुआ कि अशोक स्तंभ के सिंह (लॉयन कैपिटल ऑफ सारनाथ) को छापा जाए. कारण यह था कि उस समय सबकी सहमति इसी राष्ट्रीय चिह्न पर बनी. 1949 में एक रुपये का नया नोट आया, जिसमें अशोक स्तंभ था. 1950 में 2, 5, 10 और 100 रुपये के नोट भी इसी चिह्न के साथ आए. बाद में नोटों पर कोणार्क मंदिर, बृहदीश्वर मंदिर, गेटवे ऑफ इंडिया जैसे स्मारक भी छापे गए. जानवरों की तस्वीरें भी आईं. लेकिन एक समस्या थी.
क्यों चुना गया इंसान का चेहरा?
1990 के दशक में आरबीआई ने देखा कि प्रिंटिंग, स्कैनिंग और फोटोग्राफी की नई तकनीक से नकली नोट बनाना आसान हो गया है. पत्थर के स्मारक या जानवर की तस्वीर आसानी से नकल की जा सकती है. लेकिन इंसान का चेहरा नकल करना बहुत मुश्किल होता है. खासकर अगर चेहरा इतना जाना-पहचाना हो कि हर कोई तुरंत पहचान ले. आरबीआई चाहता था ऐसा चेहरा जो देश की हर भाषा, धर्म, जाति और क्षेत्र के लोगों को स्वीकार हो. कोई विवाद न हो. महात्मा गांधी का चेहरा सबसे उपयुक्त लगा. वे पूरे देश के पिता कहलाते थे. उनकी सादगी, अहिंसा और सच्चाई हर किसी को अपनी लगती थी.
कब-कब आई गांधीजी की तस्वीर?
गांधीजी की तस्वीर पहली बार 1969 में नोट पर आई. वह साल उनके जन्म की 100वीं जयंती का था. तब 100 रुपये का एक विशेष नोट छापा गया, जिसमें गांधीजी सेवाग्राम आश्रम के सामने बैठे दिख रहे थे. 1987 में 500 रुपये के नोट पर मुस्कुराते गांधीजी की तस्वीर नियमित रूप से आई. और 1996 में आरबीआई ने पूरी महात्मा गांधी सीरीज शुरू कर दी. इसमें 10 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक के सभी नोटों पर यही मुस्कुराता चेहरा छापा गया. पुराने अशोक स्तंभ वाले नोट बदल दिए गए. 2016 में नई सीरीज आई, लेकिन गांधीजी का चेहरा वैसा ही रहा.
क्यों यही मुस्कान चुनी गई?
फोटो में गांधीजी की मुस्कान बहुत खास थी. न ज्यादा हंसी, न गंभीरता. बस एक शांत, स्नेह भरी मुस्कान. आरबीआई के अधिकारियों को लगा कि यही मुस्कान देश की विविधता में सबको एक कर सकती है. यह चेहरा जालसाजी रोकने में भी मददगार है क्योंकि लोग तुरंत पहचान लेते हैं कि नोट असली है या नकली. अगर कोई और नेता या देवी-देवता छापते तो विवाद हो सकता था. लेकिन गांधीजी पर कोई आपत्ति नहीं. यहां तक कि जब कभी कोई सुझाव आया कि किसी और को छापें, तो आरबीआई ने साफ कहा कि गांधीजी से बेहतर कोई प्रतीक नहीं हो सकता.
आरबीआई ने कैसे काम किया?
आरबीआई का करेंसी मैनेजमेंट विभाग नोट का डिजाइन बनाता है. फिर केंद्रीय बैंक और केंद्र सरकार की मंजूरी लेनी पड़ती है. 1946 की इस फोटो को चुनने वाले व्यक्ति का नाम भी आज तक पता नहीं. लेकिन फैसला इतना सही था कि आज 80 साल बाद भी वही मुस्कान हर नोट पर है.