Agency:एजेंसियां
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बड़े-बड़े इन्वेस्टर्स में अब चीन को लेकर उस तरह की घबराहट नजर नहीं आ रही है, जो चार साल तक दिखी थी. इसलिए माना जा रहा है कि अब इन्वेस्टर्स चीन में इन्वेस्ट करेंगे, वहां से भागेंगे नहीं. और यही लाइन भारत के लिए मुश्किलें खड़ी करने वाली हो सकती है. भारत से विदेशी निवेशक पहले ही पैसा निकाल रहे हैं.
शेयर बाजार को लेकर चौंकाने वाली खबर सामने आई है. (Photo-Canva)
शेयर मार्केट में क्या और गिरावट आएगी, या बाजार यहीं से पुशबैक करेगा? इस सवाल का जवाब, छोटा हो या बड़ा हर इन्वेस्टर्स जानना चाहता है. हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं. ईरान का कोई समाधान नहीं है. क्रूड की कीमतें अलग लेवल पर हैं. बॉन्ड यील्ड बेचैन कर रहा है तो अब चीन से आई एक नई रिपोर्ट ने हलचल और बढ़ा दी है. यह रिपोर्ट संकेत दे रही कि निवेशकों का चीन पर से जो भरोसा कम हो रहा था, वह फिर से बढ़ने लगा है.
दरअसल, बैंक ऑफ अमेरिका ने करीब 2800 ग्लोबल फंड्स पर एनालिसिस की. यह जानने की कोशिश की कि अब आगे वे कहां पैसा लगाने वाले हैं. उनका ट्रेंड क्या कहता है. इसमें बैंक ऑफ अमेरिका को एक बदलाव नजर आया. चार साल तक ये निवेशक चीनी शेयरों में हिस्सेदारी घटा रहे थे. यानी वहां से पैसा निकाल रहे थे. लेकिन अब एवरेज इन्वेस्टमेंट अंडरवेट से निकलकर बेंचमार्क के बराबर हो गया है. यानी चीन से पैसा निकालने का सिलसिला फिलहाल थमता दिख रहा है. इसकी वजह चीन में एआई और टेक कंपनियों की संभावनाएं, बेहतर कमाई की उम्मीद और अपेक्षाकृत सस्ती वैल्यूएशन बताई जा रही है.
अब इसका भारत से क्या कनेक्शन?
दुनिया के बड़े फंड जब निवेश के लिए अलग-अलग देशों के बीच पैसा बांटते हैं, तो चीन का आकर्षण बढ़ने पर भारत को मिलने वाला हिस्सा प्रभावित हो सकता है. खासकर तब, जब विदेशी निवेशक पहले ही भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं. सितंबर में भारत को लेकर विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी कमजोर रहने की खबरें भी आई हैं.
अगर चीन में निवेश बढ़ता है और भारत में विदेशी फंड अपनी हिस्सेदारी और घटाते हैं, तो भारतीय शेयरों पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव आ सकता है और बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि चीन में जाने वाला हर डॉलर सीधे भारत से निकलेगा. यह फंडों की कुल एशियाई और उभरते बाजारों की रणनीति पर निर्भर करेगा.